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World Elder Abuse Awareness Day: अपनों के सताए बुजुर्ग, गैरों के बीच ढूंढ रहे खुशी...हर कहानी में बेइंतहा दर्द

Sat, 15 Jun 2024 09:25 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 15 Jun 2024 09:25 AM IST
सार

World Elder Abuse Awareness Day: विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस 15 जून यानि आज मनाया जा रहा है। ये दिवस उस दुर्व्यवहार, भेदभाव और उपेक्षा के बारे में जागरूकता करने के लिए जिसका बुजुर्ग सामना करते हैं।
 

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World Elder Abuse Awareness Day Elderly tormented by their looking for happiness among strangers
वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों की कहानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपनों के सताए, बच्चों के दुर्व्यवहार के कारण घर से निकाले गए सैंकड़ों बुजुर्ग वृद्धाश्रम में रहकर गैरों के बीच में अपनी खुशी ढूंढते हैं। सुबह-शाम बुजर्गों की आंखों में झड़ते आंसू अपनों के दिए कष्ट को याद दिलाते हैं। आश्रमों में रहने वाले हर बुजुर्ग की अंतिम इच्छा है कि उनके आखिरी समय में अब भी अपनों के प्यार से दो मीठे बोल सुनने को मिल जाएं। यह उनके लिए वह बोल अमृत के समान होंगे।
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15 जून को पूरे विश्व में विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरुकता दिवस मनाया जाता है। लोगों को जागरूक किया जाता है कि बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार न किया जाए। लेकिन आश्रम में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या के इस बात का सबूत है कि अपने ही बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। शहर में कई वृद्ध आश्रम खुल चुके हैं। शहर के समाजसेवी बुजुर्गों की सेवा करने के लिए तत्पर दिख रहे हैं, तो वहीं उनके खुद के बच्चे उनको रखने तक को भी राजी नहीं। सिकंदरा स्थित रामलाल वृद्ध आश्रम के अध्यक्ष शिवप्रसाद शर्मा बताते हैं कि उनके सबसे पुराने आवास विकास सेक्टर 10 वृद्धाश्रम में 30 बुजुर्ग, सिकंदरा वाले में 356 व नोएडा के आश्रम में 50 बुजुर्ग रह रहे हैं। अब तो हर दिन आश्रम में 1 या 2 बुजुर्ग रहने के लिए पहुंच रहे हैं।
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दौलत के बावजूद सुख नहीं
95 वर्षीय विद्या देवी अग्रवाल बताती हैं कि 'मेरे दो बेटे हैं उन दोनों की ही दो फैक्टरी है। धन-दौलत सभी चीज से संपन्न होने के बावजूद भी मैं पिछले दो साल से वृद्ध आश्रम में रह रही हूं। बेटे आज तक पूछने तक भी नहीं आए।'

प्रताड़ना से मन दुखी
77 वर्षीय राजारानी गोयल ने कहा कि 'पिछले 10 साल से आश्रम में रह रही हूं। दो बेटे हैं आज तक किसी ने हमारे बारे में पूछा तक भी नहीं। अब आश्रम के लोगों को ही मैं अपना परिवार मानती हूं। पर, बच्चों के द्वारा दी गई प्रताड़ना को याद कर आज भी मन दुखी हो जाता है।' 
 
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मारपीट कर घर से निकाला
 102 वर्षीय कृपाल सिंह ने बताया कि 'बच्चों ने मारपीट कर घर से निकाल दिया। 102 वर्ष का हूं डेढ़ साल से आश्रम में रह रहा हूं। जिन बच्चों को पाला उन्होंने ही मारपीट कर घर से निकाल दिया।'
 
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