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विश्व एड्स दिवसः एड्स रोगी 152 गर्भवती महिलाओं ने जन्मे स्वस्थ बच्चे, समलैंगिकों में दोगुने बढ़े मामले

Mon, 30 Nov 2020 04:57 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 30 Nov 2020 04:57 AM IST
सार

  • 116 महिलाएं और उनके शिशु अभी उपचाराधीन
  • विशेषज्ञ चिकित्सक इनकी निगरानी कर रहे हैं

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World Aids Day: 152 Pregnant Women Born Healthy Baby Homosexual Cases   Doubled
एड्स

विस्तार

एड्स रोगी महिला यदि जागरूक हो तो वह अपनी बीमारी को संतान में जाने से बचा सकती है। इस बार एसएन मेडिकल कॉलेज में अभी तक एड्स रोग से पीड़ित 272 महिलाओं के प्रसव कराए जा चुके हैं। इसमें से 152 की संतान पूरी तरह से स्वस्थ है। चार की संतान ही संक्रमित हुई। डॉक्टरों ने बताया कि संक्रमित महिला का गर्भधारण के दौरान सीडी-4 जांच कराने के बाद इनका इलाज चलता है। प्रसव के बाद 18 महीने तक बच्चे की भी जांच और दवाएं चलती हैं।
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समलैंगिकों में दोगुने बढ़े एड्स के मामले
समलैंगिक संबंधों से एड्स की बीमारी तेजी से फैल रही है। बीते साल के मुकाबले इस साल इस तरह के दोगुने मरीज मिले हैं। एसएन के एआरटी सेंटर में 163 मरीज पंजीकृत हैं। बीते साल इनकी संख्या 128 थी, जिसमें 16 नए मामले थे। इस बार 28 नए मामले मिले हैं।
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केस एक: 
गढ़ी भदौरिया की 27 साल की महिला को उसके पति से यह बीमारी मिली। उन्होंने बताया कि जांच में पुष्टि होने पर हार मान ली, लेकिन काउंसिलिंग और चिकित्सकीय निगरानी में बेटे को जन्म दिया। वह पूरी तरह से स्वस्थ है।
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केस दो: 
प्रकाश नगर की 23 साल की महिला ने बीमार रहने पर जांच कराई तो एड्स की जानकारी हुई। पति भी संक्रमित मिला। संक्रमण के डर से संतान करने की मन से निकाल दी। लेकिन, डॉक्टरों के परामर्श से उनके दो बच्चे हैं और स्वस्थ हैं।

संक्रमित रक्त चढ़ाने और इंजेक्शन लगाने से भी मिली बीमारी
संक्रमित रक्त मरीज को चढ़ाने और इंजेक्शन लगाने से भी लोगों को यह बीमारी मिल रही है। संक्रमित रक्त से 460 लोग, इंजेक्शन लगाने से 324 और नशे के लिए संक्रमित इंजेक्शन लगाने से 132 लोग संक्रमित मिले हैं।

जांच और इलाज के बाद संतान में नहीं मिलता संक्रमण: डॉ. सरोज
एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह ने बताया कि संक्रमित गर्भवती का पूरे नौ महीने इलाज चलता है। नवजात का 18 महीने तक इलाज करते हैं। अभी तक 152 में पूरी सफलता मिली, चार की संतान में ही संक्रमण मिला है।

सावधानी से सामान्य जीवन जी रहे हैं मरीज: डॉ. जितेंद्र 
एसएन के एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी के प्रभारी डॉ. जितेंद्र दौनेरिया ने बताया कि एड्स के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ी है, इलाज और सावधानी के कारण एड्स के मरीज सामान्य जीवन जी रहे हैं। नौकरी, व्यापार भी कर रहे हैं। 
 
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