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विविः 560 में 210 शोधार्थियों ने प्रगति रिपोर्ट जमा की
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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सत्र 2018-19 के 760 में से करीब 210 शोधार्थियों ने ही अब तक छह माह की शोध प्रगति रिपोर्ट विश्वविद्यालय में जमा कराई है। बचे हुए शोधार्थियों को 24 दिसंबर तक का समय दिया गया है। हर छह माह में प्रगति रिपोर्ट देनी है, देरी करने वालों पर आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा।
शोधार्थियों को शोध प्रस्ताव (सिनॉप्सिस) जमा करने के छह माह के अंदर शोध कार्य की प्रगति की रिपोर्ट विश्वविद्यालय में जमा करनी थी। शोध प्रस्ताव जमा करने की आखिरी तारीख बिना विलंब शुल्क के 30 जनवरी और विलंब शुल्क के साथ 15 फरवरी निर्धारित की गई थी। नौ माह से अधिक समय बीतने के बाद भी करीब 550 शोधार्थियों ने प्रगति रिपोर्ट नहीं दी है। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शोधार्थियों को आखिरी तारीख 24 दिसंबर तक दी गई है। सभी शोधार्थियों का इस अवधि तक प्रगति रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य है।
डीन, रिसर्च प्रो. अजय तनेजा ने बताया कि कुछ शोधार्थियों ने शोध प्रस्ताव मंजूर होने से छह माह की अवधि मान ली। जबकि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। वैसे भी शोधार्थियों के शोध प्रस्ताव इस बार नामंजूर नहीं किए गए थे, बस उनमें संशोधन और सुधार बताए गए थे। पहली प्रगति रिपोर्ट शोध प्रस्ताव जमा होने के छह माह तक देनी होती है। पहली बार होने से शोधार्थियों को अतिरिक्त समय दिया गया। अब देरी करने पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
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शोधार्थियों को शोध प्रस्ताव (सिनॉप्सिस) जमा करने के छह माह के अंदर शोध कार्य की प्रगति की रिपोर्ट विश्वविद्यालय में जमा करनी थी। शोध प्रस्ताव जमा करने की आखिरी तारीख बिना विलंब शुल्क के 30 जनवरी और विलंब शुल्क के साथ 15 फरवरी निर्धारित की गई थी। नौ माह से अधिक समय बीतने के बाद भी करीब 550 शोधार्थियों ने प्रगति रिपोर्ट नहीं दी है। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शोधार्थियों को आखिरी तारीख 24 दिसंबर तक दी गई है। सभी शोधार्थियों का इस अवधि तक प्रगति रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य है।
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डीन, रिसर्च प्रो. अजय तनेजा ने बताया कि कुछ शोधार्थियों ने शोध प्रस्ताव मंजूर होने से छह माह की अवधि मान ली। जबकि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। वैसे भी शोधार्थियों के शोध प्रस्ताव इस बार नामंजूर नहीं किए गए थे, बस उनमें संशोधन और सुधार बताए गए थे। पहली प्रगति रिपोर्ट शोध प्रस्ताव जमा होने के छह माह तक देनी होती है। पहली बार होने से शोधार्थियों को अतिरिक्त समय दिया गया। अब देरी करने पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
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