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इन गरीब परिवारों की इस 'मजबूरी' से ताजमहल हो रहा प्रदूषित

Tue, 26 Jun 2018 01:30 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Updated Tue, 26 Jun 2018 01:30 PM IST
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the taj mahal is being polluted due to the smoke coming out of the huts
ताजमहल के अासपास घ्ाराें में जलता है चूल्हा - फोटो : अमर उजाला
जिस ताजमहल को वायु प्रदूषण से बचाने के लिए ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में कोयला और लकड़ी का प्रयोग प्रतिबंधित किया गया है, उसी के साये में इनका धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। 
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गैस सिलिंडर के अभाव में इस स्मारक के एक किमी दायरे में बहुत से परिवार चूल्हे पर ही निर्भर हैं। इन चूल्हों में कोयला और लकड़ी का ही उपयोग हो रहा है। 

पिछले दिनों टीटीजेड अथॉरिटी के निर्देश पर प्रशासन ने ताजमहल के आसपास के 522 ऐसे परिवारों को चिह्नित किया था, जहां अभी भी चूल्हे सुलग रहे हैं। 

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ताजमहल
खाना पकाने से लेकर छोटे से छोटा काम चूल्हों पर ही हो रहा है। बुढ़ाना, सैय्यद बुखारी, बुढ़ेरा, नगला पैमा गांवों के तमाम रहने वालों पर एलपीजी गैस सिलिंडर नहीं है, यहां पीएनजी गैस पाइप लाइन भी नहीं है। 

बता दें कि ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए काफी कवायद की जा रही है। ‘विजन डॉक्यूमेंट’ के तहत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अगले 100 साल ताज के संरक्षण की योजना पर मंथन कर रहे हैं। 

वायु प्रदूषण से बचाने के लिए वायु शुद्धीकरण उपकरण लगाने की बात चल रही है। वहीं, दूसरी ओर ताज के साये में रहने वालों को अब तक एलपीजी गैस सिलिंडर तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। 

जबकि भारत सरकार द्वारा उज्जवला योजना के तहत सभी को गैस सिलिंडर उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है।
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पूर्व डीएम ने लिखा था पत्र

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तत्कालीन डीएम गाैरव दयाल - फोटो : अमर उजाला
तत्कालीन जिलाधिकारी गौरव दयाल ने इस सर्वे के आधार पर आईओसी लिमिटेड (एलपीजी सेल्स) को पत्र लिखकर इन 522 परिवारों को एलपीजी गैस सिलिंडर उपलब्ध कराने को कहा था। 

सर्वे में इन परिवारों को गैस सिलिंडर उपलब्ध कराने के लिए 13.59 लाख रुपये का आंकलन किया गया था। यह धनराशि सीएसआर (कारपोरेट ) के तहत उपलब्ध कराने के लिए कहा था। 

मगर, इस पर अब तक अमल नहीं हो पाया है। पूर्व डीएम ने अपने पत्र में लकड़ी-कोयले के प्रयोग से ताजमहल के मुख्य स्मारक को प्रदूषित होने की बात कही थी। 
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पेठा इकाइयों पर लग चुका है प्रतिबंध

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कोयले पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के लिए प्रशासन ने पेठा इकाइयों पर काफी शिकंजा कसा। इसके चलते तमाम इकाइयां बंद हो गईं। 

अब अधिकांश इकाइयां गैस भट्ठियों पर ही संचालित हो रही हैं। इतना ही नहीं, दिल्ली गेट क्षेत्र में तो तमाम चाय की दुकानों की कोयले से संचालित भट्ठियां ही नष्ट करा दी गई थीं।
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