यूपी चुनाव 2022: आगरा मंडल में बागी नेता बिगाड़ सकते हैं राजनीतिक दलों के समीकरण
भाजपा, बसपा, सपा में टिकट न मिलने पर कई दावेदारों ने अपना चोला बदल लिया है। ये बागी नेता चुनाव में प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
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आगरा मंडल में विधानसभा चुनव के पहले चरण के लिए दलों ने टिकटों की घोषणा की तो प्रत्याशी बनने की उम्मीद लगाए अन्य दावेदारों ने बगावत कर दी। इससे कोई दल अछूता नहीं रहा। भाजपा से लेकर बसपा, सपा और रालोद के नेता बागी हो गए और चुनाव मैदान में उतरकर ताल ठोक रहे हैं।
अब तक दलों के कई बागी नेताओं ने पाला बदल लिया है। नामांकन पूरे हो चुके हैं, प्रचार शुरू हो चुका है। राजनीतिक दल बागी तेवर अपनाए अपने नेताओं को मनाने में जुटे हैं। प्रत्याशियों के साथ ही नेताओं का भी मानना है कि बागी नेता उनके बनाए समीकरणों को बिगाड़ सकते हैं।
आगरा में मेयर का चुनाव लड़ चुके दिगंबर सिंह धाकरे खेरागढ़ से टिकट के दावेदार थे, लेकिन भाजपा ने बसपा के दो बार के विधायक रहे भगवान सिंह कुशवाह को प्रत्याशी घोषित किया तो उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। अब वह खेरागढ़ से ताल ठोक रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को निर्दलीय नामांकन किया।
मांट सीट पर नामांकन के अंतिम दिन बदला प्रत्याशी
मथुरा में भाजपा नेता एसके शर्मा मांट विधानसभा से टिकट मांग रहे थे, लेकिन भाजपा की सूची में नाम न दिखा तो वह बागी हो गए और टिकट के लिए बसपा में शामिल होकर अब चुनाव मैदान में उतरे हैं। मांट सीट पर ही राष्ट्रीय लोकदल और सपा के बीच विवाद हो गया।
गठबंधन में रालोद ने योगेश नौहवार को टिकट दिया, लेकिन समाजवादी पार्टी ने अखिलेश यादव के करीबी संजय लाठर को मांट से मैदान में उतार दिया। हालांकि नामांकन के अंतिम दिन लाठर की पत्नी बबीता ने रालोद प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया।
फिरोजाबाद में भाजपा से 2017 में शिकोहाबाद सीट से जीतकर विधायक बने डॉ. मुकेश वर्मा भाजपा की सूची आने से पहले सपा में शामिल हो गए। अभी उनके नाम की घोषणा नहीं हुई, पर उनके प्रत्याशी बनने की चर्चा है। सपा के ओमप्रकाश वर्मा अब भाजपा में आ गए हैं। भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया है। इसी तरह सिरसागंज के विधायक हरिओम यादव को भाजपा ने टिकट दिया है।
उमेश को मनाने पहुंचे पुरुषोत्तम खंडेलवाल
अग्रवाल समाज के प्रत्याशी के रूप में आगरा उत्तर से नामांकन करने के लिए तैयार उमेश कंसल को मनाने के लिए भाजपा प्रत्याशी पुरुषोत्तम खंडेलवाल उनके घर पहुंचे। अग्रवाल समाज के व्यक्ति को टिकट न मिलने पर विरोध कर रहे उमेश कंसल से उन्होंने समर्थन मांगा। इसके बार उमेश कंसल ने चुनाव न लड़ने और भाजपा का समर्थन करने का फैसला किया।