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धीमे धीमे गुलजार होने लगे सोरों के पर्यटन स्थल
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कासगंज के सोरों में लगी भगवान वराह की प्रतिमा।
- फोटो : KASGANJ
कासगंज। कोरोना काल में तीर्थनगरी सोरों में तीर्थपर्यटकों की आवाजाही पूरी तरह बंद होने से यहां के गंगा घाट बेरौनक हो गए थे। न देव स्थानों पर श्रद्धालु पहुंच रहे थे और न ही तीर्थपर्यटक आ रहे थे, लेकिन अब अनलॉक के बाद तीर्थपर्यटन शुरू हो चुका है। धीरे-धीरे श्रद्धालु भी अब आने लगे हैं और तीर्थनगरी गुलजार होने लगी है।
यहां कई प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल हैं। सीताराम मंदिर काफी पुराना है। इसकी देखरेख का जिम्मा पर्यटन विभाग पर है। हरिपदी घाट श्रद्धालुओं से गुलजार रहता है। यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना और गंगास्नान करते हैं। अधिकमास के कारण भगवान वराह के मंदिर में प्रतिदिन अभिषेक किया जा रहा है। तीर्थपर्यटकों के पहुंचने से लॉकडाउन में ठप रहीं कारोबारी गतिविधियां भी फिर से चलने लगी हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण अभी पहले जैसी लोगों की आवाजाही नहीं है। इसका कारण सभी ट्रेनों का संचालन न होना है।
तीर्थनगरी के प्राचीन स्थल
सीताराम मंदिर, वराह मंदिर, सूर्यकुंड, चंद्र कुंड, भागीरथ की गुफा, द्वारिकाधीश मंदिर, भागीरथी मंदिर, त्रिमहाशक्ति कालिका मंदिर, नवदुर्गा सिद्धपीठ, भैरवनाथ मंदिर, सोमेश्वर मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, भैरवनाथ मंदिर, बटुकनाथ मंदिर, गुरु नरसिंह की पाठशाला आदि प्राचीन स्थल हैं।
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फैक्ट फाइल-
1. 800-1000 श्रद्धालु पहुंच रहे प्रतिदिन।
2. लॉकडाउन से पहले तक 2000 से 2500 तक आते थे श्रद्धालु।
कारोबारियों की बात-
अनलॉक के बाद से तीर्थपर्यटकों के आने का क्रम शुरू हुआ है। इससे कारोबारी गतिविधियां भी बढ़ी हैं। अभी सभी ट्रेनें न चलने से पूरी तरह से तीर्थपर्यटक नहीं आ पा रहे हैं। उम्मीद है स्थिति जल्द सामान्य हो। - चेतन अग्रवाल।
कोरोना का तीर्थनगरी के पर्यटन पर काफी असर हुआ, लेकिन अनलॉक के बाद तीर्थपर्यटकों का आना शुरू हुआ है। कारोबार के ढर्रे पर लौटने की उम्मीद है। - राजू मिश्रा, कारोबारी।
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यहां कई प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल हैं। सीताराम मंदिर काफी पुराना है। इसकी देखरेख का जिम्मा पर्यटन विभाग पर है। हरिपदी घाट श्रद्धालुओं से गुलजार रहता है। यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना और गंगास्नान करते हैं। अधिकमास के कारण भगवान वराह के मंदिर में प्रतिदिन अभिषेक किया जा रहा है। तीर्थपर्यटकों के पहुंचने से लॉकडाउन में ठप रहीं कारोबारी गतिविधियां भी फिर से चलने लगी हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण अभी पहले जैसी लोगों की आवाजाही नहीं है। इसका कारण सभी ट्रेनों का संचालन न होना है।
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तीर्थनगरी के प्राचीन स्थल
सीताराम मंदिर, वराह मंदिर, सूर्यकुंड, चंद्र कुंड, भागीरथ की गुफा, द्वारिकाधीश मंदिर, भागीरथी मंदिर, त्रिमहाशक्ति कालिका मंदिर, नवदुर्गा सिद्धपीठ, भैरवनाथ मंदिर, सोमेश्वर मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, भैरवनाथ मंदिर, बटुकनाथ मंदिर, गुरु नरसिंह की पाठशाला आदि प्राचीन स्थल हैं।
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फैक्ट फाइल-
1. 800-1000 श्रद्धालु पहुंच रहे प्रतिदिन।
2. लॉकडाउन से पहले तक 2000 से 2500 तक आते थे श्रद्धालु।
कारोबारियों की बात-
अनलॉक के बाद से तीर्थपर्यटकों के आने का क्रम शुरू हुआ है। इससे कारोबारी गतिविधियां भी बढ़ी हैं। अभी सभी ट्रेनें न चलने से पूरी तरह से तीर्थपर्यटक नहीं आ पा रहे हैं। उम्मीद है स्थिति जल्द सामान्य हो। - चेतन अग्रवाल।
कोरोना का तीर्थनगरी के पर्यटन पर काफी असर हुआ, लेकिन अनलॉक के बाद तीर्थपर्यटकों का आना शुरू हुआ है। कारोबार के ढर्रे पर लौटने की उम्मीद है। - राजू मिश्रा, कारोबारी।