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Vrindavan Kumbh Mela: कभी कुंभ मेला का आकर्षण होते थे हाथी, निकलती थी संतों की सवारी
Tue, 26 Jan 2021 12:03 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 26 Jan 2021 12:03 AM IST
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हाथी
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वृंदावन कुंभ मेला में कभी हाथियों की मौजूदगी आकर्षण का केंद्र बनती थी। साधु-संत हाथियों पर सवारी करते थे। यहां हाथियों की संख्या एक-दो नहीं 30 से 40 तक हो जाती थी। दो कुंभ मेला पहले वृंदावन में हाथी विचर (चिढ़) गया था। तब लोग घरों में कैद हो गए। यह वाक्या वृंदावन के लोगों के जहन में आज भी है।
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हरिद्वार से पहले वृंदावन में आयोजित होने वाले कुंभ मेला बैठक के रोचक किस्से यहां के लोगों के बीच एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। वैष्णवों के इस कुंभ में कभी हाथियों की मौजूदगी हुआ करती थी। वृंदावन के लिए यह हाथी साधु-संतों के बीच कौतूहल का विषय बनते थे।
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1998 से पहले के कुंभ तक बड़ी संख्या में यहां हाथी सहित अन्य जानवर लाए जाते थे। सांप, अजगर भी होते थे। लेकिन पिछले तीन कुंभों के दौरान हाथी पूरी तरह से गायब हैं। अब इन्हें सरकार की सख्ती के चलते यहां नहीं लाया जाता है। साधु-संतों की सवारी भी बगैर हाथी के निकलती है। वृंदावन कुंभ में हाथी से जुड़ी घटना यहां के लोगों को आज भी याद है।
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1986 के कुंभ में हाथी हो गया था पागल
वृंदावन के लोग बताते हैं कि 1986 के कुंभ के दौरान एक हाथी विचर गया था। इस हाथी ने संत देवरहा बाबा और टटिया स्थान के बीच के स्थल पर तबाही मचा दी थी। साधु-संतों के शिविर नष्ट कर दिए थे। मेला में भगदड़ मच गई थी।
इस घटना के साक्षी रहे वृंदावन वासियों का कहना है कि हाथी पागल हो गया था। उसने बिजली के खंभे तोड़ दिए थे। नल भी तोड़ डाले थे। इस हाथी का आतंक ऐसा व्याप्त हो गया कि लोगों ने घरों में कैद हो गए, जिसे बाद में मार दिया गया।
पत्थरपुरा निवासी डॉ. उमेशचंद्र शर्मा ने कहा कि हाथी के विचरने की घटना 1986 में आयोजित हुए वृंदावन कुंभ मेला की है। इस हाथी ने संपूर्ण मेला क्षेत्र में भगदड़ मचा दी थी। यह हाथी नगर में भी भाग दौड़ करने लगा था। लोगों ने अपने घरों के द्वार बंद कर दिए थे, जिसे मारकर नियंत्रित किया गया था।
पडरौना कुंज निवासी अशोक यज्ञ ने कहा कि पहले आसपास के लोग हाथी और साधु-संतों को देखने के लिए कुंभ में आते थे। एक हाथी ने मेला की शक्ल ही बदल दी थी। वह पीपों के पुल पर भी चढ़ गया था। जिसे मारकर यमुना किनारे ही जमीन पर दबा दिया गया था।
इस घटना के साक्षी रहे वृंदावन वासियों का कहना है कि हाथी पागल हो गया था। उसने बिजली के खंभे तोड़ दिए थे। नल भी तोड़ डाले थे। इस हाथी का आतंक ऐसा व्याप्त हो गया कि लोगों ने घरों में कैद हो गए, जिसे बाद में मार दिया गया।
पत्थरपुरा निवासी डॉ. उमेशचंद्र शर्मा ने कहा कि हाथी के विचरने की घटना 1986 में आयोजित हुए वृंदावन कुंभ मेला की है। इस हाथी ने संपूर्ण मेला क्षेत्र में भगदड़ मचा दी थी। यह हाथी नगर में भी भाग दौड़ करने लगा था। लोगों ने अपने घरों के द्वार बंद कर दिए थे, जिसे मारकर नियंत्रित किया गया था।
पडरौना कुंज निवासी अशोक यज्ञ ने कहा कि पहले आसपास के लोग हाथी और साधु-संतों को देखने के लिए कुंभ में आते थे। एक हाथी ने मेला की शक्ल ही बदल दी थी। वह पीपों के पुल पर भी चढ़ गया था। जिसे मारकर यमुना किनारे ही जमीन पर दबा दिया गया था।