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UP: एप्पल बेर, मौसमी और ड्रैगन फ्रूट... किसान खेत में उगा रहे 'सोना'; देवी दयाल ने बदली पूरे गांव की सूरत
Mon, 30 Jun 2025 01:29 PM IST
शाहरुख खान
अबरार अहमद, अमर उजाला नेटवर्क, फिरोजाबाद
अबरार अहमद, अमर उजाला नेटवर्क, फिरोजाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 30 Jun 2025 01:29 PM IST
सार
Dragon Fruit Farming UP: यूपी में एप्पल बेर, मौसमी और ड्रैगन फ्रूट की खेती हो रही है। किसान खेत में सोना उगा रहे हैं। शिकोहाबाद के गांव नगला केवल के उन्नतशील किसान देवी दयाल ने पूरे गांव की सूरत बदल दी। बागवानी से लाखों की कमाई हो रही है।
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फलों को दिखाते देवी दयाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
UP Agriculture News: यह समय धान की बुवाई का है, मगर शिकोहाबाद के गांव नगला केवल के किसान खेत के किनारे पेड़ के नीचे चारपाई डालकर आराम कर रहे हैं। पूछने पर एक किसान ने कहा, हमारा पूरा गांव एप्पल बेर बोता है। नागपुर वाली मौसमी और कर्नाटक वाला ड्रैगन फ्रूट भी हम अपने खेतों में उगा रहे हैं।
इससे लाखों की कमाई हो रही है। धान, गेहूं और दूसरी परंपरागत फसलें अब हम केवल अपने खाने के लिए उगाते हैं। गांव के 90 फीसदी से अधिक किसानों ने एप्पल बेर बो रखा है और इसका श्रेय जाता है गांव के युवा व उन्नतशील किसान देवी दयाल को।
एमएससी बायोटेक की पढ़ाई के बाद नौकरी कर रहे देवी दयाल और पत्नी निर्मला देवी कुछ साल पहले सबकुछ छोड़कर गांव लौट आए और पारंपरिक खेती की जगह बागवानी करने का फैसला लिया।
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देवी दयाल कहते हैं, लुधियाना में नौकरी के दौरान मैंने पंजाब के उन्नतशील किसानों को देखा। उनके खेती करने के तरीके और कमाई का आकलन किया। फिर अपने गांव के किसानों से उसकी तुलना की, तो लगा गांव के किसानों के लिए कुछ करना चाहिए।
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इससे लाखों की कमाई हो रही है। धान, गेहूं और दूसरी परंपरागत फसलें अब हम केवल अपने खाने के लिए उगाते हैं। गांव के 90 फीसदी से अधिक किसानों ने एप्पल बेर बो रखा है और इसका श्रेय जाता है गांव के युवा व उन्नतशील किसान देवी दयाल को।
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एमएससी बायोटेक की पढ़ाई के बाद नौकरी कर रहे देवी दयाल और पत्नी निर्मला देवी कुछ साल पहले सबकुछ छोड़कर गांव लौट आए और पारंपरिक खेती की जगह बागवानी करने का फैसला लिया।
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देवी दयाल कहते हैं, लुधियाना में नौकरी के दौरान मैंने पंजाब के उन्नतशील किसानों को देखा। उनके खेती करने के तरीके और कमाई का आकलन किया। फिर अपने गांव के किसानों से उसकी तुलना की, तो लगा गांव के किसानों के लिए कुछ करना चाहिए।
तीन बीघा खेत में ड्रैगन फ्रूट की खेती
इसके बाद नौकरी छोड़कर सबसे पहले तीन बीघा खेत में ड्रैगन फ्रूट की खेती की। 18 माह बाद जब फल आया तो गांव के लोग देखकर हैरान रह गए। फिर मैंने गांव में एप्पल बेर की खेती शुरू की। पहले ग्रीन एप्पल बेर लगाए। बाद में दूसरी वैरायटी बाल सिंदूरी और मिस इंडिया भी लगाया।
