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पति की लंबी उम्र हो, यहां इसलिए करवाचौथ पर व्रत नहीं रखतीं सुहागिन
ब्यूरो/अमर उजाला टैंटीगांव/नौहझील (मथुरा)
Updated Sat, 07 Oct 2017 08:35 PM IST
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करवाचौथ
- फोटो : अमर उजाला
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देश भर में सुहागिनें अपने पति की दीर्घायु की कामना के लिए करवाचौथ का व्रत रखती हैं, लेकिन मथुरा में कस्बा सुरीर के बघा मोहल्ले की परंपरा एकदम अलग है। यहां सुहागिनें इसलिए करवाचौथ का व्रत नहीं रखती हैं, ताकि उनके पति दीर्घायु हों। यहां केवल सती के मंदिर में जाकर पति की दीर्घायु की कामना की जाती है।
बताया जाता है कि आज से करीब 70-80 साल पहले करवाचौथ के दिन नौहझील के गांव रामनगला में रहने वाला एक ब्राह्मण अपनी नवविवाहिता पत्नी को सुसराल से विदा करा कर लौट रहा था। पति और पत्नी भैंसा गाड़ी में बैठकर कस्बा सुरीर के बघा मोहल्ले में होकर गुजर रहे थे।
तभी कुछ लोगों ने ब्राह्मण पर भैंसा चोरी का आरोप लगाते हुए पीटकर मार डाला। आंखों के सामने पति की जान जाते देख नवविवाहिता ने लोगों को श्राप दिया कि इस मोहल्ले की जो भी स्त्री करवाचौथ का व्रत रखेगी, मेरे पति की तरह उसके पति की भी मृत्यु हो जाएगी। इसके बाद वह नवविवाहिता उसी स्थान पर पति के साथ सती हो गई।
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बताया जाता है कि आज से करीब 70-80 साल पहले करवाचौथ के दिन नौहझील के गांव रामनगला में रहने वाला एक ब्राह्मण अपनी नवविवाहिता पत्नी को सुसराल से विदा करा कर लौट रहा था। पति और पत्नी भैंसा गाड़ी में बैठकर कस्बा सुरीर के बघा मोहल्ले में होकर गुजर रहे थे।
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तभी कुछ लोगों ने ब्राह्मण पर भैंसा चोरी का आरोप लगाते हुए पीटकर मार डाला। आंखों के सामने पति की जान जाते देख नवविवाहिता ने लोगों को श्राप दिया कि इस मोहल्ले की जो भी स्त्री करवाचौथ का व्रत रखेगी, मेरे पति की तरह उसके पति की भी मृत्यु हो जाएगी। इसके बाद वह नवविवाहिता उसी स्थान पर पति के साथ सती हो गई।
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भय के कारण नहीं रखा व्रत
सती माता मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
बताते हैं कि घटना के बाद मोहल्ले की कई महिलाओं ने करवाचौथ का व्रत रखा। इस दौरान उनके पति की मौत हो गई। महिलाओं ने इसे सती का श्राप माना और तब से बघा मोहल्ले की महिलाओं ने करवाचौथ का व्रत रखना बंद कर दिया।
यहां की महिलाएं करवाचौथ के दिन सती माता के मंदिर में अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। मोहल्ले के लोगों ने मिलकर कस्बे में सती माता का मंदिर व स्थान की स्थापना करवा दी है।
यहां की महिलाएं करवाचौथ के दिन सती माता के मंदिर में अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। मोहल्ले के लोगों ने मिलकर कस्बे में सती माता का मंदिर व स्थान की स्थापना करवा दी है।
नवविवाहिताओं ने भी किया इनकार
सती माता मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
वृद्धा अंगूरी देवी ने बताया कि मुहल्ले में सती माता की पूजा-अर्चना की परंपरा का ही निर्वहन होता है। पहली बार करवाचौथ पर पूजा और विमलेश कहती है उन्हें व्रत रखने की तमन्ना थी लेकिन पति की सलामती के लिए वे व्रत नहीं रखेंगी। परंपरा के अनुसार माता की पूजा-अर्चना करेंगी।
कस्बा सुरीर स्थित सती माता मंदिर पर मान्यता है कि यहां दुल्हन लाने से पहले दूल्हा सती माता के मंदिर में पूजा-अर्चना कर शादी करने और दुल्हन को लाने की अनुमति मांगता है।
कस्बा सुरीर स्थित सती माता मंदिर पर मान्यता है कि यहां दुल्हन लाने से पहले दूल्हा सती माता के मंदिर में पूजा-अर्चना कर शादी करने और दुल्हन को लाने की अनुमति मांगता है।