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आगरा की 'टॉयलेट एक प्रेम कथा': शौचालय नहीं बनवाया तो मायके गई पत्नी, पति के वादे पर लौटी

Mon, 12 Jul 2021 12:22 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 12 Jul 2021 12:22 AM IST
सार

अभिनेता अक्षय कुमार की चर्चित फिल्म 'टॉयलेट- एक प्रेम कथा' जैसी कहानी आगरा के एक परिवार में सामने आई। यहां मकान की तीसरी पर टॉयलेट नहीं बनवाया तो पति से झगड़े के बाद पत्नी घर छोड़कर चली गई।  

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woman went to maternal home for not built toilet in the house in agra
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में घर की तीसरी मंजिल पर टॉयलेट बनवाने की जिद कर रही पत्नी का पति से झगड़ा हो गया। चार महीने पहले विवाहिता मायके चली गई। बाद में पति के खिलाफ पुलिस से शिकायत कर दी। मामला परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा। दो महीने में टॉयलेट बनवाने के वादे पर पत्नी पति के साथ घर लौट गई।

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कोतवाली क्षेत्र के एक युवक का निकाह सात साल पहले हुआ था। वो फर्नीचर का काम करता है। उनकी एक बेटी भी है। परिवार तीन मंजिला घर में रहता है। मगर, टॉयलेट भूतल पर बना है। टॉयलेट के लिए पति-पत्नी को भूतल पर आना पड़ता है। पत्नी काफी समय से पति से टॉयलेट तीसरी मंजिल पर बनवाने की जिद कर रही थी। 
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उसका कहना था कि सीढ़ियों से नीचे बार-बार आने पर परेशानी होती है। बच्चे को भी अकेले छोड़ना पड़ता है। मगर, पति मान नहीं रहा था। इससे विवाद बढ़ गया। कुछ महीने पहले पत्नी मायके चली गई। पुलिस से शिकायत की। पति पर मारपीट के आरोप लगाए। मामला परिवार परामर्श केंद्र भेजा गया। रविवार को पति-पत्नी को बुलाया गया था। 

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काउंसलर के सामने पत्नी ने कहा कि पति टॉयलेट बनवाए, तब ही घर जाऊंगी। काउंसलर ने समझाया कि तीसरी मंजिल से भूतल पर आने में परेशानी की बात सही है। इसलिए टॉयलेट बनवाएं। काउंसलर के समझाने पर पति मान गया। उसने दो महीने का समय मांगा है। 

इस पर पत्नी उसके साथ जाने के लिए तैयार हो गई। दोनों साथ चले गए। केंद्र प्रभारी कमर सुल्ताना का कहना था कि तीसरी मंजिल पर टॉयलेट नहीं होने की वजह से महिला को परेशानी हो रही थी। पति छत पर टॉयलेट बनवाने के लिए राजी हो गया। इस पर दोनों साथ चले गए। 

चार दंपती हुए एक साथ
केंद्र की प्रभारी कमर सुल्ताना ने बताया कि रविवार को काउंसिलिंग के लिए दस जोड़े ही उपस्थित हुए, जबकि 37 जोड़ों में एक पक्ष आया। काउंसिलिंग के बाद चार में सुलह कराई गई। 22 मामलों में एक पक्ष ने फाइल निस्तारित करा दी। तीन केस में मुकदमे दर्ज कराने के लिए संस्तुति की गई है। 

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