इसके बाद नौकरी छोड़कर सबसे पहले तीन बीघा खेत में ड्रैगन फ्रूट की खेती की। 18 माह बाद जब फल आया तो गांव के लोग देखकर हैरान रह गए। फिर मैंने गांव में एप्पल बेर की खेती शुरू की। पहले ग्रीन एप्पल बेर लगाए। बाद में दूसरी वैरायटी बाल सिंदूरी और मिस इंडिया भी लगाया।
किसान खेत में उगा रहे 'सोना'
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
साढ़े 12 बीघा में एप्पल बेर, पांच बीघा में मौसमी की खेती
आज वह साढ़े 12 बीघा में एप्पल बेर, पांच बीघा में मौसमी, पांच बीघा में नींबू और डेढ़ बीघा खेत में ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके गांव में सबसे ज्यादा 300 बीघा जमीन पर एप्पल बेर की खेती हो रही है। यही वजह है कि यह गांव एप्पल बेर वाले गांव के नाम से भी जाना जाने लगा है।
आज वह साढ़े 12 बीघा में एप्पल बेर, पांच बीघा में मौसमी, पांच बीघा में नींबू और डेढ़ बीघा खेत में ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके गांव में सबसे ज्यादा 300 बीघा जमीन पर एप्पल बेर की खेती हो रही है। यही वजह है कि यह गांव एप्पल बेर वाले गांव के नाम से भी जाना जाने लगा है।
बदल गई पूरे गांव की किस्मत
गांव के अन्य किसान मनीष राजपूत ने पांच बीघा, खुशी राम ने तीन बीघा, जनक सिंह ने आठ बीघा, छविले श्याम ने चार बीघा जमीन पर एप्पल बेर की खेती कर रखी है। इन किसानों ने बताया कि जब से गांव के किसानों ने एप्पल बेर की खेती शुरू की तब से गांव की किस्मत ही बदल गई।
गांव के अन्य किसान मनीष राजपूत ने पांच बीघा, खुशी राम ने तीन बीघा, जनक सिंह ने आठ बीघा, छविले श्याम ने चार बीघा जमीन पर एप्पल बेर की खेती कर रखी है। इन किसानों ने बताया कि जब से गांव के किसानों ने एप्पल बेर की खेती शुरू की तब से गांव की किस्मत ही बदल गई।
पहले पारंपरिक खेती में कोई लाभ नहीं हो रहा था लेकिन अब लाखों में कमाई है। बताया कि जब एप्पल बेर तैयार हो जाता है तो गांव के आसपास के इलाकों में लोगों को मैक्स गाड़ियां नहीं मिलतीं क्योंकि एप्पल बेर की ढुलाई के लिए सभी गाड़ियां हमारे गांव में लगी होती हैं।
किसान खेत में उगा रहे 'सोना'
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किसानों ने बताया कि एक बीघा खेत से करीब 400 क्विंटल एप्पल बेर आराम से निकल आता है, जो 80 से एक लाख रुपये तक में आराम से बिक जाता है। सारा खर्च निकालकर किसान 40 हजार रुपये तक बचा लेता है। बड़े पैमाने पर एप्पल बेर की खेती से पूरे गांव की किस्मत बदल गई है।
झांसी, राजस्थान और मध्य प्रदेश तक के किसानों को दी ट्रेनिंग
किसान देवी दयाल ने सिर्फ अपने गांव के किसानों को ही नहीं, बल्कि दूसरे शहरों और अन्य प्रदेशों के किसानों को भी एप्पल बेर की खेती करना सीखा रहे हैं। वह कहते हैं कि बागवानी व कृषि विभाग की ओर से आयोजित होने वाले किसान शिविर में उन्हें बुलाया जाता है और वह दूसरे किसानों को एप्पल बेर की खेती करना सीखाते हैं।
