{"_id":"6161a3328ebc3e965872b02b","slug":"when-will-soronji-get-the-status-of-a-pilgrimage-town-kasganj-news-agr5108545188","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमर उजाला अभियान- कब मिलेगा सूकरक्षेत्र को तीर्थनगरी का दर्जा- भगवान श्रीकृष्ण के वंशज ने 5040 वर्ष पूर्व सोरोंजी में की थी शिवल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमर उजाला अभियान- कब मिलेगा सूकरक्षेत्र को तीर्थनगरी का दर्जा- भगवान श्रीकृष्ण के वंशज ने 5040 वर्ष पूर्व सोरोंजी में की थी शिवल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोरोंजी(कासगंज)। सोरोंजी क्षेत्र में भगवती भागीरथी के तट पर लहरा नाम से प्राचीन गंगातट है। यहां भगवान शिव का एक अत्यंत भव्य व प्राचीन मंदिर है। जिसे लहरेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। यहां दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की तीसरी पीढ़ी के वंशज प्रद्युम्न के तीर्थनगरी में आने के पौराणिक प्रमाण हैं। लहरेश्वर मंदिर में उन्हीं के द्वारा शिवलिंग की स्थापना की गई थी। कई बार गंगा में जल बढ़ने पर भी यह मंदिर सदैव सुरक्षित रहा। मंदिर के साधू नारायण भारती ने बताया कि उनकी सात पीढ़ी पूर्व के पूर्वजों को मरथरा के ठाकुर परिवार ने मंदिर की सेवा पूजा का जिम्मा सौंपा था, तब से वह निरंतर मंदिर की सेवा पूजा करते आ रहे हैं। मथुरा की गंगा भक्त समिति हर वर्ष लहरा में गंगाजी के छप्पन भोग, रात्रि जागरण का वृहद आयोजन करती है। लहरा मार्ग पर ही अंजनीनंदन हनुमान नाम से अत्यंत प्राचीन मंदिर है इसमें हनुमान जी अंजनी माता की गोद में लेटे हैं ऐसा दुर्लभ मंदिर कहीं देखने को नहीं मिलता।
---------------
जन्मेजय ने किया था सर्प यज्ञ
अभिमन्यु पुत्र परीक्षित की तक्षक नाग के दंश से मौत हो गई थी। परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने पिता की मृत्यु का बदला लेेने के लिए तक्षक नाग के कुल का नाश करने के लिए सर्पयज्ञ किया। वे आज से 5040 वर्ष पूर्व सूकरक्षेत्र आए थे। -पंडित राहुल वशिष्ठ, तीर्थ पुरोहित
विज्ञापन
----
धरोहरों का है खजाना
सूकरक्षेत्र तो पौराणिक धरोहरों का खजाना हैं। यह भगवान वराह की मोक्ष स्थली हैं। उन्हीं के प्रभाव से यहां की हरि की पौड़ी गंगा में स्नान कर सूकरक्षेत्र में तप करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सरकार इसे तीर्थस्थल घोषित करे। -पंडित श्याम कुमार बडगैंया, तीर्थ पुरोहित
-----
यहां प्राचीनकाल से राजा महाराजा, दार्शनिक, धर्मप्रचारक, तपस्वियों, विदेशी सैलानियों के आने के प्रमाण हैं। वर्तमान में भी काफी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु आते हैं। आजादी से पूर्व इस धर्मनगरी के समृद्ध होने के प्रमाण है। -नरेश शर्मा, व्यवसायी
----
तीर्थनगरी में चोरों तरफ पौराणिक खजाना बिखरा हुआ है। 5 योजन यानि 52 किलोमीटर क्षेत्रफल में सूकरक्षेत्र की स्थिति का पौराणिक उल्लेख है। यहां आज भी श्रद्धालु आते हैं। सरकार को इस क्षेत्र को तीर्थ स्थल घोषित करना चाहिए। - मयंक वार्ष्णेय, व्यापारी
विज्ञापन
भगवान श्रीकृष्ण की तीसरी पीढ़ी के वंशज प्रद्युम्न के तीर्थनगरी में आने के पौराणिक प्रमाण हैं। लहरेश्वर मंदिर में उन्हीं के द्वारा शिवलिंग की स्थापना की गई थी। कई बार गंगा में जल बढ़ने पर भी यह मंदिर सदैव सुरक्षित रहा। मंदिर के साधू नारायण भारती ने बताया कि उनकी सात पीढ़ी पूर्व के पूर्वजों को मरथरा के ठाकुर परिवार ने मंदिर की सेवा पूजा का जिम्मा सौंपा था, तब से वह निरंतर मंदिर की सेवा पूजा करते आ रहे हैं। मथुरा की गंगा भक्त समिति हर वर्ष लहरा में गंगाजी के छप्पन भोग, रात्रि जागरण का वृहद आयोजन करती है। लहरा मार्ग पर ही अंजनीनंदन हनुमान नाम से अत्यंत प्राचीन मंदिर है इसमें हनुमान जी अंजनी माता की गोद में लेटे हैं ऐसा दुर्लभ मंदिर कहीं देखने को नहीं मिलता।
विज्ञापन
---------------
जन्मेजय ने किया था सर्प यज्ञ
अभिमन्यु पुत्र परीक्षित की तक्षक नाग के दंश से मौत हो गई थी। परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने पिता की मृत्यु का बदला लेेने के लिए तक्षक नाग के कुल का नाश करने के लिए सर्पयज्ञ किया। वे आज से 5040 वर्ष पूर्व सूकरक्षेत्र आए थे। -पंडित राहुल वशिष्ठ, तीर्थ पुरोहित
विज्ञापन
----
धरोहरों का है खजाना
सूकरक्षेत्र तो पौराणिक धरोहरों का खजाना हैं। यह भगवान वराह की मोक्ष स्थली हैं। उन्हीं के प्रभाव से यहां की हरि की पौड़ी गंगा में स्नान कर सूकरक्षेत्र में तप करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सरकार इसे तीर्थस्थल घोषित करे। -पंडित श्याम कुमार बडगैंया, तीर्थ पुरोहित
-----
यहां प्राचीनकाल से राजा महाराजा, दार्शनिक, धर्मप्रचारक, तपस्वियों, विदेशी सैलानियों के आने के प्रमाण हैं। वर्तमान में भी काफी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु आते हैं। आजादी से पूर्व इस धर्मनगरी के समृद्ध होने के प्रमाण है। -नरेश शर्मा, व्यवसायी
----
तीर्थनगरी में चोरों तरफ पौराणिक खजाना बिखरा हुआ है। 5 योजन यानि 52 किलोमीटर क्षेत्रफल में सूकरक्षेत्र की स्थिति का पौराणिक उल्लेख है। यहां आज भी श्रद्धालु आते हैं। सरकार को इस क्षेत्र को तीर्थ स्थल घोषित करना चाहिए। - मयंक वार्ष्णेय, व्यापारी