आगरा: डुप्लीकेट सिम जारी कराकर खाते से रकम निकालने वाले तीन शातिर गिरफ्तार
- सिम के माध्यम से बैंक खाते में इंटरनेट बैंकिग सेवा शुरू करा लेते थे शातिर, फिर रकम निकालते थे
- गैंग ने एक किसान के बैंक खाते से निकाले थे 5.50 लाख रुपये, जांच के बाद पकड़ा गया गिरोह
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आगरा की रेंज साइबर थाना पुलिस ने लोगों के मोबाइल नंबर की दूसरी सिम जारी कराकर और फिर उनके खाते में नेट बैंकिंग सेवा चालू करके रकम निकालने वाले गैंग के तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। गैंग ने एक किसान के खाते से 5.50 लाख रुपये निकाल लिए थे। गैंग का सरगना अभी फरार है। वह आईटी का जानकार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों से चार मोबाइल, एक लैपटॉप, छह सिम कार्ड, एक डायरी, खातों का विवरण, बिटक्वाइन खरीदने की जानकारी के लिए बैंक का स्टेटमेंट, चैट के स्क्रीन शॉट मिले हैं।
साइबर थाना के एसआई चेतन भारद्वाज ने बताया कि डौकी क्षेत्र के नगला बेहड़ निवासी किसान संवर सिंह के खाते से जुलाई 2020 में 550653 रुपये निकाल लिए गए थे। वह बैंक गए, तब जानकारी हुई थी। इस मामले में रेंज साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में पता चला कि रकम नेट बैंकिंग से हैदराबाद के एक बैंक खाते में भेजी गई है।
फिरोजाबाद के खातों में भेजी थी रकम
यहां से रकम आगरा और फिरोजाबाद के दो खातों में भेजी गई है। पुलिस की जांच में सामने आया कि पिछले दिनों संवर सिंह का सिम बंद हो गया था। इस पर उन्होंने अपने पड़ोसी लवकुश की मदद से उसी नंबर का दूसरा सिम लिया था। मगर, सिम दोबारा बंद हो गया। इस पर फिर से लवकुश से सिम जारी कराया।
जांच में पता चला कि उनके सिम को स्वैप करके नेट बैकिंग चालू कराई गई थी। इसके बाद रकम को ट्रांसफर किया गया। जिन नंबरों से नेट बैकिंग का प्रयोग किया गया, पुलिस ने उनको खोज लिया। इसके बाद तीन आरोपी सूर्य प्रकाश उर्फ एसपी, शिवम जादौन और लवकुश गिरफ्तार कर लिए गए।
सरगना ने बीटेक की पढ़ाई छोड़ शुरू किया साइबर अपराध
आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि गैंग का सरगना फरार आरोपी सचिन है। वह केके नगर, सिकंदरा में किराये पर रहा था। वह बीटेक कर रहा था। मगर, बीच में पढ़ाई छोड़ दी और साइबर अपराध करने लगा।
राशन कार्ड बनवाने का झांसा देकर लेते थे आईडी प्रूफ
- लोगों को राशन कार्ड, पासपोर्ट बनवाने और अन्य जनसुविधा दिलाने का झांसा देकर उनके खाते की जानकारी और आधार कार्ड की कॉपी ले लेते थे।
- जिससे ठगी करनी होती थी, उसके आईडी प्रूफ के जरिए सिम ब्लॉक कराकर उसके आईडी प्रूफ से डुप्लीकेट सिम जारी करा लेते थे।
- खाता संख्या और डुप्लीकेट सिम की मदद से खाते में नेट बैंकिंग सेवा शुरू करा लेते थे। ओटीपी डुप्लीकेट सिम के नंबर पर आता था। इसके बाद खाते से रकम निकालते थे।
पुलिस से बचने को बिट क्वाइन में बदलते थे रकम
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने संवर सिंह के खाते से रकम को निकालने के बाद 3.40 लाख रुपये के बिट क्वाइन खरीद लिए थे। इससे पुलिस समझ रही थी कि साइबर गैंग ने रकम को बिट क्वाइन में बदला है। आरोपियों ने इन बिट क्वाइन को कुछ महीने बाद ज्यादा रकम होने पर अपने खातों में रुपये के रूप में ट्रांसफर करा लिया।
ऐसा इसलिए करते थे कि पुलिस उन्हें नहीं पकड़ सके। गैंग ने कई और खातों से इसी तरह रकम निकाली है। पुलिस अब सरगना की गिरफ्तारी के प्रयास में लगी है। बैंक खातों की जानकारी भी जुटा रही है, जिससे यह पता किया जा सके कि कितने खातों से रकम निकालकर ट्रांसफर की गई है।
इनकी हुई गिरफ्तारी
- सूर्य प्रकाश उर्फ एसपी निवासी नगला देवहंस, थाना डौकी। यू-ट्यूब चैनल चलाता है। एडिटिंग का जानकार है।
- शिवम जादौन निवासी अराव रोड, थाना सिरसागंज, फिरोजाबाद। बीसीए का छात्र है। कंप्यूटर का जानकार है। वेब ग्राफिक्स सीख रहा है।
- लवकुश निवासी टंकी चौराहा, डौकी। (मजदूरी करता था)। उसने अपने खाते और दस्तावेज सिम खरीदने में दिए थे।
व्यापारी के खाते से निकाले थे 98 हजार
टेढ़ी बगिया निवासी जितेंद्र संजय प्लेस में कंप्यूटर हार्डवेयर का काम करते हैं। उनके खाते से भी 98 हजार रुपये निकाले गए थे। उनके खाते में 16 लाख रुपये और थे। मगर, रुपये फिक्स डिपोजिट के रूप में होने के कारण निकलने से बच गए।
इन बातों का रखें ध्यान
साइबर सेल के एक्सपर्ट विजय तोमर ने बताया कि अपनी निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए। अपने आधार कार्ड, बैंक खाते के कागजात और पेन कार्ड किसी अपरिचित व्यक्ति को नहीं दें। सिम अधिकृत कंपनी के स्टोर से ही लें। अपना मोबाइल किसी अनजान आदमी को न दें। किसी से भी ओटीपी शेयर नहीं करना चाहिए। सिम ओटीपी प्राप्त करके ही स्वैप कराया जा सकता है।