{"_id":"61828d722a86255c411e9631","slug":"the-beautiful-tirtha-govardhan-is-situated-in-the-picturesque-lap-of-braj-kasganj-news-agr51359902","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्रज की सुरम्य गोद में बसा हुआ है मनोहरी तीर्थ गोवर्धन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्रज की सुरम्य गोद में बसा हुआ है मनोहरी तीर्थ गोवर्धन
विज्ञापन
कासगंज। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होने वाली गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है। शुक्रवार को यह पर्व जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों ने विधि विधानपूर्वक इस पूजा के उपाय सुझाए हैं और पूजा का शुभ समय बताया है।
मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों के द्वारा किए जाने वाली देवराज इंद्र की पूजा के स्थान पर यह पूजा प्रारंभ की थी। इस पर इंद्रदेव ने क्रोधित होकर भयंकर बारिश की जिससे ब्रजमंडल डूब गया। भगवान श्रीकृष्ण ने ग्वालवालों की सहायता से अपनी तर्जनी उंगली पर सप्तकोसी परिधि वाले विशालकाय गोर्वधन पर्वत को धारण कर लिया। जिसके नीचे ब्रजवासियों ने आश्रय प्राप्त किया। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं गिरिराज गोवर्धन का पंचामृत से अभिषेक किया। तभी से इस पूजा का विशेष महत्व है।
मनाया जाता है अन्नकूट महोत्सव
जिलेभर में गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है। जिले के लोग घरों में गिरिराज गोवर्धन का आकर्षक शृंगार करते हैं। राजभोग समर्पण के बाद उनकी आरती उतारी जाती है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को प्राय: सभी मंदिरों और अधिकांश घरों में अन्नकूट महोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाता है।
विज्ञापन
यह है शुभमुहूर्त
सोरोंजी के ज्योतिषाचार्य रामबल्लभ शास्त्री ने बताया कि गोवर्धनपूजा विधि विधानपूर्वक करें और अन्नकूट का भोग लगाएं। शुभ मुहूर्त में गोवर्धन का स्थापन और पूजन करें। विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी।
- पूर्वाह्न 9:45 से 10:35 बजे तक करें गोवर्धन स्थापन।
- प्रदोष बेला में 5:27 से 7:50 बजे तक अन्नकूट का भोग लगाएं।
विज्ञापन
मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों के द्वारा किए जाने वाली देवराज इंद्र की पूजा के स्थान पर यह पूजा प्रारंभ की थी। इस पर इंद्रदेव ने क्रोधित होकर भयंकर बारिश की जिससे ब्रजमंडल डूब गया। भगवान श्रीकृष्ण ने ग्वालवालों की सहायता से अपनी तर्जनी उंगली पर सप्तकोसी परिधि वाले विशालकाय गोर्वधन पर्वत को धारण कर लिया। जिसके नीचे ब्रजवासियों ने आश्रय प्राप्त किया। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं गिरिराज गोवर्धन का पंचामृत से अभिषेक किया। तभी से इस पूजा का विशेष महत्व है।
विज्ञापन
मनाया जाता है अन्नकूट महोत्सव
जिलेभर में गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है। जिले के लोग घरों में गिरिराज गोवर्धन का आकर्षक शृंगार करते हैं। राजभोग समर्पण के बाद उनकी आरती उतारी जाती है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को प्राय: सभी मंदिरों और अधिकांश घरों में अन्नकूट महोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाता है।
विज्ञापन
यह है शुभमुहूर्त
सोरोंजी के ज्योतिषाचार्य रामबल्लभ शास्त्री ने बताया कि गोवर्धनपूजा विधि विधानपूर्वक करें और अन्नकूट का भोग लगाएं। शुभ मुहूर्त में गोवर्धन का स्थापन और पूजन करें। विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी।
- पूर्वाह्न 9:45 से 10:35 बजे तक करें गोवर्धन स्थापन।
- प्रदोष बेला में 5:27 से 7:50 बजे तक अन्नकूट का भोग लगाएं।