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ये कैसा विकास: टाॅयलेट को 6 साल से सिस्टम की ‘छत’ का इंतजार, देखें ये रिपोर्ट

Mon, 23 Feb 2026 02:40 AM IST
आगरा ब्यूरो अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: आगरा ब्यूरो Updated Mon, 23 Feb 2026 02:40 AM IST
सार

सरकारी जमीन पर 17.98 लाख रुपये की लागत से टॉयलेट का निर्माण शुरू हो गया। नींव भरकर करीब 15-15 फीट ऊंची दीवारें खड़ी कर दी गईं।

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What kind of development is this: Toilets have been waiting for a roof for six years.
अधूरा टॉयलेट

विस्तार

 पत्थर के जिगर वालों को कहां दर्द की परवाह, दीवारें तो चुन दी हैं, बस छत ही तो बाकी है...। मशहूर शायर साहिर लुधियानवी का ये शेर नगर निगम की कार्यशैली को बयां करने के लिए काफी है। साल 2020 में तत्कालीन महापौर नवीन जैन ने पालीवाल पार्क व जोंस लाइब्रेरी आने वालों की सुविधा के लिए एक टॉयलेट के निर्माण के निर्देश दिए थे।
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पार्क क्षेत्र की सरकारी जमीन पर 17.98 लाख रुपये की लागत से टॉयलेट का निर्माण शुरू हो गया। नींव भरकर करीब 15-15 फीट ऊंची दीवारें खड़ी कर दी गईं। शिलान्यास का पत्थर भी लग गया जिसमें महापौर नवीन जैन, नगर आयुक्त निखिल टीकाराम फुंडे व अन्य के नाम दर्ज हैं। मगर, अब तक निर्माणाधीन टॉयलट की छत नहीं पड़ सकी है। छह साल से ये दीवारें सिस्टम के उदासीन रवैये को दर्शा रही हैं।
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कागजों में कभी शुरू नहीं हुआ काम
सिस्टम की नाकामी के इस उदाहरण की परतें उधेड़ने पर पता चला कि सरकारी दस्तावेज में काम कभी शुरू ही नहीं हुआ। महापौर के आदेश पर निगम के प्रशासनिक अमले ने साल 2020 में प्रस्ताव बनाकर सक्षम कमेटी से मंजूरी लेकर टेंडर किया। श्वेता जनहित संस्थान को काम आवंटित हुआ लेकिन निगम के दस्तावेज के अनुसार फर्म ने काम शुरू नहीं किया। बार-बार रिमाइंडर भेजने पर भी काम न करने पर निगम प्रशासन ने टेंडर निरस्त कर जुलाई 2021 को फिर टेंडर निकाला। हर्ष कंस्ट्रक्शन नाम की फर्म को काम मिला लेकिन उसने भी काम नहीं किया।
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जिम्मेदार बोले...काम कभी शुरू नहीं हुआ
टॉयलेट का निर्माण शुरू नहीं करने पर ही पहली फर्म का टेंडर निरस्त कर उसकी जमानत राशि जब्त करने के आदेश दिए गए थे। दूसरी फर्म ने भी काम नहीं किया। ऐेसे में यह जानकारी नहीं है कि दीवारें और शिलान्यास का पत्थर किसने लगाया। जांच कराएंगे। - अरविंद श्रीवास्तव, कार्यवाहक मुख्य अभियंता, नगर निगम


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