किसान देवी दयाल ने सिर्फ अपने गांव के किसानों को ही नहीं, बल्कि दूसरे शहरों और अन्य प्रदेशों के किसानों को भी एप्पल बेर की खेती करना सीखा रहे हैं। वह कहते हैं कि बागवानी व कृषि विभाग की ओर से आयोजित होने वाले किसान शिविर में उन्हें बुलाया जाता है और वह दूसरे किसानों को एप्पल बेर की खेती करना सीखाते हैं।
यही नहीं झांसी, राजस्थान व मध्य प्रदेश में भी जाकर उन्होंने किसानों को प्रशिक्षण दिया है और अब वहां के किसान भी एप्पल बेर उगा रहे हैं। वह कहते हैं कि अगर कोई किसान उनके पास आता है तो वह पौधा देने से लेकर उसकी मार्केटिंग तक में मदद करते हैं।
गेंदा के फूल की खेती
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गेंदा का फूल उगा रहे नगला राधे के किसान लोकेश
शिकोहाबाद के ही गांव नगल राधे के किसान लोकेश भी एक उन्नतशील किसान हैं। वह गेंदा के फूल और लौकी की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि गेंदा के फूल की खेती कम लागत की खेती है, जिससे बढि़या मुनाफा मिलता है। बताया कि शिवरात्रि समेत अन्य त्योहारों पर गेंदे का फूूल 300 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है।
शिकोहाबाद के ही गांव नगल राधे के किसान लोकेश भी एक उन्नतशील किसान हैं। वह गेंदा के फूल और लौकी की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि गेंदा के फूल की खेती कम लागत की खेती है, जिससे बढि़या मुनाफा मिलता है। बताया कि शिवरात्रि समेत अन्य त्योहारों पर गेंदे का फूूल 300 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है।
वैसे आम दिनों में 120 से 150 रुपये किलो तक का भाव आराम से मिल जाता है। उन्होंने बताया कि पहले वह भी पारंपरिक खेती करते थे लेकिन उसमें कोई लाभ नहीं था इसलिए उसे छोड़कर बागवानी की तरफ रुख किया और अब बढ़िया कमाई हो रही है। वह पांच बीघा खेत में गेंदा के फूला की खेती करते हैं।
वह कहते हैं कि किसान कुछ भी उगा सकता है लेकिन सबसे बड़ी बात है, मार्केट और खरीदार। अगर आपके पास बाजार और खरीदार नहीं है तो आपकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलेगा, इसलिए खेती से बढि़या कमाई तभी हो सकती है जब खरीदार मिल जाए।
कौन सा फल कब तैयार होता है
एप्पल बेर दिसंबर से फरवरी तक
ड्रैगन फ्रूट जुलाई से नवंबर तक
नींबू अप्रैल और अक्तूबर से नवंबर
मौसमी अगस्त और सितंबर
एप्पल बेर दिसंबर से फरवरी तक
ड्रैगन फ्रूट जुलाई से नवंबर तक
नींबू अप्रैल और अक्तूबर से नवंबर
मौसमी अगस्त और सितंबर
जिले के बहुत से किसान परंपरागत खेती के बजाय बागवानी में रुचि दिखा रहे हैं। किसानों की आय बढ़ाने में बागवानी योजनाएं काफी सहायक साबित हो रही हैं। एप्पल बेर, मौसमी, नींबू के साथ-साथ ड्रैगन फ्रूट व मचान विधि से लौकी एवं तोरई की खेती से किसानों को लाभ हो रहा है। नए किसान तेजी से बागवानी से जुड़ रहे हैं। जिला औद्यानिक मिशन योजना में शामिल होने पर किसानों को अधिक सब्सिडी का लाभ मिलेगा। विभाग की कोशिश यही है कि अधिक से अधिक किसानों को बागवानी से जोड़कर योजनाओं का लाभ पहुंचाए जाए।
-अनीता सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, फिरोजाबाद
-अनीता सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, फिरोजाबाद