UP Election 2022: भाजपा की हैट्रिक रोकने में लगीं सपा-बसपा, वोट बंटे तो होगा बेड़ा पार या बंटाधार
आगरा दक्षिण से सटी आगरा उत्तर और आगरा छावनी विधानसभा सीटें हैं। वर्ष 2012 में परिसीमन के बाद तीनों विधानसभाओं के क्षेत्रों में बदलाव हो गया। आगरा दक्षिण सीट पर बनते हार-जीत के समीकरणों का असर पड़ोस की दोनों सीटों पर पड़ता है।
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भाजपा ने आगरा की नौ विधानसभा सीटों में से पांच वर्तमान विधायकों के टिकट तो काट दिए, लेकिन दलित और मुस्लिम बहुल दक्षिण विधानसभा सीट पर लगातार दो बार से विधायक योगेंद्र उपाध्याय को हैट्रिक लगाने का मौका दिया है। पार्टी ने ब्राह्मण चेहरे पर दांव इसलिए भी लगाया क्योंकि वह मुस्लिम-दलित बहुल सीट पर भी कमल खिलाने में कामयाब रहे।
योगेंद्र को हैट्रिक लगाने से रोकने के लिए बसपा ने ब्राह्मण मतों में बंटवारे के लिए रवि भारद्वाज को तो कांग्रेस ने अनुज शर्मा को मैदान में उतार दिया है। वहीं, भाजपा के परंपरागत मतदाता वैश्य समाज के विनय अग्रवाल को सपा ने मैदान में उतारकर जंग को और दिलचस्प बना दिया।
दलित-मुस्लिम बहुल सीट है दक्षिण
आगरा दक्षिण विधानसभा सीट पहले आगरा पश्चिम के नाम से थी। परिसीमन के बाद इसका ज्यादातर हिस्सा आगरा छावनी में चला गया। छावनी की तरह ही इस सीट पर भी दलित और मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता है। भाजपा के लिए इस बार राहें आसान नहीं हैं। दलित-मुस्लिमों के साथ ब्राह्मण मतों में सेंधमारी करने की जुगत में जुटी बसपा ने उसके लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
मतदाताओं का रुख पड़ोसी सीटों को करेगा प्रभावित
आगरा दक्षिण से सटी आगरा उत्तर और आगरा छावनी विधानसभा सीटें हैं। वर्ष 2012 में परिसीमन के बाद तीनों विधानसभाओं के क्षेत्रों में बदलाव हो गया। आगरा दक्षिण सीट पर बनते हार-जीत के समीकरणों का असर पड़ोस की दोनों सीटों पर पड़ता है। आगरा दक्षिण से भाजपा और बसपा ने ब्राह्मण प्रत्याशियों पर दांव लगाया है, जबकि सपा ने पहले मुस्लिम प्रत्याशी रिजवान रईसुद्दीन को प्रत्याशी बनाया। पर, दो दिन बाद ही रईसुद्दीन को बदलकर विनय अग्रवाल को टिकट दे दिया।
इससे सटी उत्तर विधानसभा पर वैश्य मतदाता सबसे ज्यादा संख्या में हैं। इस सीट पर वैश्य मतदाताओं की संख्या 1.80 लाख है, जबकि दक्षिण सीट मुस्लिम बहुल है। सपा ने दक्षिण पर वैश्य और उत्तर पर मुस्लिम चेहरा शब्बीर अब्बास को उतारा है। आगरा छावनी से सपा ने कुंवर चंद वकील को उतारा है, जो दो माह पहले ही बसपा से शामिल हुए हैं। वह बसपा से लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।
ये सूरमा मैदान में
- योगेंद्र उपाध्याय, भाजपा
- अनुज शर्मा, कांग्रेस
- रवि भारद्वाज, बसपा
- विनय अग्रवाल, सपा
वोटों का समीकरण
इस सीट पर मुस्लिम और जाटव, कोरी-कोली, वाल्मीकि, ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य और अन्य जातियों के वोटर हैं। मुस्लिम, कोरी व वाल्मीकि निर्णायक भूमिका में रहे हैं।
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
| योगेंद्र उपाध्याय | भाजपा | 111882 |
| जुल्फिकार कुरैशी | बसपा | 57657 |
| नजीर अहमद | कांग्रेस | 39434 |
मैंने चुनाव में हर घर तक गंगाजल पहुंचाने और सीवर लाइन कवरेज का वादा किया था, जो पूरा कर दिया। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए एम्स का वादा पूरा किया जा रहा है। इस बार भी विकास मेरा मुद्दा रहेगा। सबका साथ, सबका विकास की नीति पर चुनाव लड़ेंगे। -योगेंद्र उपाध्याय, विधायक दक्षिण
गंगाजल योजना पिछली सरकार का वादा था। इसमें विधायक की कोई भूमिका नहीं है। विधायक के अपने प्रयास से कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने कोठी मीना बाजार समेत जिन प्रोजेक्ट को चलाने के दावे किए, उनमें एक ईंट भी नहीं रखी गई। -जुल्फिकार कुरैशी, पिछले चुनाव के प्रतिद्वंद्वी