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UP: बेशकीमती जमीन के सामने आए दो नए बैनामे, सीआईडी जांच में हुआ बड़ा खुलासा
Thu, 21 Aug 2025 09:01 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 21 Aug 2025 09:01 AM IST
सार
आगरा के जगदीशपुरा स्थित बेशकीमती जमीन के खुर्दबुर्द मामले की सीआईडी जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। इस जमीन के दो नए बैनामे सामने आए हैं।
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आगरा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के जगदीशपुरा के बोदला मार्ग पर बैनारा फैक्टरी के पास स्थित बेशकीमती जमीन खुर्दबुर्द मामले की सीआईडी जांच पूरी हो चुकी है। उस जमीन पर बुधवार को 576 वर्ग मीटर भूमि के दो नए बैनामा कर दिए गए। इस जमीन पर अपना दावा करने वाले 80 वर्षीय नेमकुमार जैन ने बैनामा रोकने के लिए आपत्ति दर्ज कराई थी। मगर आपत्ति पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जमीन के मालिक टहल सिंह को पहले मृत दर्शाकर कूट रचित दस्तावेज बनाए गए थे। अब उसी टहल सिंह ने बुधवार को दो और बैनामा कर दिए। मामला अधिकारियों के पास पहुंचने के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। एडीएम वित्त शुभांगी शुक्ला का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी। उधर, एक अन्य पक्षकार नेम कुमार ने टहल सिंह और अन्य लोगों से खुद की जान का खतरा बताया है।
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जमीन के मालिक टहल सिंह को पहले मृत दर्शाकर कूट रचित दस्तावेज बनाए गए थे। अब उसी टहल सिंह ने बुधवार को दो और बैनामा कर दिए। मामला अधिकारियों के पास पहुंचने के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। एडीएम वित्त शुभांगी शुक्ला का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी। उधर, एक अन्य पक्षकार नेम कुमार ने टहल सिंह और अन्य लोगों से खुद की जान का खतरा बताया है।
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यह था मामला
जनवरी 2024 में मामला सामने आया था। बोदला में कई हजार वर्गगज जमीन पर कब्जा किया गया था। इसके लिए दो मुकदमे दर्ज कराए गए थे। जमीन पर केयरटेकर के रूप में रहने वाले रवि कुशवाहा के परिवार को जेल भेजा गया था। 26 अगस्त 2023 को पहला मामला एनडीपीएस एक्ट में लिखा गया। रवि कुशवाह, उसके भाई संकरिया और ओमप्रकाश को जेल भेजा गया। उनसे 9 किलोग्राम गांजा बरामद दर्शाया गया।
वहीं दूसरा मामला आबकारी अधिनियिम में 9 अक्तूबर 2023 को लिखा गया। इसमें पूनम, पुष्पा और फुरकान को जेल भेजा गया। जेल से बाहर आने के बाद पीड़ित परिवार डीजीपी से मिला था। इसके बाद जांच के आदेश हुए थे। तब जमीन को अपना बताने वाली उमा देवी की तहरीर पर केस दर्ज हुआ था। उन्होंने जमीन के मालिक कहे जाने वाले टहल सिंह की पुत्रवधू होने का दावा किया था। इसमें तत्कालीन जगदीशपुरा एसओ को भी नामजद किया गया। बाद में एसओ को जेल भेजा गया था।
जनवरी 2024 में मामला सामने आया था। बोदला में कई हजार वर्गगज जमीन पर कब्जा किया गया था। इसके लिए दो मुकदमे दर्ज कराए गए थे। जमीन पर केयरटेकर के रूप में रहने वाले रवि कुशवाहा के परिवार को जेल भेजा गया था। 26 अगस्त 2023 को पहला मामला एनडीपीएस एक्ट में लिखा गया। रवि कुशवाह, उसके भाई संकरिया और ओमप्रकाश को जेल भेजा गया। उनसे 9 किलोग्राम गांजा बरामद दर्शाया गया।
वहीं दूसरा मामला आबकारी अधिनियिम में 9 अक्तूबर 2023 को लिखा गया। इसमें पूनम, पुष्पा और फुरकान को जेल भेजा गया। जेल से बाहर आने के बाद पीड़ित परिवार डीजीपी से मिला था। इसके बाद जांच के आदेश हुए थे। तब जमीन को अपना बताने वाली उमा देवी की तहरीर पर केस दर्ज हुआ था। उन्होंने जमीन के मालिक कहे जाने वाले टहल सिंह की पुत्रवधू होने का दावा किया था। इसमें तत्कालीन जगदीशपुरा एसओ को भी नामजद किया गया। बाद में एसओ को जेल भेजा गया था।
एसआईटी के बाद सीआईडी जांच
जमीन का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हर दिन नए खुलासे हुए थे। जमीन के मालिक बताए जाने वाले टहल सिंह को मृत दर्शाया गया था। उनका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराया गया था। मामले में तत्कालीन डीसीपी सिटी सूरज राय के नेतृत्व में एसआईटी ने जांच की थी। फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के मामले में थाना हरीपर्वत में केस दर्ज कराया गया था। बाद में टहल सिंह सामने आए थे। उन्होंने अपने बयान दर्ज कराए थे। इसके बाद पुलिस ने वादी उमा देवी, केयरटेकर सहित अन्य आरोपियों को जेल भेजा था। इसके बाद आरोप पत्र दाखिल किया था। बाद में सीआईडी को जांच स्थानांतरित की गई थी। सीआईडी ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी।
जमीन का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हर दिन नए खुलासे हुए थे। जमीन के मालिक बताए जाने वाले टहल सिंह को मृत दर्शाया गया था। उनका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराया गया था। मामले में तत्कालीन डीसीपी सिटी सूरज राय के नेतृत्व में एसआईटी ने जांच की थी। फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के मामले में थाना हरीपर्वत में केस दर्ज कराया गया था। बाद में टहल सिंह सामने आए थे। उन्होंने अपने बयान दर्ज कराए थे। इसके बाद पुलिस ने वादी उमा देवी, केयरटेकर सहित अन्य आरोपियों को जेल भेजा था। इसके बाद आरोप पत्र दाखिल किया था। बाद में सीआईडी को जांच स्थानांतरित की गई थी। सीआईडी ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी।