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गेहूं हुआ बेभाव, किसानों की मुश्किलें बढ़ीं
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मैनपुरी। गेहूं बेभाव होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नवीन मंडी में मनमानी कीमतों पर आढ़ती और व्यापारी गेहूं की खरीदारी कर रहे हैं। इससे किसान परेशान हैं। प्रशासन की लापरवाही के चलते खुलेआम किसानों से कम कीमत पर गेहूं की खरीद की जा रही है। गेहूं की कटाई के बाद से ही अब तक मंडी में व्यापारियों की मनमानी चलती आ रही है, जिससे किसान परेशान हैं।
जिले में गेहूं की पैदावार बहुतायत में होती है। ऐसे में नवीन मंडी में गेेहूं की बिक्री के लिए भी आवक खूब होती है। लेकिन इन दिनों गेहूं की कीमतों ने किसानों को बेहाल कर दिया है। नवीन मंडी में आढ़तियों और व्यापारियों की मनमानी के चलते किसानों से कम कीमत पर गेहूं खरीदा जा रहा है। वर्तमान में नवीन मंडी में किसानों से 1560 रुपये प्रति क्विंटल कीमत पर गेहूं खरीदा जा रहा है।
इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। चाहकर भी किसान कुछ नहीं कर पा रहे हैं। शासन द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके बाद भी किसानों को मंडी में बहुत कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ रहा है। दरअसल इसके पीछे मैनपुरी के ही व्यापारी बढ़ा कारण हैं। नवीन मंडी में अधिकांश व्यापारी जो खरीद करने के लिए पहुंचते हैं वे मैनपुरी के हैं। इसके कारण बाहर के व्यापारी यहां कम ही आते हैं। इसका फायदा उठाकर लोकल व्यापारी मनमानी कीमतों पर खरीद करते हैं।
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इतनी कम कीमत पर गेहूं का विक्रय कर किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। कई बार किसान प्रशासन से कीमतों में सुधार कराने की मांग कर चुके हैं। लेकिन कीमतों में सुधार के बजाए उल्टा गिरावट आ रही है।
हाईलाइर्ट्स
-1.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में होती है फसल
-06 लाख मीट्रिक टन होता है गेहूं का उत्पादन
-01 लाख से अधिक किसान करते हैं बुवाई
-25 प्रतिशत तक कम मिल रही गेहूं की कीमतें
किसानों की बात
-इस बार गेेहूं की फसल में किसानों को लागत भी नहीं मिल सकी। मनमानी कीमतों पर गेहूं खरीदा गया, जिससे किसानों को बहुत कम दाम मिला। प्रशासन ने सब कुछ जानने के बाद भी कुछ नहीं किया। -हाकिम सिंह, किसान
किसानों का हमेशा से ही शोषण किया जाता रहा है। इस बार पूरे साल नवीन मंडी में कम कीमत पर गेहूं की खरीद की गई। वर्तमान में तो कीमतें अब इतनी कम हो गई हैं कि लागत भी नहीं मिलेगी। -अनिल कुमार
आढ़तियों की बात
आढ़ती न तो गेहूं खरीदते हैं और न ही बेचते हैं। वे केवल कमीशन एजेंट हैं। इसीलिए आढ़ती चाहते हैं कि किसानों की फसल अधिक से अधिक कीमत पर बिके, जिससे हमें भी अधिक कमीशन मिल सके। -जितेंद्र कुमार, किसान
किसानों की फसलों के सहारे ही हमारा व्यापार चलता है। ऐसे में हमारा उद्देश्य किसान को अधिक कीमत दिलाना है। लेकिन अंत में सब कुछ व्यापारी के हाथ में ही होता है। इसमें हम कुछ नहीं कर सकते हैं।
दिनेश यादव।
-नवीन मंडी में फसलों की बिक्री नीलामी से की जाती है। जो भी अधिक कीमत देता है उसे ही फसल खरीदने का मौका दिया जाता है। अगर कोई नीलाम से बिक्री नहीं करता है तो किसान शिकायत कर सकते हैं।
एनके कोहली, मंडी सचिव।
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जिले में गेहूं की पैदावार बहुतायत में होती है। ऐसे में नवीन मंडी में गेेहूं की बिक्री के लिए भी आवक खूब होती है। लेकिन इन दिनों गेहूं की कीमतों ने किसानों को बेहाल कर दिया है। नवीन मंडी में आढ़तियों और व्यापारियों की मनमानी के चलते किसानों से कम कीमत पर गेहूं खरीदा जा रहा है। वर्तमान में नवीन मंडी में किसानों से 1560 रुपये प्रति क्विंटल कीमत पर गेहूं खरीदा जा रहा है।
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इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। चाहकर भी किसान कुछ नहीं कर पा रहे हैं। शासन द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके बाद भी किसानों को मंडी में बहुत कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ रहा है। दरअसल इसके पीछे मैनपुरी के ही व्यापारी बढ़ा कारण हैं। नवीन मंडी में अधिकांश व्यापारी जो खरीद करने के लिए पहुंचते हैं वे मैनपुरी के हैं। इसके कारण बाहर के व्यापारी यहां कम ही आते हैं। इसका फायदा उठाकर लोकल व्यापारी मनमानी कीमतों पर खरीद करते हैं।
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इतनी कम कीमत पर गेहूं का विक्रय कर किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। कई बार किसान प्रशासन से कीमतों में सुधार कराने की मांग कर चुके हैं। लेकिन कीमतों में सुधार के बजाए उल्टा गिरावट आ रही है।
हाईलाइर्ट्स
-1.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में होती है फसल
-06 लाख मीट्रिक टन होता है गेहूं का उत्पादन
-01 लाख से अधिक किसान करते हैं बुवाई
-25 प्रतिशत तक कम मिल रही गेहूं की कीमतें
किसानों की बात
-इस बार गेेहूं की फसल में किसानों को लागत भी नहीं मिल सकी। मनमानी कीमतों पर गेहूं खरीदा गया, जिससे किसानों को बहुत कम दाम मिला। प्रशासन ने सब कुछ जानने के बाद भी कुछ नहीं किया। -हाकिम सिंह, किसान
किसानों का हमेशा से ही शोषण किया जाता रहा है। इस बार पूरे साल नवीन मंडी में कम कीमत पर गेहूं की खरीद की गई। वर्तमान में तो कीमतें अब इतनी कम हो गई हैं कि लागत भी नहीं मिलेगी। -अनिल कुमार
आढ़तियों की बात
आढ़ती न तो गेहूं खरीदते हैं और न ही बेचते हैं। वे केवल कमीशन एजेंट हैं। इसीलिए आढ़ती चाहते हैं कि किसानों की फसल अधिक से अधिक कीमत पर बिके, जिससे हमें भी अधिक कमीशन मिल सके। -जितेंद्र कुमार, किसान
किसानों की फसलों के सहारे ही हमारा व्यापार चलता है। ऐसे में हमारा उद्देश्य किसान को अधिक कीमत दिलाना है। लेकिन अंत में सब कुछ व्यापारी के हाथ में ही होता है। इसमें हम कुछ नहीं कर सकते हैं।
दिनेश यादव।
-नवीन मंडी में फसलों की बिक्री नीलामी से की जाती है। जो भी अधिक कीमत देता है उसे ही फसल खरीदने का मौका दिया जाता है। अगर कोई नीलाम से बिक्री नहीं करता है तो किसान शिकायत कर सकते हैं।
एनके कोहली, मंडी सचिव।