Firozabad News: बंदरों ने किया हमला, बचने के लिए भागी महिला तीसरी मंजिल से नीचे गिरी, दर्दनाक मौत
फिरोजाबाद में बंदरों का इस कदर आतंक है कि लोगों की जान जा रही है। बुधवार को एक महिला की जान चली गई। उस पर बंदरों ने हमला कर दिया था। बंदरों से बचकर भागते समय वह तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई।
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फिरोजाबाद में बंदरों के आतंक से एक महिला की जान चली गई। दक्षिण थाना क्षेत्र में गली बोहरान स्थित श्याम गली निवासी 35 वर्षीय महिला को छत पर बंदरों ने दौड़ा लिया। बंदरों से बचने के लिए भागी महिला मकान की तीसरी मंजिल से नीचे गली में जा गिर गई, जिससे उसकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद लोगों में नगर निगम प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है।
दक्षिण थाना क्षेत्र की गली बोहरान स्थित श्याम गली निवासी रेनू गुप्ता (35) पत्नी अंकित गुप्ता बुधवार सुबह करीब आठ बजे मकान की तीसरी मंजिल पर रखी पानी की टंकी को देखने गई थी। क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि तभी रेनू पर बंदरों ने हमला कर दिया। बंदरों से बचने के लिए रेनू भागी। इसी दौरान वह तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई।
तेज आवाज होने पर लोग घरों से बाहर निकल आए। गली में खून से लथपथ पड़ी रेनू को परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां चिकित्सक ने महिला को मृत घोषित कर दिया। महिला की मौत की पुष्टि होते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन शव को लेकर घर ले गए। इस बीच महिला के मायका पक्ष के लोग भी मौके पर पहुंच गए।
परिजनों ने पुलिस को नहीं दी सूचना
मायके वालों ने रेनू की मौत पर आशंका जाहिर भी की, लेकिन क्षेत्रीय लोगों द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। थानाध्यक्ष दक्षिण राजेश पांडेय का कहना है कि महिला की मौत की सूचना मिली थी, लेकिन परिजनों ने कोई खबर नहीं दी। यदि परिजन सूचना देते तो शव का पोस्टमार्टम कराकर जांच की जाती।
गली बोहरान श्याम गली में बंदरों के हमले से हुई रेनू की मौत के बाद लोगों में आक्रोश है। बता दें कि नई बस्ती निवासी आशीष अग्रवाल जैन की मौत के बाद चंद दिनों तक अभियान चला। इसके बाद बंद कर दिया गया। बंदरों को पकड़वाने के लिए न तो नगर निगम के अफसर ध्यान दे रहे और न ही जिला प्रशासन। जिसको लेकर बंदरों का आंतक दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है।
दुर्गानगर के मोहित गर्ग, ओमनगर निवासी राकेश जैन और जैननगर निवासी मनीष अग्रवाल का कहना है कि आशीष अग्रवाल की मौत के बंदर पकड़वाने के लिए नगर निगम द्वारा दो तीन दिन ही अभियान चलाया गया। इसके बाद बंद कर दिया गया। बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।