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UP: घरेलू विवादों का लगातार बढ़ता बोझ, यूपी की फैमिली कोर्ट्स में टूटा रिकॉर्ड; चार लाख से ज्यादा मामले लंबित

Mon, 22 Jun 2026 08:00 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 22 Jun 2026 08:00 AM IST
सार

आरटीआई के खुलासे में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश की फैमिली कोर्ट्स में लंबित मामलों की संख्या 2025 में बढ़कर 4,07,130 पहुंच गई है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है। मामलों के लंबे समय तक लटके रहने से दंपतियों के साथ-साथ बच्चों का भविष्य और मानसिक विकास भी प्रभावित हो रहा है।
 

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UP Family Courts Hit Record Backlog as Pending Cases Cross 4 Lakh Mark
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश की फैमिली कोर्ट्स (पारिवारिक न्यायालयों) में घरेलू विवादों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। एक सूचना का अधिकार के तहत हुए सनसनीखेज खुलासे में सामने आया है कि प्रदेश की फैमिली कोर्ट्स में लंबित मामलों की संख्या चार लाख के पार पहुंच चुकी है। बीते पांच वर्षों में यह पेंडेंसी घटती-बढ़ती रही, लेकिन अब यह अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
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आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में कुल 4,07,130 मामले कोर्ट्स में अटके हुए हैं। आरटीआई से मिले डाटा के अनुसार, आगरा सहित प्रदेश के कई बड़े जिलों में पारिवारिक विवादों के निस्तारण की रफ्तार बेहद धीमी है। अदालतों में तारीख पर तारीख मिलने के कारण मामलों का समय पर फैसला नहीं हो पा रहा है, जिससे पेंडेंसी का ग्राफ लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है।
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दंपतियों और मासूमों पर पड़ रहा असर
पारिवारिक मामलों के लंबे समय तक लटके रहने का सबसे गंभीर और दर्दनाक असर दंपतियों के साथ-साथ उनके मासूम बच्चों पर पड़ रहा है। विवादों का हल न निकलने से जहां जोड़ों का भविष्य अधर में है, वहीं माता-पिता के बीच चल रही इस कानूनी लड़ाई के कारण बच्चों का मानसिक विकास और बचपन प्रभावित हो रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर जल्द ही इन मामलों के निपटारे के लिए विशेष कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती है।

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