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Agra News: न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल होने के तीन साल में खत्म होगा मुकदमा
Thu, 27 Jun 2024 01:15 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Thu, 27 Jun 2024 01:15 AM IST
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मैनपुरी।
दीवानी न्यायालय में एक जुलाई से मुकदमों के निस्तारण की प्रक्रिया बदल जाएगी। एक जुलाई 2024 के बाद कोर्ट में विवेचक द्वारा किसी अपराध में दाखिल की जाने वाली चार्जशीट पर तीन साल के अंदर संबंधित मुकदमे का पीठासीन अधिकारी द्वारा निस्तारण किया जाएगा। एक जुलाई से ही भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) को लागू किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने 1860 की आईपीसी में 16 दशक बाद बदलाव करके एक जुलाई से लागू करने का निर्णय ले लिया है। आईपीसी की जगह बनाई गई बीएनएस में न केवल धाराएं कम की गई हैं। बल्कि संबंधित अपराध की सजा और जुर्माने में भी बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत एक जुलाई के बाद न्यायालय में विवेचक द्वारा दाखिल की जाने वाली चार्जशीट के बाद संबंधित पीठासीन अधिकारी तीन साल में मुकदमे का निस्तारण कर देंगे। दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) लागू हो जाएगी। अपराध होने पर नई धाराओं के तहत ही थाने में रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। लागू होने वाली नई बीएनएस में कुल 356 धाराएं ही अमल में लाई जाएंगीं।
प्रमुख अपराध आईपीसी की धारा बीएनएस की धारा
हत्या 302 103-ए
जानलेवा हमला 307 109
गैर इरादतन हत्या 304 106
भ्रूण हत्या 313 89
लूट 392 309-ए
अपहरण 363 137-ए
छेड़छाड़ 354 79
आवाजकशी 294 296
भारतीय न्याय संहिता में कई अपराधों में सख्त सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट में अधिकतम तीन साल में मुकदमे का निस्तारण भी होगा। भारतीय दंड संहिता की 22 धाराएं नई भारतीय न्याय संहिता में समाप्त कर दी गई हैं। जबकि 175 धाराएं बदल दी गई हैं। भारतीय न्याय संहिता ज्यादा प्रभावी होगी। - पुष्पेंद्र सिंह चौहान, डीजीसी फौजदारी
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भारतीय न्याय संहिता में धाराओं में बदलाव किया गया है। शुरू में परेशानी तो होगी लेकिन इसका फायदा भी मिलेगा। मुकदमा लंबा न चलकर जल्दी खत्म होगा। इसका लाभ वादकारियों को सबसे ज्यादा मिलेगा। नई भारतीय न्याय संहिता में केवल 356 धाराएं ही हैं। जबकि आईपीसी में 511 धाराएं थीं। - चतुर सिंह, पूर्व डीजीसी फौजदारी
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दीवानी न्यायालय में एक जुलाई से मुकदमों के निस्तारण की प्रक्रिया बदल जाएगी। एक जुलाई 2024 के बाद कोर्ट में विवेचक द्वारा किसी अपराध में दाखिल की जाने वाली चार्जशीट पर तीन साल के अंदर संबंधित मुकदमे का पीठासीन अधिकारी द्वारा निस्तारण किया जाएगा। एक जुलाई से ही भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) को लागू किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने 1860 की आईपीसी में 16 दशक बाद बदलाव करके एक जुलाई से लागू करने का निर्णय ले लिया है। आईपीसी की जगह बनाई गई बीएनएस में न केवल धाराएं कम की गई हैं। बल्कि संबंधित अपराध की सजा और जुर्माने में भी बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत एक जुलाई के बाद न्यायालय में विवेचक द्वारा दाखिल की जाने वाली चार्जशीट के बाद संबंधित पीठासीन अधिकारी तीन साल में मुकदमे का निस्तारण कर देंगे। दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) लागू हो जाएगी। अपराध होने पर नई धाराओं के तहत ही थाने में रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। लागू होने वाली नई बीएनएस में कुल 356 धाराएं ही अमल में लाई जाएंगीं।
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प्रमुख अपराध आईपीसी की धारा बीएनएस की धारा
हत्या 302 103-ए
जानलेवा हमला 307 109
गैर इरादतन हत्या 304 106
भ्रूण हत्या 313 89
लूट 392 309-ए
अपहरण 363 137-ए
छेड़छाड़ 354 79
आवाजकशी 294 296
भारतीय न्याय संहिता में कई अपराधों में सख्त सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट में अधिकतम तीन साल में मुकदमे का निस्तारण भी होगा। भारतीय दंड संहिता की 22 धाराएं नई भारतीय न्याय संहिता में समाप्त कर दी गई हैं। जबकि 175 धाराएं बदल दी गई हैं। भारतीय न्याय संहिता ज्यादा प्रभावी होगी। - पुष्पेंद्र सिंह चौहान, डीजीसी फौजदारी
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भारतीय न्याय संहिता में धाराओं में बदलाव किया गया है। शुरू में परेशानी तो होगी लेकिन इसका फायदा भी मिलेगा। मुकदमा लंबा न चलकर जल्दी खत्म होगा। इसका लाभ वादकारियों को सबसे ज्यादा मिलेगा। नई भारतीय न्याय संहिता में केवल 356 धाराएं ही हैं। जबकि आईपीसी में 511 धाराएं थीं। - चतुर सिंह, पूर्व डीजीसी फौजदारी