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उटंगन नदी हादसा: सेना और एनडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन पूरा...डूबे सभी 12 लोगों की माैत, आखिरी दिन निकाले चार शव
Tue, 07 Oct 2025 06:58 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Tue, 07 Oct 2025 06:58 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश के आगरा में दो अक्तूबर को विसर्जन के दौरान डूबे सभी युवकों के शव नदी से बरामद कर लिए गए। इसके साथ छह दिन से चल रहा सेना और एनडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन समाप्त हो गया।
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सेना का सर्च ऑपरेशन पूरा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा में खेरागढ़ स्थित उटंगन नदी में 2 अक्टूबर से चल रहा सेना और एनडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन मंगलवार को पूरा हो गया। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान डूबे गांव कुसियापुर के 12 में से आखिरी 4 और के शव मिल गए हैं। इससे मृतकों के परिवार में कोहराम मच गया। देर रात सभी के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी।
2 अक्टूबर को दशहरा पर गांव कुसियापुर के लोग देवी प्रतिमा विसर्जित करने के लिए उटंगन नदी पर आए थे। जिस जगह पर कुंड बनाया गया था, वहां पर विसर्जन ना करके 300 मीटर दूर मरघट के किनारे विसर्जन करने चले गए थे। गहरे पानी में जाने की वजह से 12 डूब गए थे। एक विष्णु को बचा लिया गया था। घटना के बाद से ही एसडीआरएफ, एनडीआरफ और सेना के स्कूबा डाइवर की स्पेशल टीम सभी की बरामदगी के प्रयास में लगी हुई थीं।
12 लोग खनन के गड्ढे में फंसे हुए थे। इनका एक-एक करके टीमों ने अलग-अलग दिन निकाला गया। सोमवार तक 8 मिल गए थे। बाकी की तलाश के लिए मंगलवार सुबह से एक बार फिर सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ। तीन कंप्रेसर की मदद से नदी में बने गड्ढे के अंदर से मिट्टी को हवा के द्वारा हटाने का काम किया जा रहा है।
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2 अक्टूबर को दशहरा पर गांव कुसियापुर के लोग देवी प्रतिमा विसर्जित करने के लिए उटंगन नदी पर आए थे। जिस जगह पर कुंड बनाया गया था, वहां पर विसर्जन ना करके 300 मीटर दूर मरघट के किनारे विसर्जन करने चले गए थे। गहरे पानी में जाने की वजह से 12 डूब गए थे। एक विष्णु को बचा लिया गया था। घटना के बाद से ही एसडीआरएफ, एनडीआरफ और सेना के स्कूबा डाइवर की स्पेशल टीम सभी की बरामदगी के प्रयास में लगी हुई थीं।
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12 लोग खनन के गड्ढे में फंसे हुए थे। इनका एक-एक करके टीमों ने अलग-अलग दिन निकाला गया। सोमवार तक 8 मिल गए थे। बाकी की तलाश के लिए मंगलवार सुबह से एक बार फिर सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ। तीन कंप्रेसर की मदद से नदी में बने गड्ढे के अंदर से मिट्टी को हवा के द्वारा हटाने का काम किया जा रहा है।
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सुबह 10:35 पर डूबे हुए सचिन का शव बरामद कर लिया गया। दोपहर में 12:10 पर दीपक भी मिल गया। 3 घंटे बाद गजेंद्र को ढूंढ लिया गया। सबसे आखिर में हरेश मिला। वह गहरे गड्ढे में सबसे नीचे मिट्टी के नीचे दबा हुआ था। उसे तलाशने के लिए स्कूबा डाइवर को 3 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाना पड़ा।
चारों के शव मिलने पर नदी के किनारे पर मौजूद परिवार वालों में कोहराम मच गया। सभी फूट-फूट कर रोने लगे। उन्हें परिवार वालों ने किसी तरह संभाला। घटनास्थल पर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगाली सहित अन्य पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि विसर्जन के दौरान डूबे सभी युवकों के शव नदी से बरामद कर लिए गए। इस पूरी कवायद के लिए सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने एक साथ मिलकर सर्च ऑपरेशन चलाया था।
यह डूबे थे
ओमपाल (25), गगन (24), हरेश (20), अभिषेक (17), भगवती (22), ओके उर्फ ओकेश (16), सचिन (26), गजेंद्र (17), मनोज (14), वीनेश (18), करन (21) और दीपक (15) डूब गए थे।
ये भी पढ़ें-UP: '75 साल की उम्र में बलात्कार में जेल भेजा...', समर्थकों के सामने रोए पूर्व सपा विधायक, वीडियो वायरल
चारों के शव मिलने पर नदी के किनारे पर मौजूद परिवार वालों में कोहराम मच गया। सभी फूट-फूट कर रोने लगे। उन्हें परिवार वालों ने किसी तरह संभाला। घटनास्थल पर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगाली सहित अन्य पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि विसर्जन के दौरान डूबे सभी युवकों के शव नदी से बरामद कर लिए गए। इस पूरी कवायद के लिए सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने एक साथ मिलकर सर्च ऑपरेशन चलाया था।
यह डूबे थे
ओमपाल (25), गगन (24), हरेश (20), अभिषेक (17), भगवती (22), ओके उर्फ ओकेश (16), सचिन (26), गजेंद्र (17), मनोज (14), वीनेश (18), करन (21) और दीपक (15) डूब गए थे।
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