{"_id":"6ac4168189a999a4d20bf2cb","slug":"the-drain-spews-the-dark-truth-about-counterfeit-medicines-agra-news-c-25-1-drn1057-1177849-2026-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra News: नाला उगल रहा नकली दवाओं का काला सच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra News: नाला उगल रहा नकली दवाओं का काला सच
विज्ञापन
यमुनापार टेढ़ी बगिया में पड़ी दवाएं।
आगरा। धनौली में पांच करोड़ की नकली दवाओं के भंडाफोड़ से मचे हड़कंप के बीच इस काले कारोबार की जड़ें अब यमुनापार के नालों और झाड़ियों तक पहुंच गई हैं। औषधि विभाग व पुलिस की धरपकड़ से घबराए सिंडिकेट ने टेढ़ी बगिया स्थित गोदाम रातों-रात खाली कर जीवनरक्षक दवाओं का बड़ा जखीरा नाले, झाड़ियों और सड़कों पर फेंक दिया। सोमवार सुबह जब नाले से दवाएं उफनकर बाहर आईं तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
टेढ़ी बगिया में ईंट मंडी के पास कांशीराम आवास योजना के समीप राहगीरों ने भारी मात्रा में दवाओं के कट्टे और पैकेट बिखरे देखे। सूचना पर पहुंची पुलिस और औषधि निरीक्षक नीलेश शर्मा की टीम ने मौके से जांच के लिए नमूने एकत्र किए। इसके बाद संक्रमण व दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए शेष दवाओं को जेसीबी मंगवाकर गहरे गड्ढे में दबवा दिया गया।
-- -- -- -- -- --
पांच नामी कंपनियों के रैपर, अधिकांश एक्सपायर
बरामद दवाओं में प्रमुख रूप से मधुमेह, एलर्जी और गंभीर संक्रमण की एंटीबायोटिक शामिल हैं। पैकेटों पर सनफार्मा, डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज, एस्ट्राजेनेका, सनोफी और टोरंट फार्मास्युटिकल जैसी शीर्ष कंपनियों के नाम दर्ज हैं। जांच में अधिकांश दवाएं एक्सपायर्ड मिली हैं। खास बात यह है कि इनके बैच नंबर व कंपनियों का विवरण सीधे धनौली के अवैध गोदाम से जब्त दवाओं से मेल खा रहा है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- --
आनन-फानन में खाली किया था गोदाम
औषधि निरीक्षक के अनुसार, गत 29 सितंबर को धनौली में पकड़े गए आरोपी इकरार, मामिन और मुकीम ने पूछताछ में टेढ़ी बगिया में दो गोदाम होने की बात कबूली थी। टीम जब मौके पर पहुंची तो गोदाम मालिक सोनू ने बताया कि यह परिसर विजय कुमार को किराए पर दिया गया था। विजय कुमार उसी हिमांशु अग्रवाल का पिता है, जिसे बीते साल अवैध दवाओं के मामले में एसटीएफ अधिकारी को एक करोड़ रुपये की घूस देने की कोशिश में पकड़ा गया था। विजय 27 सितंबर को ही गोदाम खाली कर फरार हो गया था। पुलिस अब मार्ग के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर दवाएं फेंकने वालों की शिनाख्त कर रही है।
-- -
टेढ़ी बगिया में मिली दवाओं का धनौली में जब्त खेप से मिलान हुआ है। दोनों के बैच नंबर और कंपनियां एक जैसी हैं, जिससे इनके तार अंतरराज्यीय सिंडिकेट से जुड़े होने की पुष्टि होती है। पूर्व में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और नेटवर्क के अन्य ठिकानों की पड़ताल की जा रही है।
- अरविंद गुप्ता, सहायक आयुक्त, औषधि
विज्ञापन
टेढ़ी बगिया में ईंट मंडी के पास कांशीराम आवास योजना के समीप राहगीरों ने भारी मात्रा में दवाओं के कट्टे और पैकेट बिखरे देखे। सूचना पर पहुंची पुलिस और औषधि निरीक्षक नीलेश शर्मा की टीम ने मौके से जांच के लिए नमूने एकत्र किए। इसके बाद संक्रमण व दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए शेष दवाओं को जेसीबी मंगवाकर गहरे गड्ढे में दबवा दिया गया।
विज्ञापन
पांच नामी कंपनियों के रैपर, अधिकांश एक्सपायर
बरामद दवाओं में प्रमुख रूप से मधुमेह, एलर्जी और गंभीर संक्रमण की एंटीबायोटिक शामिल हैं। पैकेटों पर सनफार्मा, डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज, एस्ट्राजेनेका, सनोफी और टोरंट फार्मास्युटिकल जैसी शीर्ष कंपनियों के नाम दर्ज हैं। जांच में अधिकांश दवाएं एक्सपायर्ड मिली हैं। खास बात यह है कि इनके बैच नंबर व कंपनियों का विवरण सीधे धनौली के अवैध गोदाम से जब्त दवाओं से मेल खा रहा है।
विज्ञापन
आनन-फानन में खाली किया था गोदाम
औषधि निरीक्षक के अनुसार, गत 29 सितंबर को धनौली में पकड़े गए आरोपी इकरार, मामिन और मुकीम ने पूछताछ में टेढ़ी बगिया में दो गोदाम होने की बात कबूली थी। टीम जब मौके पर पहुंची तो गोदाम मालिक सोनू ने बताया कि यह परिसर विजय कुमार को किराए पर दिया गया था। विजय कुमार उसी हिमांशु अग्रवाल का पिता है, जिसे बीते साल अवैध दवाओं के मामले में एसटीएफ अधिकारी को एक करोड़ रुपये की घूस देने की कोशिश में पकड़ा गया था। विजय 27 सितंबर को ही गोदाम खाली कर फरार हो गया था। पुलिस अब मार्ग के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर दवाएं फेंकने वालों की शिनाख्त कर रही है।
टेढ़ी बगिया में मिली दवाओं का धनौली में जब्त खेप से मिलान हुआ है। दोनों के बैच नंबर और कंपनियां एक जैसी हैं, जिससे इनके तार अंतरराज्यीय सिंडिकेट से जुड़े होने की पुष्टि होती है। पूर्व में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और नेटवर्क के अन्य ठिकानों की पड़ताल की जा रही है।
- अरविंद गुप्ता, सहायक आयुक्त, औषधि