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...तो सपा को रालोद पर कुर्बान करनी होंगी कई सीटें

Tue, 31 May 2016 02:07 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Tue, 31 May 2016 02:07 AM IST
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... Then SP sacrificed several seats on RLD
समाजवादी पार्टी - फोटो : Amar Ujala
सपा और रालोद के गठबंधन से गर्माई ब्रज की राजनीति
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2012 चुनाव में रालोद के आठ में से पांच विधायक ब्रजक्षेत्र से जीते 

हैंडपंप एक बार फिर साइकिल के साथ कदमताल को तैयार है। इस तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। अगर, ऐसा होता है तो साइकिल को कई सीटों पर समझौता करना होगा। खासतौर से ब्रजक्षेत्र में। क्योंकि कई सीटों उसकी जड़ें काफी गहरी हैं। यहां की कमान चौधरियों के हाथों में रहने के कारण साइकिल को रफ्तार चाह कर भी नहीं मिल पाएगी। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2012 के चुनाव में आठ विधानसभा सीटों पर जीतने वाली रालोद के पांच विधायक ब्रजक्षेत्र से ही हैं। बड़े चौधरी का गढ़ कहे जाने वाले मेरठ-सहारनपुर दोनों कमिश्नरियों से कुल तीन विधायक ही जीते थे।

गौरतलब है कि मथुरा की पांच में से चार विधानसभा सीटों पर राष्ट्रीय लोकदल की मजबूत स्थिति है। मांट, बलदेव, गोवर्धन, छाता पर चौधरियों का दबदबा है। वर्ष 2012 के चुनाव में छाता और बलदेव दोनों सीटें रालोद ने जीत दर्ज की। अलीगढ़ के खैर, इगलास और बरौली विधानसभा सीटों पर भी रालोद ने कब्जा किया। आगरा जिले में किसी सीट पर रालोद जीत तो दर्ज नहीं करा सकी थी लेकिन वोट जरूर अच्छे खासे मिले थे। फतेहपुर सीकरी और एत्मादपुर सीट को भी रालोद के प्रभाव वाली हैं। हालांकि खेरागढ़ और आगरा ग्रामीण सीट भी जाट राजनीति की धुरी पर ही घुमती है। वहीं, वर्ष 2007 के चुनाव में गोवर्धन सीट जीती। गोकुल, मांट और छाता में दूसरे नंबर पर रही थी। जबकि सपा इन चारों सीटों पर चौथे पायदान पर थी। इसी साल इगलास और खैर में भी हैंडपंप पर दबा के वोट डले। बरौली में दूसरे नंबर पर रही। हाथरस की सादाबाद सीट भी रालोद के खाते में गिरी। इस साल आगरा जिले में रालोद को एक भी सीट नहीं मिली लेकिन वोट हासिल करने में सपा से बेहतर स्थिति रही थी। फतेहपुर सीकरी और खेरागढ़ में रालोद तीसरे नंबर पर रही थी जबकि सपा चौथे नंबर पर। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में मथुरा की गोकुल व छाता, हाथरस की सादाबाद और आगरा की फतेहपुर सीकरी व एत्मादपुर विधानसभा सीट से रालोद ने चुनाव जीता। यदि सपा और रालोद का गठबंधन होता है सपा को इन सीटों पर समझौता करना पड़ सकता है। ऐसे में घोषित हो चुके सपा प्रत्याशियों को झटका लग सकता है। क्याेंकि रालोद इन सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूती के साथ करेगी। 
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