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यूपी-बिहार की शिक्षा प्रणाली विचारणीय : जोशी
अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 09 Jul 2016 12:11 AM IST
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मुरली मनाोहर जाोश्ाी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री व सांसद डा. मुरली मनोहर जोशी ने यूपी और बिहार की शिक्षा प्रणाली को विचारणीय बताया है। छलेसर में डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के नवीन भवन के शिलान्यास अवसर पर गोष्ठी में वह मुख्य वक्ता थे। कहा कि बिहार में टॉपर अपने विषय नहीं बता पाती और यूपी में परीक्षक अपने ही विषय की स्पेलिंग।
शिलान्यास के बाद आयोजन स्थल पर ही ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय और 21वीं शताब्दी’ विषय पर गोष्ठी की गई। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में समग्रता के समावेश पर प्रकाश डाला। इस दौरान डा. मुरली मनोहर जोशी ने अपने छात्र जीवन में दीनदयाल से जुड़ी कुछ स्मृतियां साझा कीं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति दीनदयाल की दूरगामी सोच पर भी ध्यान आकृष्ट कराया। कहा कि खनिजों के बेतहाशा खनन से पर्यावरण को होने वाले खतरे से पहले ही आगाह किया था।
खनिज खत्म होने पर पूरी दुनिया अब इसे रीस्टोर करने पर विचार कर रही है। इस दौरान राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि वह डा. मुरली मनोहर जोशी की तरह से प. दीनदयाल उपाध्याय के साथ तो नहीं रहे, लेकिन उनके विचारों से हमेशा प्रभावित रहे। उन्होंने अपने कुछ संस्मरण भी साझा किए। गोष्ठी का संचालन प्रो. सुगम आनंद ने किया। धन्यवाद प्रो. राजेंद्र शर्मा ने दिया।
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ग्रेट से लिटिल हुआ लंदन
डा. जोशी ने कहा कि पंडित दीनदयाल के विचारों के आधार पर उन्होंने वर्ष 1999 में ही ग्रेट ब्रिटेन के विभाजन की बात कह दी थी। मगर, तब किसी ने नहीं सुना। उन्होंने कहा कि समग्रता से न चलने का ही नतीजा है कि ग्लोबलाइजेशन के आर्थिक रूप से भी लोगों को नहीं जोड़ पाया। कहा कि ग्रेट ब्रिटेन टूटकर अब लिटिल लंदन रह गया है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि पंडितजी के जीवन दर्शन को यदि अभी भी नहीं समझा तो यह नैनो लंदन रह जाएगा।
पहले से दूषित हुई गंगा
डा. जोशी ने कहा कि 21वीं शताब्दी में विश्व पहले से अधिक हिंसा, आतंकवाद, मजहबी कट्टरपन, आर्थिक विषमता से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि गंगा-यमुना पहले से ज्यादा बदहाल हो गई हैं। गंगा जैसी ऋषिकेश में है वैसी इलाहाबाद में नहीं है। इसी तरह से यमुना बदहाल हो गई है।
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शिलान्यास के बाद आयोजन स्थल पर ही ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय और 21वीं शताब्दी’ विषय पर गोष्ठी की गई। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में समग्रता के समावेश पर प्रकाश डाला। इस दौरान डा. मुरली मनोहर जोशी ने अपने छात्र जीवन में दीनदयाल से जुड़ी कुछ स्मृतियां साझा कीं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति दीनदयाल की दूरगामी सोच पर भी ध्यान आकृष्ट कराया। कहा कि खनिजों के बेतहाशा खनन से पर्यावरण को होने वाले खतरे से पहले ही आगाह किया था।
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खनिज खत्म होने पर पूरी दुनिया अब इसे रीस्टोर करने पर विचार कर रही है। इस दौरान राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि वह डा. मुरली मनोहर जोशी की तरह से प. दीनदयाल उपाध्याय के साथ तो नहीं रहे, लेकिन उनके विचारों से हमेशा प्रभावित रहे। उन्होंने अपने कुछ संस्मरण भी साझा किए। गोष्ठी का संचालन प्रो. सुगम आनंद ने किया। धन्यवाद प्रो. राजेंद्र शर्मा ने दिया।
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ग्रेट से लिटिल हुआ लंदन
डा. जोशी ने कहा कि पंडित दीनदयाल के विचारों के आधार पर उन्होंने वर्ष 1999 में ही ग्रेट ब्रिटेन के विभाजन की बात कह दी थी। मगर, तब किसी ने नहीं सुना। उन्होंने कहा कि समग्रता से न चलने का ही नतीजा है कि ग्लोबलाइजेशन के आर्थिक रूप से भी लोगों को नहीं जोड़ पाया। कहा कि ग्रेट ब्रिटेन टूटकर अब लिटिल लंदन रह गया है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि पंडितजी के जीवन दर्शन को यदि अभी भी नहीं समझा तो यह नैनो लंदन रह जाएगा।
पहले से दूषित हुई गंगा
डा. जोशी ने कहा कि 21वीं शताब्दी में विश्व पहले से अधिक हिंसा, आतंकवाद, मजहबी कट्टरपन, आर्थिक विषमता से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि गंगा-यमुना पहले से ज्यादा बदहाल हो गई हैं। गंगा जैसी ऋषिकेश में है वैसी इलाहाबाद में नहीं है। इसी तरह से यमुना बदहाल हो गई है।