{"_id":"6a3835dfb551f463aa0b0e4d","slug":"vat-saptami-married-women-prayed-for-their-husbands-long-lives-by-worshipping-the-banyan-tree-the-immortal-tale-of-satyavan-and-savitri-resonated-under-the-shade-of-the-banyan-tree-in-bateshwar-agra-news-c-421-1-ad11001-10824-2026-06-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"वट सप्तमी : सुहागिनों ने वट वृक्ष पूजकर मांगी पति की दीर्घायु, बटेश्वर में बरगद की छांव में गूंजी सत्यवान-सावित्री की अमर कथा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वट सप्तमी : सुहागिनों ने वट वृक्ष पूजकर मांगी पति की दीर्घायु, बटेश्वर में बरगद की छांव में गूंजी सत्यवान-सावित्री की अमर कथा
विज्ञापन
बटेश्वर मे बट सप्तमी पर पाती कि लम्बी उम्र के लिए बरगद के वृक्ष कि पूजन परिक्रमा करती सुहागन मह
बटेश्वर। तीर्थ बटेश्वर में रविवार को वट सप्तमी का पर्व अटूट आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। यमुना में स्नान कर सोलह श्रृंगार में सजी सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की दीर्घायु की कामना की। भीड़ तीर्थ क्षेत्र में जुटना शुरू हो गई थी।
श्रद्धालु महिलाओं ने सबसे पहले यमुना नदी में स्नान किया। इसके बाद मुख्य शिवालय पहुंचकर देवाधिदेव महादेव के दर्शन-पूजन किए और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित प्राचीन बरगद (वट) वृक्षों की पूजा-अर्चना के लिए महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं। सुहागिनों ने पूरे विधि-विधान से वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसके तने पर कच्चे सूत का रक्षा-सूत्र लपेटा और अपने पति की दीर्घायु की कामना की। महिलाओं ने रोली, अक्षत, धूप, पुष्प, गूलर, पूड़ी, पकवान और फल आदि अर्पित कर वट वृक्ष को जल से सींचा। साथ ही भीगे चने और पकवानों का भोग लगाया गया। बरगद की छांव में बैठकर महिलाओं ने पूरी श्रद्धा के साथ सावित्री-सत्यवान की पौराणिक अमर कथा सुनी। पूरा तीर्थ परिसर सुहागिनों के पारंपरिक मंगल गीतों से गुंजायमान रहा। पूजा के बाद नवविवाहिताओं ने बुजुर्ग महिलाओं के पैर छूकर सदा सुहागिन रहने का आशीर्वाद लिया।
पतिव्रता सावित्री ने की थी व्रत की शुरुआत
मान्यता है कि इस पावन व्रत की शुरुआत पौराणिक काल में स्वयं पतिव्रता सावित्री ने की थी। उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और सतीत्व के बल पर यमराज को परास्त कर दिया था और इसी वट वृक्ष के नीचे अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। तभी से सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए इस परंपरा का निर्वहन करती आ रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रद्धालु महिलाओं ने सबसे पहले यमुना नदी में स्नान किया। इसके बाद मुख्य शिवालय पहुंचकर देवाधिदेव महादेव के दर्शन-पूजन किए और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित प्राचीन बरगद (वट) वृक्षों की पूजा-अर्चना के लिए महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं। सुहागिनों ने पूरे विधि-विधान से वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसके तने पर कच्चे सूत का रक्षा-सूत्र लपेटा और अपने पति की दीर्घायु की कामना की। महिलाओं ने रोली, अक्षत, धूप, पुष्प, गूलर, पूड़ी, पकवान और फल आदि अर्पित कर वट वृक्ष को जल से सींचा। साथ ही भीगे चने और पकवानों का भोग लगाया गया। बरगद की छांव में बैठकर महिलाओं ने पूरी श्रद्धा के साथ सावित्री-सत्यवान की पौराणिक अमर कथा सुनी। पूरा तीर्थ परिसर सुहागिनों के पारंपरिक मंगल गीतों से गुंजायमान रहा। पूजा के बाद नवविवाहिताओं ने बुजुर्ग महिलाओं के पैर छूकर सदा सुहागिन रहने का आशीर्वाद लिया।
विज्ञापन
पतिव्रता सावित्री ने की थी व्रत की शुरुआत
मान्यता है कि इस पावन व्रत की शुरुआत पौराणिक काल में स्वयं पतिव्रता सावित्री ने की थी। उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और सतीत्व के बल पर यमराज को परास्त कर दिया था और इसी वट वृक्ष के नीचे अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। तभी से सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए इस परंपरा का निर्वहन करती आ रही हैं।
विज्ञापन