आगरा: जलभराव होने से स्कूल का परिसर बना तालाब, न बच्चे पहंच पाए और न शिक्षक
जिले के परिषदीय विद्यालय भूड़ का बाग में 50 विद्यार्थियों का पंजीकरण है। गुरुवार सुबह नौ बजे न विद्यार्थी थे और न ही शिक्षक। कंपोजिट विद्यालय में ईंटें रखकर बच्चे भवन तक पहुंचे।
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बारिश में आगरा जिले के तमाम परिषदीय विद्यालय तालाब में तब्दील हो गए हैं। विद्यार्थियों का विद्यालय में पहुंचना मुश्किल हो रहा है। गुरुवार को कंपोजिट विद्यालय, भूड़ का बाग, कमला नगर में एक पढ़ने के लिए एक भी विद्यार्थी नहीं पहुंचा।
विद्यालय का प्रांगण में पानी भरा हुआ है। यूटा के जिला महामंत्री राजीव वर्मा ने बताया कि स्कूलों की समस्या बेसिक शिक्षा अधिकारी को कई बार बताई जा चुकी है। जल्द ही जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर समस्या से अवगत कराया जाएगा।
सुबह नौ बजे तक कंपोजिट विद्यालय, भूड़ का बाग, कमला नगर में न तो कोई विद्यार्थी था न ही शिक्षक। फोन से बात करने पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजीव पाराशर ने बताया कि विद्यालय में 50 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। अभिभावक कोरोना के डर से और प्रांगण में पानी भरे होने से विद्यार्थी को भेजने के लिए तैयार नहीं है।
कायाकल्प के तहत विद्यालय की दशा ठीक कराने के लिए पार्षद को लिखा है। विभाग को भी सूचना दी है। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को वह अवकाश पर थे। प्रेरणा पोर्टल पर सहायक अध्यापक ने भी अवकाश डाला था, जिसको उन्होंने निरस्त कर दिया था। इससे वह विद्यालय देर से पहुंची।
ईंट रखकर भवन तक पहुंचे बच्चे
नगर निगम के बिल्कुल पीछे स्थित कंपोजिट विद्यालय, वजीरपुरा के सामने जलभराव है। शिक्षकों ने बताया कि समस्या से नगर निगम व विभाग को अवगत कराया गया है। कंपोजिट विद्यालय, गदपुरा, खंदौली के परिसर में भी जलभराव है। ईंट रखकर स्टाफ और विद्यार्थी विद्यालय भवन तक पहुंचे।
विद्यालय की सहायक अध्यापिका चारु मित्रा ने बताया कि आसपास बने घरों का पानी विद्यालय के गेट के सामने भरा रहता है। जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है। ग्राम प्रधान को काम कराने के लिए लिखा गया है। बृहस्पतिवार को पंजीकृत 260 में से 70 विद्यार्थी ही स्कूल पहुंचे।
बैठने की व्यवस्था नहीं
पूर्व माध्यमिक विद्यालय लखनपुरा कंपोजिट, खेरागढ़ बच्चों के बैठने की व्यवस्था नहीं है। इससे बच्चों को वापस भेज दिया गया। प्रधानाध्यापक सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय का भवन पहले ही गिर चुका है। उसके दो अतरिक्त कक्षों में से एक कमरा शेष रह गया है।
जूनियर स्कूल में तीन कमरा, जिसमें से एक कमरे में भोजन बनता है। दोनों विद्यालयों में कुल तीन कमरे में आठ कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं। यहां 245 बच्चों का पंजीकरण है। इससे कुछ कक्षाओं के बच्चों को वापस लौटना पड़ा।
‘कायाकल्प’ होगा
मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक महेश चंद्र ने कहा कि प्रधानाध्यापकों को संबंधित प्रधान और पार्षद से संपर्क करके विद्यालय में काम कराना है। जिन स्कूलों में पानी भर रहा है। इनका निरीक्षण कराया जाएगा। डीएम व सीडीओ से मिलकर कायाकल्प के तहत विद्यालयों में काम कराया जाएगा।