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विवि: केंद्रीय पुस्तकालय में 1.74 लाख पुस्तकें व शोधपत्र
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आगरा। आप यदि पुस्तकें पढ़ने के शौकीन हैं तो आपको डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर स्थित केंद्रीय पुस्तकालय का रुख जरूर करना चाहिए। यहां 1.74 लाख विषय आधारित पाठ्य पुस्तकें, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू साहित्य, थीसिस और शोधपत्र उपलब्ध हैं। इनके अलावा पुस्तकालय की नेटवर्किंग लाइब्रेरी में बैठकर देश व दुनिया भर के 2600 से अधिक समाचारपत्रों को पढ़ा जा सकता है।
पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद अशरद ने बताया कि केंद्रीय पुस्तकालय में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छात्र-छात्राओं के लिए सुविधाएं और बढ़ाई गई हैं। पुस्तकालय के नेटवर्किंग लाइब्रेरी में देश व दुनियां के समाचारपत्रों के अलावा 4000 से अधिक मैगजीन उपलब्ध है। छात्र पुस्तकालय का रुख करें, इसलिए ओपेन एक्सिस की सुविधा नहीं दी गई है। पुस्तकालय में बैठकर इसका लाभ ले सकते हैं। वाईफाई की सुविधा दी गई है। साइबर लाइब्रेरी में ई-पुस्तकें, पत्रिकाएं और डाटाबेस के इस्तेमाल की सुविधा निशुल्क दी गई है। विभिन्न विषयों के 3000 ई-जर्नल्स भी उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि शोधगंगा रिपोजिटरी पर विगत आठ माह में विभिन्न विषयों के 3500 से अधिक पुस्तकालय में संग्रहीत शोथग्रंथों को स्कैन करके अपलोड किया गया है। इससे विश्वविद्यालय 217वें स्थान से 27वें स्थान पर आ गया है।
- 20 हजार से अधिक थीसिस उपलब्ध हैं।
- 12 हजार के करीब सभी विषयों पर आधारित शोधपत्र हैं।
- 25 हजार के करीब रिफरेंस बुक की उपलब्धता है।
आगरा। स्नातक छात्रों के लिए 200 रुपये, परास्नातक के लिए 300 रुपये, शोधार्थियों व एमफिल के छात्रों के लिए 500 रुपये निर्धारित है। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर सदस्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
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पुस्तकालय सहायक डॉ. जेके केसरवानी ने बताया कि छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, शिक्षकों के अलावा आम आदमी भी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में जाकर पुस्तकें पढ़ सकते हैं। इसके लिए उन्हें मौके पर जाकर शपथपत्र भरना होगा। पहचानपत्र दिखाना होगा। पुस्तकें घर ले जाने की अनुमति नहीं होती। पुस्तकालय में उपलब्ध ‘हिस्ट्री एंड एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ द नॉर्थ-वेस्टर्न प्रोविंसेज’, ‘ऐन इंट्रोडक्शन टू मैप रीडिंग’, ‘वैज्ञानिक शब्द संग्रह’, ‘कम्युनिकेशन सिस्टम्स’ किताबों को पढ़ना पुस्तक प्रेमी अधिक पसंद करते हैं।
केंद्रीय पुस्तकालय में सिविल सर्विसेज व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पुस्तकें मंगाने की दिशा में प्रयास किया गया है। पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद अरशद की ओर से पुस्तकों को खरीदने का प्रस्ताव कुलपति को दिया गया है।
केंद्रीय पुस्तकालय में वर्तमान में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों को मिलाकर करीब 2000 उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं। नए सत्र के प्रवेश अभी हो रहे हैं। छात्रों की सदस्यता अभी बढ़ेगी।
प्रो. मोहम्मद अरशद ने बताया कि विश्वविद्यालय में केंद्रीय पुस्तकालय की स्थापना वर्ष 1927 में हुई। वर्तमान में स्थापित केंद्रीय पुस्तकालय के भवन के निर्माण की आधारशिला सात मार्च 1952 में रखी गई। पुस्तकालय में 200 वर्षों से अधिक पुरानी पाठ्य पुस्तकें, 60 -70 वर्षों के विश्वकोश, शब्दकोश और अन्य विषय आधारित पाठ्यपुस्तकों का संग्रह है।
