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Agra News: आखिरी कुल शरीफ के साथ उर्स का समापन
Fri, 02 Feb 2024 05:34 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Fri, 02 Feb 2024 05:34 PM IST
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आखिरी कुल शरीफ के साथ उर्स का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। खानकाहे रशीदिया में 132 वां उर्स ख्वाजा गरीब नवाज रहमतुल्ला अलेह का आखिरी कुल शरीफ के साथ समापन हुआ।
आगरा रोड स्थित खानकाहे रशीदिया में उर्स ख्वाजा गरीब नवाज रहमतुल्लाह अलेह का पांच रोजा विभिन्न प्रोग्राम के साथ संपन्न हुआ। उर्स में पहुंचे जायरीन ने चादरपोशी की। मजार शरीफ पर मत्था टेककर मन्नत मांगी। सज्जादा नशीन हाजी अब्दुल रहमान खां चिश्ती उर्फ बब्लू मियां ने बताया कि कुल शरीफ का आखरी प्रोग्राम इशा की नमाज के बाद से शुरू होकर महफिले शमा के आयोजन के साथ फजर की नमाज से पहले तक चला।
आरिफ अहमद अहमदी उर्फ सिब्बू मियां सज्जादा नशीन खानकाहे मखदूमिया रदोली शरीफ ने तकरीर की। उर्स के आखिरी दिन कव्वालों ने अपनी कव्वालियों का प्रोग्राम पेश किया। सज्जादा नशीन अब्दुल रहमान खां चिश्ती ने कहा कि उर्स ने हमेशा बिना किसी भेदभाव के एकता व भाईचारे का पैगाम दिया है। आधी रोटी खाओ लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाओ। क्योंकि इल्म हमारी जिंदगी और कामयाबी हैं इसके बिना तरक्की की कोई सूरत नहीं है। उर्स के समापन पर सज्जादा नशीन बबलू मियां की दस्तार बंदी हुई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। खानकाहे रशीदिया में 132 वां उर्स ख्वाजा गरीब नवाज रहमतुल्ला अलेह का आखिरी कुल शरीफ के साथ समापन हुआ।
आगरा रोड स्थित खानकाहे रशीदिया में उर्स ख्वाजा गरीब नवाज रहमतुल्लाह अलेह का पांच रोजा विभिन्न प्रोग्राम के साथ संपन्न हुआ। उर्स में पहुंचे जायरीन ने चादरपोशी की। मजार शरीफ पर मत्था टेककर मन्नत मांगी। सज्जादा नशीन हाजी अब्दुल रहमान खां चिश्ती उर्फ बब्लू मियां ने बताया कि कुल शरीफ का आखरी प्रोग्राम इशा की नमाज के बाद से शुरू होकर महफिले शमा के आयोजन के साथ फजर की नमाज से पहले तक चला।
आरिफ अहमद अहमदी उर्फ सिब्बू मियां सज्जादा नशीन खानकाहे मखदूमिया रदोली शरीफ ने तकरीर की। उर्स के आखिरी दिन कव्वालों ने अपनी कव्वालियों का प्रोग्राम पेश किया। सज्जादा नशीन अब्दुल रहमान खां चिश्ती ने कहा कि उर्स ने हमेशा बिना किसी भेदभाव के एकता व भाईचारे का पैगाम दिया है। आधी रोटी खाओ लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाओ। क्योंकि इल्म हमारी जिंदगी और कामयाबी हैं इसके बिना तरक्की की कोई सूरत नहीं है। उर्स के समापन पर सज्जादा नशीन बबलू मियां की दस्तार बंदी हुई।
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