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विविः 2.23 ने कराया वेब रजिस्ट्रेशन, प्रवेश महज 36 हजार का
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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के आवासीय इकाई के संस्थानों और संबद्ध कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष की कक्षाएं छह अक्तूबर से लगनी थी, लेकिन अभी तक प्रवेश नहीं हो पाए हैं। स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए 2.23 लाख छात्र-छात्राओं ने वेब रजिस्ट्रेशन कराया है, जबकि प्रवेश महज 36 हजार का हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्नातक में प्रवेश के लिए वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चार जुलाई से शुरू कराई थी। स्नातक के साथ परास्नातक की वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 20 अक्तूबर को बंद कर दी गई। करीब साढ़े तीन माह तक वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चली। इसके बाद भी छात्र-छात्राओं के प्रवेश नहीं हो पाए हैं। तमाम कॉलेजों में अभी एक भी छात्र का प्रवेश नहीं हुआ। प्रवेश में देरी का असर पढ़ाई पर पड़ेगा। कुछ कॉलेजों ने स्नातक प्रथम वर्ष की कक्षाएं भी लगानी शुरू कर दी है।
विश्वविद्यालय के प्रवेश समिति के सह समन्वयक प्रो. मनु प्रताप सिंह ने बताया कि मथुरा के अधिकतर कॉलेजों की जांच चल रही थी, उनकी प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगी थी। इससे उनमें प्रवेश नहीं हो पाए हैं। वहीं, अस्थायी संबद्धता वाले कॉलेजों के शपथ पत्र देने के बाद ही प्रवेश प्रक्रिया खोली जा रही है। कॉलेज छात्रों की रिपोर्टिंग करेंगे, उसके बाद ही प्रवेश ले पाएंगे। इससे भी प्रवेश की रफ्तार धीमी है।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर के संस्थानों और संबद्ध कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रति वर्ष डेढ़ लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का प्रवेश होता है। उस हिसाब से अभी तक एक चौथाई छात्र-छात्राओं का प्रवेश नहीं हो पाया है। देर से प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ मिलना भी मुश्किल होगा।
परास्नातक प्रथम वर्ष में अभी तक 2300 से भी कम प्रवेश हुए हैं, जबकि परास्नातक में प्रवेश के लिए 38602 छात्र-छात्राओं ने वेब रजिस्ट्रेशन कराया है।
सेंट जोंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि उनके यहां स्नातक प्रथम वर्ष की कक्षाएं लगनी शुरू हो गई। पहली मेरिट सूची में शामिल छात्रों के प्रवेश हो चुके हैं। दूसरी सूची जारी की जा रही है।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्नातक में प्रवेश के लिए वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चार जुलाई से शुरू कराई थी। स्नातक के साथ परास्नातक की वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 20 अक्तूबर को बंद कर दी गई। करीब साढ़े तीन माह तक वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चली। इसके बाद भी छात्र-छात्राओं के प्रवेश नहीं हो पाए हैं। तमाम कॉलेजों में अभी एक भी छात्र का प्रवेश नहीं हुआ। प्रवेश में देरी का असर पढ़ाई पर पड़ेगा। कुछ कॉलेजों ने स्नातक प्रथम वर्ष की कक्षाएं भी लगानी शुरू कर दी है।
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विश्वविद्यालय के प्रवेश समिति के सह समन्वयक प्रो. मनु प्रताप सिंह ने बताया कि मथुरा के अधिकतर कॉलेजों की जांच चल रही थी, उनकी प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगी थी। इससे उनमें प्रवेश नहीं हो पाए हैं। वहीं, अस्थायी संबद्धता वाले कॉलेजों के शपथ पत्र देने के बाद ही प्रवेश प्रक्रिया खोली जा रही है। कॉलेज छात्रों की रिपोर्टिंग करेंगे, उसके बाद ही प्रवेश ले पाएंगे। इससे भी प्रवेश की रफ्तार धीमी है।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर के संस्थानों और संबद्ध कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रति वर्ष डेढ़ लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का प्रवेश होता है। उस हिसाब से अभी तक एक चौथाई छात्र-छात्राओं का प्रवेश नहीं हो पाया है। देर से प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ मिलना भी मुश्किल होगा।
परास्नातक प्रथम वर्ष में अभी तक 2300 से भी कम प्रवेश हुए हैं, जबकि परास्नातक में प्रवेश के लिए 38602 छात्र-छात्राओं ने वेब रजिस्ट्रेशन कराया है।
सेंट जोंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि उनके यहां स्नातक प्रथम वर्ष की कक्षाएं लगनी शुरू हो गई। पहली मेरिट सूची में शामिल छात्रों के प्रवेश हो चुके हैं। दूसरी सूची जारी की जा रही है।