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Agra News: बर्न यूनिट में डॉक्टर नहीं, रेफर किए जा रहे मरीज
Wed, 14 Aug 2024 10:59 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Wed, 14 Aug 2024 10:59 PM IST
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बर्न यूनिट एवं प्लास्टिक सर्जरी केंद्र। संवाद
मैनपुरी। लाखों रुपये की लागत से जिला अस्पताल परिसर स्थापित बर्न यूनिट जले हुए मरीजों के जख्मों पर मरहम लगाने में नाकाम है। यूनिट का दो साल पहले पर्यटन मंत्री ने शुभारंभ तो करा दिया। लेकिन अब तक यूनिट के लिए न तो डॉक्टर मिले सके और न ही जरूरी मशीनें उपलब्ध कराई जा सकी। ऐसे में यहां आने वाले सामान्य मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।
बर्न मामलों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में वर्ष 2018 में 237.88 लाख की लागत से बर्न यूनिट एवं प्लास्टिक सर्जरी केंद्र की स्थापना कराई गई। वर्ष 2022 में विधान सभा चुनाव के दौरान कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह ने इसका उद्घाटन भी कर दिया, लेकिन आज तक इस यूनिट का लाभ कोई मरीज नहीं उठा सका। यहां भर्ती होने वाले मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। यहां की व्यवस्थाओं पर यदि ध्यान दिया जाए तो डॉक्टर के नाम पर किसी की तैनाती नहीं है। एक सिस्टर इंचार्ज और कर्मचारी तो यहां रहते हैं। लेकिन डॉक्टर के न होने के कारण लोग अपने मरीज को यहां भर्ती करने के साथ ही रेफर कराकर ले जाते हैं। डॉक्टर की व्यवस्था न होने के कारण लोग अपने मरीज को मेडिकल कॉलेज सैफई व आगरा के निजी अस्पतालों में उपचार कराने को मजबूर हैं।
दो दिन में पांच मरीज करा ले गए छुट्टी
जिला अस्पताल के बर्न यूनिट की बात करें तो पिछले दो दिन में यहां पांच मरीज पहंचे। डॉक्टर की तैनाती न होने के कारण तीमारदार अपने मरीजों को यहां से रेफर करा ले गए। बुधवार को यहां एक भी मरीज नहीं भर्ती था। यहां उचित सुविधा न मिलने के कारण मरीज भर्ती होने को तैयार नहीं हैं।
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दूरी अधिक होने से ईएमओ भी नहीं पहुंचते उपचार देने
बर्न यूनिट की बात करें तो यह जिला अस्पताल से करीब 500 मीटर दूरी पर स्थित है। यहां भर्ती होने वाले मरीजों को उपचार की जिम्मेदारी जिला अस्पताल की इमरजेंसी से ही ईएमओ आते हैं। दूरी अधिक होने के कारण ईएमओ भी यहां नहीं पहुंचते है। इसके चलते लोग यहां अपने मरीज को भर्ती कराने को राजी नहीं हैं।
बर्न यूनिट के लिए डॉक्टर और व्यवस्थाओं के लिए पहले कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं। जैसे ही डॉक्टर की व्यवस्था होती है यहां बर्न यूनिट के साथ प्लास्टिक सर्जरी का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। फिलहाल जिला अस्पताल के डॉक्टर की निगरानी में ही मरीज यहां भर्ती होते हैं।
-डॉ. मदनलाल, सीएमएस
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बर्न मामलों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में वर्ष 2018 में 237.88 लाख की लागत से बर्न यूनिट एवं प्लास्टिक सर्जरी केंद्र की स्थापना कराई गई। वर्ष 2022 में विधान सभा चुनाव के दौरान कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह ने इसका उद्घाटन भी कर दिया, लेकिन आज तक इस यूनिट का लाभ कोई मरीज नहीं उठा सका। यहां भर्ती होने वाले मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। यहां की व्यवस्थाओं पर यदि ध्यान दिया जाए तो डॉक्टर के नाम पर किसी की तैनाती नहीं है। एक सिस्टर इंचार्ज और कर्मचारी तो यहां रहते हैं। लेकिन डॉक्टर के न होने के कारण लोग अपने मरीज को यहां भर्ती करने के साथ ही रेफर कराकर ले जाते हैं। डॉक्टर की व्यवस्था न होने के कारण लोग अपने मरीज को मेडिकल कॉलेज सैफई व आगरा के निजी अस्पतालों में उपचार कराने को मजबूर हैं।
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दो दिन में पांच मरीज करा ले गए छुट्टी
जिला अस्पताल के बर्न यूनिट की बात करें तो पिछले दो दिन में यहां पांच मरीज पहंचे। डॉक्टर की तैनाती न होने के कारण तीमारदार अपने मरीजों को यहां से रेफर करा ले गए। बुधवार को यहां एक भी मरीज नहीं भर्ती था। यहां उचित सुविधा न मिलने के कारण मरीज भर्ती होने को तैयार नहीं हैं।
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दूरी अधिक होने से ईएमओ भी नहीं पहुंचते उपचार देने
बर्न यूनिट की बात करें तो यह जिला अस्पताल से करीब 500 मीटर दूरी पर स्थित है। यहां भर्ती होने वाले मरीजों को उपचार की जिम्मेदारी जिला अस्पताल की इमरजेंसी से ही ईएमओ आते हैं। दूरी अधिक होने के कारण ईएमओ भी यहां नहीं पहुंचते है। इसके चलते लोग यहां अपने मरीज को भर्ती कराने को राजी नहीं हैं।
बर्न यूनिट के लिए डॉक्टर और व्यवस्थाओं के लिए पहले कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं। जैसे ही डॉक्टर की व्यवस्था होती है यहां बर्न यूनिट के साथ प्लास्टिक सर्जरी का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। फिलहाल जिला अस्पताल के डॉक्टर की निगरानी में ही मरीज यहां भर्ती होते हैं।
-डॉ. मदनलाल, सीएमएस