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अफसरों-नेताओं के घरों के सामने क्यों नहीं तोड़े रैंप
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Tue, 25 Aug 2015 01:44 AM IST
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शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत सोमवार को नगर निगम, पुलिस और प्रशासन की टीम ने आवास विकास कालोनी में अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाया। घरों के सामने नाले और नालियों को पाटकर बनाए गए रैंप भी तोड़ दिए गए। इस पर कुछ लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया और भेदभाव का आरोप लगाया।
श्रावण मास के सोमवार को शिव मंदिरों पर लगने वाले मेलों के चलते इस दिन अभियान स्थगित कर दिया जाता था, लेकिन इस बार आवास विकास कालोनी में कार्रवाई की गई। अधिकारियों का कहना था कि इस क्षेत्र में पहले अभियान चलाया गया था, लेकिन बड़ा क्षेत्र के होने के चलते कार्रवाई पूरी नहीं हुई थी। टीम ने पानी की टंकी से कारगिल पेट्रोल पंप की ओर कार्रवाई की। सेंट्रल पार्क रोड पर अतिक्रमण हटाए। नगर निगम के अफसरों ने पहले ही मुनादी करा दी थी, इसके चलते लोगों ने रविवार रात ही अपने कब्जे ध्वस्त कर लिए थे। शेष टीम ने जेसीबी मशीन से ढहा दिए। कई जगह अभियान का विरोध भी हुआ। लोगों ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में निगम के कुछ कर्मचारी और अधिकारी रहते हैं, उनके घरों के आगे रैंप नहीं तोड़े गए। कुछ सपा नेता के निवास के सामने भी कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्रीय निवासी नोविल स्मिथ ने बताया कि उनके घर के बाहर लगे पेड़ों को भी नहीं छोड़ा गया। नगर निगम के सहायक अभियंता एसपी वार्ष्णेय ने आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया कि किसी को भी रियायत नहीं दी गई। अभियान में सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस चौहान भी मौजूद रहीं।
सेक्टर 14 में मां-बेटी का हंगामा
सेक्टर 14 में अतिक्रमण की शिकायत पर जैसे ही जेसीबी मशीन आरबीएस कॉलेज के प्रोफेसर डीएस उपाध्याय के मकान पर पहुंची, वैसे ही हंगामा शुरू हो गया। गृह स्वामिनी अपनी बेटी को लेकर जेसीबी मशीन के सामने खड़ी हो गई। उन्होंने मांगे जाने पर मानचित्र नहीं दिखाया। सिटी मजिस्ट्रेट ने समझाने की कोशिश की लेकिन मानी नहीं और विरोध करती रहीं। उनसे कहा गया कि जहां तक निशान लगाया गया है, वहीं तक का निर्माण गिराया जाएगा, लेकिन वे जेसीबी के सामने से नहीं हटीं। सिटी मजिस्ट्रेट को महिला पुलिस बुलानी पड़ी। इसके बाद उन्होंने हंगामा और तेज कर दिया। दोनों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनकी पुलिस से भी धक्कामुक्की हुई। इस बीच उनके मकान के रैंप का कुछ हिस्सा जेसीबी ने तोड़ दिया। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट ने दोनों को छुड़वा दिया। महिला का कहना था कि घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं था, इसलिए मानचित्र नहीं दिखा सके। प्रशासन ने बिना कोई नोटिस दिए मनमाने ढंग से कार्रवाई की। उधर सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि पूरी कालोनी में लोगों की रैंप तोड़े गई है। किसी ने विरोध नहीं किया। उस महिला ने बेवजह हंगामा किया है। चार मंजिला मकान भी अवैध रूप से बना हुआ है। आवास विकास परिषद इस मामले में मुकदमा भी दर्ज करा चुका है।
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श्रावण मास के सोमवार को शिव मंदिरों पर लगने वाले मेलों के चलते इस दिन अभियान स्थगित कर दिया जाता था, लेकिन इस बार आवास विकास कालोनी में कार्रवाई की गई। अधिकारियों का कहना था कि इस क्षेत्र में पहले अभियान चलाया गया था, लेकिन बड़ा क्षेत्र के होने के चलते कार्रवाई पूरी नहीं हुई थी। टीम ने पानी की टंकी से कारगिल पेट्रोल पंप की ओर कार्रवाई की। सेंट्रल पार्क रोड पर अतिक्रमण हटाए। नगर निगम के अफसरों ने पहले ही मुनादी करा दी थी, इसके चलते लोगों ने रविवार रात ही अपने कब्जे ध्वस्त कर लिए थे। शेष टीम ने जेसीबी मशीन से ढहा दिए। कई जगह अभियान का विरोध भी हुआ। लोगों ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में निगम के कुछ कर्मचारी और अधिकारी रहते हैं, उनके घरों के आगे रैंप नहीं तोड़े गए। कुछ सपा नेता के निवास के सामने भी कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्रीय निवासी नोविल स्मिथ ने बताया कि उनके घर के बाहर लगे पेड़ों को भी नहीं छोड़ा गया। नगर निगम के सहायक अभियंता एसपी वार्ष्णेय ने आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया कि किसी को भी रियायत नहीं दी गई। अभियान में सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस चौहान भी मौजूद रहीं।
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सेक्टर 14 में मां-बेटी का हंगामा
सेक्टर 14 में अतिक्रमण की शिकायत पर जैसे ही जेसीबी मशीन आरबीएस कॉलेज के प्रोफेसर डीएस उपाध्याय के मकान पर पहुंची, वैसे ही हंगामा शुरू हो गया। गृह स्वामिनी अपनी बेटी को लेकर जेसीबी मशीन के सामने खड़ी हो गई। उन्होंने मांगे जाने पर मानचित्र नहीं दिखाया। सिटी मजिस्ट्रेट ने समझाने की कोशिश की लेकिन मानी नहीं और विरोध करती रहीं। उनसे कहा गया कि जहां तक निशान लगाया गया है, वहीं तक का निर्माण गिराया जाएगा, लेकिन वे जेसीबी के सामने से नहीं हटीं। सिटी मजिस्ट्रेट को महिला पुलिस बुलानी पड़ी। इसके बाद उन्होंने हंगामा और तेज कर दिया। दोनों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनकी पुलिस से भी धक्कामुक्की हुई। इस बीच उनके मकान के रैंप का कुछ हिस्सा जेसीबी ने तोड़ दिया। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट ने दोनों को छुड़वा दिया। महिला का कहना था कि घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं था, इसलिए मानचित्र नहीं दिखा सके। प्रशासन ने बिना कोई नोटिस दिए मनमाने ढंग से कार्रवाई की। उधर सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि पूरी कालोनी में लोगों की रैंप तोड़े गई है। किसी ने विरोध नहीं किया। उस महिला ने बेवजह हंगामा किया है। चार मंजिला मकान भी अवैध रूप से बना हुआ है। आवास विकास परिषद इस मामले में मुकदमा भी दर्ज करा चुका है।
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