एक्सक्लूसिव: कोरोना संक्रमण को मात दे चुके लोगों में टीका लगवाने के बाद आठ गुना एंटीबॉडी
- एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने कोरोना टीके के प्रभाव पर की स्टडी
- शोध के लिए 132 लोगों के नमूनों की जांच हुई, जिसमें सामने आया यह तथ्य
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सामान्य लोगों के मुकाबले कोरोना संक्रमण को मात दे चुके लोगों में टीका लगवाने के बाद आठ गुना तक एंटीबॉडी बन रही हैं। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के शोध में यह तथ्य सामने आया है। इस शोध के लिए 132 लोगों के नमूनों की जांच की गई। बीमार लोगों में सबसे कम एंटीबॉडी मिलीं।
एसएन मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि पहली डोज लगवाने वाले 18 से 65 साल के 136 लोगों के रक्त के नमूने लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायलॉजी विभाग में जांच कराई गई। इनमें से 50 लोग ऐसे रहे, जिन्होंने संक्रमण ठीक होने के बाद वैक्सीन लगवाई।
इनमें 250 यूनिट/मिलीलीटर एंटीबॉडी पाई गई। जबकि जिनको संक्रमण नहीं हुआ था ऐसे 86 लोगों में 30 यूनिट/मिलीलीटर एंटीबॉडी मिलीं। इन लोगों में 12 महीने तक चरणबद्ध एंटीबॉडी की जांच कराई जाएगी। इससे पता चल सकेगा कि कितने समय तक इनके शरीर में एंटीबॉडी बनी हुई हैं।
बुखार, शरीर में दर्द यानि ज्यादा
ब्लड बैंक की स्टडी में पाया कि जिन लोगों को वैक्सीन लगने के बाद दो से तीन दिन तक हल्का बुखार, शरीर में दर्द की परेशानी रही, उनमें एंटीबॉडी सबसे ज्यादा पाई गईं।
बीमार लोगों में सबसे कम मिलीं
दमा, सांस समेत अन्य बीमारी से जूझ रहे लोगों में एंटीबॉडी सबसे कम बनीं। पूछताछ में पाया कि जिन लोगों में दवा के तौर पर एस्टरॉयड चल रहा है, उनमें एक से 10 यूनिट/मिलीलीटर तक ही एंटीबॉडी बनी।
रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित करती है एंटीबॉडी
एसएन मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि एंटीबॉडी प्रोटीन से बनी होती हैं। यह शरीर में प्राकृतिक रूप से और वैक्सीन के जरिए तैयार होती हैं और शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित करती हैं। एंटीबॉडी वायरस-बैक्टीरिया को नष्ट या फिर उसके प्रभाव को कम कर देती हैं।