फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   When will Soronji get the status of a pilgrimage town?

अमर उजाला अभियान- कब मिलेगा सूकरक्षेत्र को तीर्थनगरी का दर्जा- भगवान श्रीकृष्ण के वंशज ने 5040 वर्ष पूर्व सोरोंजी में की थी शिवल

Sat, 09 Oct 2021 07:42 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 09 Oct 2021 07:42 PM IST
विज्ञापन
When will Soronji get the status of a pilgrimage town?
सोरोंजी(कासगंज)। सोरोंजी क्षेत्र में भगवती भागीरथी के तट पर लहरा नाम से प्राचीन गंगातट है। यहां भगवान शिव का एक अत्यंत भव्य व प्राचीन मंदिर है। जिसे लहरेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। यहां दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
विज्ञापन

भगवान श्रीकृष्ण की तीसरी पीढ़ी के वंशज प्रद्युम्न के तीर्थनगरी में आने के पौराणिक प्रमाण हैं। लहरेश्वर मंदिर में उन्हीं के द्वारा शिवलिंग की स्थापना की गई थी। कई बार गंगा में जल बढ़ने पर भी यह मंदिर सदैव सुरक्षित रहा। मंदिर के साधू नारायण भारती ने बताया कि उनकी सात पीढ़ी पूर्व के पूर्वजों को मरथरा के ठाकुर परिवार ने मंदिर की सेवा पूजा का जिम्मा सौंपा था, तब से वह निरंतर मंदिर की सेवा पूजा करते आ रहे हैं। मथुरा की गंगा भक्त समिति हर वर्ष लहरा में गंगाजी के छप्पन भोग, रात्रि जागरण का वृहद आयोजन करती है। लहरा मार्ग पर ही अंजनीनंदन हनुमान नाम से अत्यंत प्राचीन मंदिर है इसमें हनुमान जी अंजनी माता की गोद में लेटे हैं ऐसा दुर्लभ मंदिर कहीं देखने को नहीं मिलता।
विज्ञापन

---------------
जन्मेजय ने किया था सर्प यज्ञ
अभिमन्यु पुत्र परीक्षित की तक्षक नाग के दंश से मौत हो गई थी। परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने पिता की मृत्यु का बदला लेेने के लिए तक्षक नाग के कुल का नाश करने के लिए सर्पयज्ञ किया। वे आज से 5040 वर्ष पूर्व सूकरक्षेत्र आए थे। -पंडित राहुल वशिष्ठ, तीर्थ पुरोहित
विज्ञापन
विज्ञापन

----
धरोहरों का है खजाना
सूकरक्षेत्र तो पौराणिक धरोहरों का खजाना हैं। यह भगवान वराह की मोक्ष स्थली हैं। उन्हीं के प्रभाव से यहां की हरि की पौड़ी गंगा में स्नान कर सूकरक्षेत्र में तप करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सरकार इसे तीर्थस्थल घोषित करे। -पंडित श्याम कुमार बडगैंया, तीर्थ पुरोहित
-----
यहां प्राचीनकाल से राजा महाराजा, दार्शनिक, धर्मप्रचारक, तपस्वियों, विदेशी सैलानियों के आने के प्रमाण हैं। वर्तमान में भी काफी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु आते हैं। आजादी से पूर्व इस धर्मनगरी के समृद्ध होने के प्रमाण है। -नरेश शर्मा, व्यवसायी

----
तीर्थनगरी में चोरों तरफ पौराणिक खजाना बिखरा हुआ है। 5 योजन यानि 52 किलोमीटर क्षेत्रफल में सूकरक्षेत्र की स्थिति का पौराणिक उल्लेख है। यहां आज भी श्रद्धालु आते हैं। सरकार को इस क्षेत्र को तीर्थ स्थल घोषित करना चाहिए। - मयंक वार्ष्णेय, व्यापारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed