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दवाओं की खरीद-बिक्री में गड़बड़ी: औषधि विभाग की जांच में खुलासा, बंद मेडिकल एजेंसी के नाम पर भी अवैध कारोबार
Sun, 13 Sep 2026 02:38 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sun, 13 Sep 2026 02:38 AM IST
सार
आगरा में औषधि विभाग की जांच में बड़े खुलासे हो रहे हैं। विभाग की ओर से थोक दवा विक्रेताओं की जांच की जा रही है। इसमें दवा की खरीद और बिक्री में गड़बड़ी मिली है। साथ ही बंद एजेंसी के नाम पर भी कारोबार करने की जानकारी सामने आई है।
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आगरा दवा बाजार में छापा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
औषधि विभाग थोक दवा विक्रेताओं की एजेंसी-फर्म का सर्वे कर रहा है। इसमें अब तक 250 से अधिक की जांच हो गई है। बिल की गड़बड़ी मिल रही है। स्टॉक में अंतर भी पाया गया है। प्रतिष्ठान पर फर्म का नाम और जीएसटी नंबर समेत अन्य जानकारी भी दर्ज नहीं कराई हैं। ऐसे में इनकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जा रही है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की अगुवाई में बीते दिनों नकली, सरकारी, सैंपल और एक्सपायरी दवाओं की री-लेवलिंग की तस्करी का खेल पकड़ा गया था। इसमें बंद मेडिकल एजेंसी के नाम पर भी अवैध कारोबार किया गया। ऐसे में थोक दवा विक्रेताओं का सर्वे कर जांच की जा रही है। जिले में करीब तीन हजार थोक दवा के लाइसेंस हैं।
सर्वे में 30 से अधिक एजेंसी बंद मिली हैं। अन्य के दवाओं की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई। स्टॉक रजिस्टर और बिक्री के लेखाजोखा में अंतर मिला। मेडिकल एजेंसी के गोदाम, इसके लाइसेंस की सही जानकारी नहीं मिली। एजेंसी पर नाम, पता समेत अन्य की विवरण नहीं था। इन सभी को सुधार के लिए नोटिस देने के साथ ही रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जा रही है।
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बीते कई दिन से कन्नौज के औषधि निरीक्षक डॉ. परमेश द्विवेदी की अगुवाई में कई फर्म की जांच की जा रही है। सहायक आयुक्त औषधि अरविंद गुप्ता का कहना है कि थोक दवा विक्रेताओं की जांच का सर्वे चल रहे हैं, इसमें स्थानीय समेत दूसरे जिलों के औषधि निरीक्षकों की टीम भी सर्वे कर रही है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
इन बिंदुओं पर हो रहा है सर्वे
- एजेंसी-फर्म और संचालक का नाम, लाइसेंस-जीएसटी नंबर।
- दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल, स्टॉक रजिस्टर का मिलान।
- फर्म लंबे समय से बंद तो नहीं है, गोदाम और उसका लाइसेंस।
- जीएसटी में सालाना कारोबार कितना दर्शाया, फर्म का लाइसेंस।
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की अगुवाई में बीते दिनों नकली, सरकारी, सैंपल और एक्सपायरी दवाओं की री-लेवलिंग की तस्करी का खेल पकड़ा गया था। इसमें बंद मेडिकल एजेंसी के नाम पर भी अवैध कारोबार किया गया। ऐसे में थोक दवा विक्रेताओं का सर्वे कर जांच की जा रही है। जिले में करीब तीन हजार थोक दवा के लाइसेंस हैं।
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सर्वे में 30 से अधिक एजेंसी बंद मिली हैं। अन्य के दवाओं की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई। स्टॉक रजिस्टर और बिक्री के लेखाजोखा में अंतर मिला। मेडिकल एजेंसी के गोदाम, इसके लाइसेंस की सही जानकारी नहीं मिली। एजेंसी पर नाम, पता समेत अन्य की विवरण नहीं था। इन सभी को सुधार के लिए नोटिस देने के साथ ही रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जा रही है।
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बीते कई दिन से कन्नौज के औषधि निरीक्षक डॉ. परमेश द्विवेदी की अगुवाई में कई फर्म की जांच की जा रही है। सहायक आयुक्त औषधि अरविंद गुप्ता का कहना है कि थोक दवा विक्रेताओं की जांच का सर्वे चल रहे हैं, इसमें स्थानीय समेत दूसरे जिलों के औषधि निरीक्षकों की टीम भी सर्वे कर रही है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
इन बिंदुओं पर हो रहा है सर्वे
- एजेंसी-फर्म और संचालक का नाम, लाइसेंस-जीएसटी नंबर।
- दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल, स्टॉक रजिस्टर का मिलान।
- फर्म लंबे समय से बंद तो नहीं है, गोदाम और उसका लाइसेंस।
- जीएसटी में सालाना कारोबार कितना दर्शाया, फर्म का लाइसेंस।