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गर्मी की छुट्टियों में रेल आरक्षण छुड़ा रहा 'पसीने', जानिए कौन सी गाड़ी में मिल सकती है सीट
Tue, 14 May 2019 04:17 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 14 May 2019 04:17 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : डेमो
गर्मी की छुट्टियों में ट्रेनों में आरक्षित सीट मिलना टेढ़ी खीर हो गया है। अभी से ज्यादातर लंबी दूरी की ट्रेनों में आरक्षण नहीं मिल पा रहा है। आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल हो जाएगी। तत्काल कोटे में अब भी बाबुओं के साथ ही दलालों का दखल रहता है।
15 मई से 30 जून तक अब ट्रेनों में रिजर्वेशन सीट मिलना बेहद मुश्किल भरा हो गया है। केरला एक्सप्रेस, अवध, जयपुर इलाहाबाद, मरुधर एक्सप्रेस, एसीएपी एक्सप्रेस, पंजाब मेल, शताब्दी समेत कई गाड़ियों में वातानुकूलित से लेकर स्लीपर क्लास तक में सीट नहीं मिल पा रही है। आने वाले दिनों में यह समस्या और बढ़ जाएगी।
तत्काल कोटे में भी खेल बंद नहीं हो पा रहा है। तत्काल टिकट भी गिने चुने लोगों को ही मिल पाती है। स्टेशनों पर अब भी दलालों का दखल बंद नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि सुबह तत्काल कोटे में चंद लोगों को ही यह टिकट मिल पाता है।
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15 मई से 30 जून तक अब ट्रेनों में रिजर्वेशन सीट मिलना बेहद मुश्किल भरा हो गया है। केरला एक्सप्रेस, अवध, जयपुर इलाहाबाद, मरुधर एक्सप्रेस, एसीएपी एक्सप्रेस, पंजाब मेल, शताब्दी समेत कई गाड़ियों में वातानुकूलित से लेकर स्लीपर क्लास तक में सीट नहीं मिल पा रही है। आने वाले दिनों में यह समस्या और बढ़ जाएगी।
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तत्काल कोटे में भी खेल बंद नहीं हो पा रहा है। तत्काल टिकट भी गिने चुने लोगों को ही मिल पाती है। स्टेशनों पर अब भी दलालों का दखल बंद नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि सुबह तत्काल कोटे में चंद लोगों को ही यह टिकट मिल पाता है।
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रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए समर स्पेशल ट्रेनें भी संचालित की हैं, लेकिन इनका लाभ आम यात्री कम ही उठा पाते हैं। इन ट्रेनों की जानकारी भी ज्यादा लोगों को नहीं हो पाती है।
दूसरी ओर, कुछ ट्रेनों में वातानुकूलित कोच बढ़ाए गए हैं, लेकिन यह भी नाकाफी हैं। चंद गाड़ियों में ही कोच बढ़ाए गए हैं। जिन ट्रेनों में ज्यादा मारामारी के हालात हैं, उनमें कोच नहीं बढ़ाए जाते हैं।
दूसरी ओर, कुछ ट्रेनों में वातानुकूलित कोच बढ़ाए गए हैं, लेकिन यह भी नाकाफी हैं। चंद गाड़ियों में ही कोच बढ़ाए गए हैं। जिन ट्रेनों में ज्यादा मारामारी के हालात हैं, उनमें कोच नहीं बढ़ाए जाते हैं।