एक वर्ष से केंद्रीय पुस्तकालय के स्टडी रूम में विश्वविद्यालय के आवासीय संस्थानों, संबद्ध कॉलेजों के अलावा डीईआई के शोधार्थी, स्नातक व परास्नातक के 30 से 40 छात्र नियमित रूप से पढ़ने के लिए पहुंचते हैं। इनको इंटरनेट एक्सिस करने की सुविधा भी दी जा रही है।
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पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद अशरद ने बताया कि केंद्रीय पुस्तकालय में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छात्र-छात्राओं के लिए सुविधाएं और बढ़ाई गई हैं। पुस्तकालय के नेटवर्किंग लाइब्रेरी में देश व दुनियां के समाचारपत्रों के अलावा 4000 से अधिक मैगजीन उपलब्ध है। छात्र पुस्तकालय का रुख करें, इसलिए ओपेन एक्सिस की सुविधा नहीं दी गई है। पुस्तकालय में बैठकर इसका लाभ ले सकते हैं। वाईफाई की सुविधा दी गई है। साइबर लाइब्रेरी में ई-पुस्तकें, पत्रिकाएं और डाटाबेस के इस्तेमाल की सुविधा निशुल्क दी गई है। विभिन्न विषयों के 3000 ई-जर्नल्स भी उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि शोधगंगा रिपोजिटरी पर विगत आठ माह में विभिन्न विषयों के 3500 से अधिक पुस्तकालय में संग्रहीत शोथग्रंथों को स्कैन करके अपलोड किया गया है। इससे विश्वविद्यालय 217वें स्थान से 27वें स्थान पर आ गया है।
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- 20 हजार से अधिक थीसिस उपलब्ध हैं।
- 12 हजार के करीब सभी विषयों पर आधारित शोधपत्र हैं।
- 25 हजार के करीब रिफरेंस बुक की उपलब्धता है।
आगरा। स्नातक छात्रों के लिए 200 रुपये, परास्नातक के लिए 300 रुपये, शोधार्थियों व एमफिल के छात्रों के लिए 500 रुपये निर्धारित है। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर सदस्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
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पुस्तकालय सहायक डॉ. जेके केसरवानी ने बताया कि छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, शिक्षकों के अलावा आम आदमी भी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में जाकर पुस्तकें पढ़ सकते हैं। इसके लिए उन्हें मौके पर जाकर शपथपत्र भरना होगा। पहचानपत्र दिखाना होगा। पुस्तकें घर ले जाने की अनुमति नहीं होती। पुस्तकालय में उपलब्ध ‘हिस्ट्री एंड एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ द नॉर्थ-वेस्टर्न प्रोविंसेज’, ‘ऐन इंट्रोडक्शन टू मैप रीडिंग’, ‘वैज्ञानिक शब्द संग्रह’, ‘कम्युनिकेशन सिस्टम्स’ किताबों को पढ़ना पुस्तक प्रेमी अधिक पसंद करते हैं।
केंद्रीय पुस्तकालय में सिविल सर्विसेज व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पुस्तकें मंगाने की दिशा में प्रयास किया गया है। पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद अरशद की ओर से पुस्तकों को खरीदने का प्रस्ताव कुलपति को दिया गया है।
केंद्रीय पुस्तकालय में वर्तमान में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों को मिलाकर करीब 2000 उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं। नए सत्र के प्रवेश अभी हो रहे हैं। छात्रों की सदस्यता अभी बढ़ेगी।
प्रो. मोहम्मद अरशद ने बताया कि विश्वविद्यालय में केंद्रीय पुस्तकालय की स्थापना वर्ष 1927 में हुई। वर्तमान में स्थापित केंद्रीय पुस्तकालय के भवन के निर्माण की आधारशिला सात मार्च 1952 में रखी गई। पुस्तकालय में 200 वर्षों से अधिक पुरानी पाठ्य पुस्तकें, 60 -70 वर्षों के विश्वकोश, शब्दकोश और अन्य विषय आधारित पाठ्यपुस्तकों का संग्रह है।
एक वर्ष से केंद्रीय पुस्तकालय के स्टडी रूम में विश्वविद्यालय के आवासीय संस्थानों, संबद्ध कॉलेजों के अलावा डीईआई के शोधार्थी, स्नातक व परास्नातक के 30 से 40 छात्र नियमित रूप से पढ़ने के लिए पहुंचते हैं। इनको इंटरनेट एक्सिस करने की सुविधा भी दी जा रही है।