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Agra News: ब्लू कैटेगरी में होगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, 5 जून तक मांगीं आपत्तियां
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आगरा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कचरा प्रबंधन के लिए वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को प्रदूषण के लिहाज से ब्लू कैटेगरी में शामिल किया है। बोर्ड ने नगर निगम के इंसिनरेशन (भस्मीकरण) आधारित वेस्ट टू एनर्जी प्लांटों के लिए अपने नियमों में बदलाव करते हुए संशोधित ड्राफ्ट जारी किया है। इसमें लोगों से 5 जून तक सुझाव मांगे गए हैं। कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर इसी साल दिसंबर तक कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट शुरू होने वाला है।
संशोधित वर्गीकरण प्रणाली के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कचरा प्रबंधन के लिए वेस्ट टू एनर्जी प्लांटों को ब्लू कैटेगरी में शामिल किया है। यह वर्गीकरण प्रदूषण सूचकांक के आधार पर किया गया है। नए नियमों के तहत कचरे का कैलोरी मान 1500 किलो कैलोरी से कम है, तो उसे सीधे बॉयलर या इंसिनरेटर में नहीं डाला जा सकता। उसे अलग से मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी में अलग करना होगा।
केवल सूखा और उच्च कैलोरी वाला आरडीएफ ही जलाने में इस्तेमाल किया जाएगा। क्लोरीनयुक्त प्लास्टिक को जलाने पर पूरी तरह से रोक रहेगी। बॉयलर में केवल सीएनजी, एलएनजी, आरडीएफ या बायोगैस का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इन प्लांटों की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी। इनमें ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा।
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इसमें उत्सर्जन मानकों पार्टिकुलेट मैटर, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड की निगरानी की जाएगी। लीचेट को रोकने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट या मल्टी इफेक्ट इवेपोरेटर लगाना होगा। इन सभी मानकों के उल्लंघन पर प्लांट पर जुर्माना लगाया जाएगा और नियमित पर्यावरण ऑडिट भी होगा।-- -- -- -- -- --
यहां दर्ज करा सकते हैं आपत्तियां
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसंधान एवं विकास प्रभाग के निदेशक अनिल सी. रणवीर ने लोगों से सुझाव और आपत्तियां swm.cpcb@ gov.in पर भेजने के लिए कहा है।
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संशोधित वर्गीकरण प्रणाली के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कचरा प्रबंधन के लिए वेस्ट टू एनर्जी प्लांटों को ब्लू कैटेगरी में शामिल किया है। यह वर्गीकरण प्रदूषण सूचकांक के आधार पर किया गया है। नए नियमों के तहत कचरे का कैलोरी मान 1500 किलो कैलोरी से कम है, तो उसे सीधे बॉयलर या इंसिनरेटर में नहीं डाला जा सकता। उसे अलग से मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी में अलग करना होगा।
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केवल सूखा और उच्च कैलोरी वाला आरडीएफ ही जलाने में इस्तेमाल किया जाएगा। क्लोरीनयुक्त प्लास्टिक को जलाने पर पूरी तरह से रोक रहेगी। बॉयलर में केवल सीएनजी, एलएनजी, आरडीएफ या बायोगैस का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इन प्लांटों की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी। इनमें ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा।
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इसमें उत्सर्जन मानकों पार्टिकुलेट मैटर, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड की निगरानी की जाएगी। लीचेट को रोकने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट या मल्टी इफेक्ट इवेपोरेटर लगाना होगा। इन सभी मानकों के उल्लंघन पर प्लांट पर जुर्माना लगाया जाएगा और नियमित पर्यावरण ऑडिट भी होगा।
यहां दर्ज करा सकते हैं आपत्तियां
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसंधान एवं विकास प्रभाग के निदेशक अनिल सी. रणवीर ने लोगों से सुझाव और आपत्तियां swm.cpcb