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UP: मुलायम के बाद फिर एक नजर आया सियासत का सबसे बड़ा कुनबा, सैफई परिवार में धीरे-धीरे पट चुकी है दरार

Tue, 22 Oct 2024 11:29 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, मैनपुरी
अमर उजाला नेटवर्क, मैनपुरी Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 22 Oct 2024 11:29 AM IST
सार

मैनपुरी की विधानसभा क्षेत्र करहल के उप चुनाव के लिए सपा प्रत्याशी तेजप्रताप यादव ने सोमवार को नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान सियासत का सबसे बड़ा कुनबा एक साथ नजर आया। मुलायम के बाद यह पहला मौका है जब सभी साथ नजर आए।

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UP By Election 2024 largest political family resurfaces After Mulayam Singh News in Hindi
Mulayam family - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सैफई परिवार में आई दरार अब धीरे-धीरे पट चुकी है। मुलायम सिंह यादव के बाद फिर एक बार सियासत का सबसे बड़ा कुनबा सोमवार को मैनपुरी में एक नजर आया। मौका था करहल सीट से तेजप्रताप यादव के नामांकन का। अखिलेश यादव और डिंपल के साथ ही शिवपाल और प्रो. रामगोपाल भी नजर आए।
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नेताजी के सामने सैफई परिवार में आई दरार उनके जीते-जी तो नहीं पट सकी, लेकिन उनके निधन के बाद शायद सियासत के सबसे बड़े कुनबे ने आपसी मतभेदों को भुलाने का संकल्प लिया है। तभी तो सोमवार को पूर्व सांसद तेजप्रताप यादव के करहल सीट से नामांकन में पूरा सैफई कुनबा एक नजर आया। 
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खुद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल यादव, बेटी अदिति और सांसद धर्मेंद्र यादव के साथ पहुंचे। वहीं, चाचा शिवपाल सिंह यादव भी अपने बेटे सांसद आदित्य यादव के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके अलावा सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और मुलायम सिंह के छोटे भाई अभयराम यादव भी पहुंचे।
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अभयराम यादव को छोड़कर सभी एक साथ नामांकन कराने पहुंचे। परिवार के अन्य सदस्य तो डिंपल यादव के नामांकन में एक साथ नजर आए थे, लेकिन शिवपाल ने दूरी बनाई थी। सभी ने एक आवाज में तेजप्रताप यादव और सपा की जीत का दावा किया।

प्रोफेसर रामगोपाल ने तो यहां तक कह दिया कि करहल में चुनाव एकतरफा होगा। सैफाई परिवार की एकजुटता का लाभ उन्हें करहल चुनाव में भी मिल सकता है। दरअसल, पहले से ही करहल विधानसभा क्षेत्र के जातीय समीकरण सपा के हक में रहे हैं। इस बीच, अब सैफई परिवार के एकजुट होने के चलते गुटबंदी पर भी लगाम लग जाएगी। 
 

पहले बाबा ने छोड़ी थी सीट, अब चाचा की विरासत की जिम्मेदारी
पूर्व सांसद तेजप्रताप यादव 2014 के उप चुनाव में मैनपुरी से पहली बार सांसद चुने गए थे। तब मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी सीट से जीतने के बाद इस्तीफा दे दिया था। दरअसल, उन्होंने आजमगढ़ से सांसद रहने का निर्णय लिया था। उप चुनाव में उन्होंने अपने पौत्र तेजप्रताप यादव को चुनाव लड़ाकर जीत दिलाई थी।

वहीं, अब करहल सीट अखिलेश यादव के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। ऐसे में अब तेजप्रताप पर अपने चाचा अखिलेश यादव की सीट की जिम्मेदारी है। यहां से बात भी दिलचस्प है कि 1996 में मुलायम ने मैनपुरी सीट से पहला लोकसभा चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी, वहीं अखिलेश ने करहल सीट से 2022 में पहला विधानसभा चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।
 

अखिलेश ने पूरे परिवार के साथ एक्स पर पोस्ट की तस्वीर
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी परिवार की एकजुटता का संदेश नामांकन के दौरान दिया। नामांकन स्थल पर पूरे परिवार के साथ खींची गई तस्वीर एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने करहल में सपा की जीत का दावा किया। साथ ही कलेक्ट्रेट पर ही नामांकन के बाद पत्रकारों के संबोधन के दौरान पहले चाचा शिवपाल सिंह यादव को बोलने का मौका दिया।
 
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