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सुर, लय और ताल खामोश...बिरजू महाराज के पैरों की थमी थिरकन
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आगरा। सुर, लय और ताल का पैरों की थिरकन से साथ छूट गया। आगरा के कथक प्रेमी यह जानकर स्तब्ध रह गए कि कथक सम्राट बिरजू महाराज का देहावसान हो गया है। सबसे पहले सन 1976 में शरद उत्सव के दौरान ताजगनरी में सर्किट हाउस की बगिया बिरजू महाराज की भाव भंगिमा से गुलजार हुई थी। उनके निधन पर कथक केंद्रों पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।
गजल गायक सुधीर नारायण ने बताया कि बिरजू महाराज आधिकारिक रूप से तीन बार आगरा आए थे। सबसे पहले सन 1976 में सर्किट हाउस में कथक से लोगों को भावविभोर कर दिया था। इसके बाद सन 1995 में शिल्पग्राम में लगे ताज महोत्सव में उन्होंने अपनी प्रस्तुति दी थी। इसके बाद सन 2005 में उन्हें फिर ताज महोत्सव के लिए आमंत्रण दिया गया। वह आगरा आए भी, पर कार्यक्रम से पहले अग्निकांड हो जाने के कारण कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा था।
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ठुमरी के अच्छे गायक थे
कवि पवन आगरी ने बताया कि कथक सम्राट बिरजू महाराज ठुमरी के अच्छे गायक थे। वह कहते थे संगीत साधना है। इसलिए इसमें ज्यादा से ज्यादा लीन रहना चाहिए। ताज महोत्सव समिति में उस समय मेरे पास सदस्य की जिम्मेदारी थी। उस दौरान स्टेज के पास बिरजू महाराज को ठुमरी गाते भी सुना था। उनका इस तरह से चले जाना संगीत जगत में बड़ी क्षति है।
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बॉक्स (फोटो)
उनसे काफी सीखने को मिला
कथक नृत्यांगना रश्मि शर्मा मिश्रा का कहना है कि बिरजू महाराज ने कथक को सरल तरीके से आम लोगों तक पहुंचाया। देश-विदेश में उन्हें कई बार स्टेज पर कथक करते देखा। काफी कुछ नया सीखने को मिला। उनका कहना है कि दुनियाभर में कथक को पहुंचाने का श्रेय महाराज जी को जाता है।
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बॉक्स (फोटो)
कथक के प्रचार-प्रसार पर था जोर
अंतरराष्ट्रीय कथक नृत्यांगना काजल शर्मा ने बताया कि उनकी पिछली बार लंदन में बिरजू महाराज से मुलाकात हुई थी। कथक के प्रचार-प्रसार को बढ़ाने की बात उन्होंने कही थी। काजल का कहना है कि महाराज ने कथक को दुनिया में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। कथक को एक नई पहचान दी।
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गजल गायक सुधीर नारायण ने बताया कि बिरजू महाराज आधिकारिक रूप से तीन बार आगरा आए थे। सबसे पहले सन 1976 में सर्किट हाउस में कथक से लोगों को भावविभोर कर दिया था। इसके बाद सन 1995 में शिल्पग्राम में लगे ताज महोत्सव में उन्होंने अपनी प्रस्तुति दी थी। इसके बाद सन 2005 में उन्हें फिर ताज महोत्सव के लिए आमंत्रण दिया गया। वह आगरा आए भी, पर कार्यक्रम से पहले अग्निकांड हो जाने के कारण कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा था।
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ठुमरी के अच्छे गायक थे
कवि पवन आगरी ने बताया कि कथक सम्राट बिरजू महाराज ठुमरी के अच्छे गायक थे। वह कहते थे संगीत साधना है। इसलिए इसमें ज्यादा से ज्यादा लीन रहना चाहिए। ताज महोत्सव समिति में उस समय मेरे पास सदस्य की जिम्मेदारी थी। उस दौरान स्टेज के पास बिरजू महाराज को ठुमरी गाते भी सुना था। उनका इस तरह से चले जाना संगीत जगत में बड़ी क्षति है।
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उनसे काफी सीखने को मिला
कथक नृत्यांगना रश्मि शर्मा मिश्रा का कहना है कि बिरजू महाराज ने कथक को सरल तरीके से आम लोगों तक पहुंचाया। देश-विदेश में उन्हें कई बार स्टेज पर कथक करते देखा। काफी कुछ नया सीखने को मिला। उनका कहना है कि दुनियाभर में कथक को पहुंचाने का श्रेय महाराज जी को जाता है।
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कथक के प्रचार-प्रसार पर था जोर
अंतरराष्ट्रीय कथक नृत्यांगना काजल शर्मा ने बताया कि उनकी पिछली बार लंदन में बिरजू महाराज से मुलाकात हुई थी। कथक के प्रचार-प्रसार को बढ़ाने की बात उन्होंने कही थी। काजल का कहना है कि महाराज ने कथक को दुनिया में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। कथक को एक नई पहचान दी।