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प्रधानाध्यापक और रसोइयों के बचाव में उतरे ग्रामीण
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बेवर। विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय दौदापुर की प्रधानाध्यापिका और रसोइयों पर की गई कार्रवाई का ग्रामीणों ने विरोध किया है। ग्रामीणों ने शनिवार को अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। वहीं प्रधान पर मामले को तूल देने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने कार्रवाई को वापस लिए जाने की मांग की है।
गांव दौदापुर के प्रधान प्रतिनिधि ने विद्यालय में छात्र-छात्राओं के साथ जातिगत भेदभाव की शिकायत की थी। जांच करने पहुंचे सीडीओ ने शिकायत को सही मानते हुए यहां तैनात प्रधानाध्यापिका को निलंबित करते हुए तैनात दोनों रसोइयों को बर्खास्त कर दिया था। शनिवार को दौदापुर के ग्रामीणों ने कार्रवाई की निंदा की। बच्चों को भी स्कूल नहीं भेजा। आक्रोशित ग्रामीणों का कहना था कि प्रधान द्वारा गांव का माहौल खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
वर्षों से कार्य कर रही रसोइयों को बहाल किया जाए तथा प्रधानाध्यपिका का निलंबन रद्द किया जाए। ग्रामीणों का कहना था कि इस स्थिति में वे अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे। शनिवार को नामांकित 80 बच्चों में से मात्र 6 ही विद्यालय पहुंचे। प्रदर्शन करने वालों में गजेंद्र सिंह, धर्मवीर सिंह, रमेश, बंटू, राघवेंद्र सिंह, अवनीश प्रताप, महावीर सिंह, अमन कुमार, राजेश शाक्य, संदीप कुमार, करू, श्रीकिशन शाक्य, छोटे पाल विश्वपाल शामिल रहे।
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खंड शिक्षाधिकारी ने ग्रामीणों को समझाया नहीं बनी बात
खंड शिक्षा अधिकारी अनुपम शुक्ला सूचना पर गांव पहुंचे ओर ग्रामीणों को समझाया कि बच्चों को विद्यालय भेजें। उनकी शिकायत से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। ग्रामीण एक ही जिद पर अड़े रहे कि पहले रसोइयों को बहाल किया जाए और प्रधानाध्यापिका का निलंबन निरस्त किया जाए।
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गांव दौदापुर के प्रधान प्रतिनिधि ने विद्यालय में छात्र-छात्राओं के साथ जातिगत भेदभाव की शिकायत की थी। जांच करने पहुंचे सीडीओ ने शिकायत को सही मानते हुए यहां तैनात प्रधानाध्यापिका को निलंबित करते हुए तैनात दोनों रसोइयों को बर्खास्त कर दिया था। शनिवार को दौदापुर के ग्रामीणों ने कार्रवाई की निंदा की। बच्चों को भी स्कूल नहीं भेजा। आक्रोशित ग्रामीणों का कहना था कि प्रधान द्वारा गांव का माहौल खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
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वर्षों से कार्य कर रही रसोइयों को बहाल किया जाए तथा प्रधानाध्यपिका का निलंबन रद्द किया जाए। ग्रामीणों का कहना था कि इस स्थिति में वे अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे। शनिवार को नामांकित 80 बच्चों में से मात्र 6 ही विद्यालय पहुंचे। प्रदर्शन करने वालों में गजेंद्र सिंह, धर्मवीर सिंह, रमेश, बंटू, राघवेंद्र सिंह, अवनीश प्रताप, महावीर सिंह, अमन कुमार, राजेश शाक्य, संदीप कुमार, करू, श्रीकिशन शाक्य, छोटे पाल विश्वपाल शामिल रहे।
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खंड शिक्षाधिकारी ने ग्रामीणों को समझाया नहीं बनी बात
खंड शिक्षा अधिकारी अनुपम शुक्ला सूचना पर गांव पहुंचे ओर ग्रामीणों को समझाया कि बच्चों को विद्यालय भेजें। उनकी शिकायत से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। ग्रामीण एक ही जिद पर अड़े रहे कि पहले रसोइयों को बहाल किया जाए और प्रधानाध्यापिका का निलंबन निरस्त किया जाए।