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जयपुर से 200 किमी पैदल चली गर्भवती ने सड़क पर जन्मा ‘प्रकाश’, आगरा में 24 घंटे किया बस का इंतजार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 22 May 2020 01:03 AM IST
सार
राजस्थान के भरतपुर में सड़क पर हुआ महिला का प्रसव
24 घंटे बाद गुरुवार को आगरा से झांसी की बस मिली
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आगरा आईएसबीटी पर मां की गोद में नवजात
- फोटो : अमर उजाला
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जब मजदूरों की मदद के नाम पर बसों को लेकर उत्तर प्रदेश-राजस्थान बॉर्डर पर सियासी बवाल मचा हुआ था, उसी दौरान जयपुर से करीब 200 किमी पैदल चलकर आई बांदा की महिला मजदूर राजकुमारी ने भरतपुर में सड़क पर बच्चे को जन्म दिया। दुश्वारियों के अंधेरे के बीच परिवार ने इसका नाम रखा प्रकाश। इसके बाद परिवार ट्रक में बैठकर आगरा आईएसबीटी आया। यहां 24 घंटे इंतजार के बाद गुरुवार को झांसी की बस मिली। उसी से यह परिवार चला गया।
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आगरा आईएसबीटी पर श्रमिक परिवार
- फोटो : अमर उजाला
अनिल जयपुर में मजदूरी करता था। जेब खाली हो गई, घर में खाने के लिए कुछ बचा नहीं, पत्नी राजकुमारी नौ माह की गर्भवती थी। अनिल ने बताया कि सोचा कि कुछ दिन और रुक जाऊं, लेकिन अन्न का एक दाना तक नहीं था घर में, इसलिए भगवान पर भरोसा करके चल दिए।
अनिल ने सोचा था कि आगरा तक के लिए बस या ट्रक कुछ तो मिल जाएगा, लेकिन पैदल ही चलना पड़ा। भरतपुर के पास पहुंचते ही राजकुमारी को प्रसव पीड़ा हुई। साथ चल रहीं महिलाओं ने उसका प्रसव कराया। जिंदगी में दूर तक अंधेरा नजर आ रहा है, इसलिए हमने बच्चे का नाम प्रकाश रखा है।
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अनिल कुमार
- फोटो : अमर उजाला
अनिल ने बताया कि प्रसव के बाद थोड़ी देर वहीं रुके, इसके बाद एक ट्रक वाले ने जच्चा-बच्चा को देखकर ट्रक रोका, हम सब उसमें बैठकर आगरा आ गए। इससे पहले दो दिन में करीब 200 किमी पैदल चल चुके थे। तीसरे दिन आगरा पहुंचे। चौथे दिन गुरुवार को यहां से झांसी की बस मिली।
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अनिल और उसकी पत्नी व नवजात बेटा
- फोटो : अमर उजाला
'आगरा के लोग बहुत अच्छे हैं...'
अनिल ने बताया कि उसके साथ बांदा के 30-40 लोग और हैं। वे जैसे ही आगरा बस अड्डे (आईएसबीटी) पर उतरे, उन्हें खाना और पानी मिल गया। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। कई लोग सेवा कार्य कर रहे हैं। जैसे ही उन्हें पता चला कि जच्चा-बच्चा भी साथ में है, तो केला, सेब, चना सहित खाने की कई चीजें ले आए।
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