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मई में शुरू होगा ताज हेरिटेज कारीडोर पर काम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Apr 2016 01:56 AM IST
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हेरिटेज
- फोटो : demo
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13 साल पहले सूबे की बसपा सरकार को हिला देने वाले ताज हेरिटेज कारीडोर पर सालों तक रहा सन्नाटा अब टूटने वाला है। आगरा किला और ताजमहल के बीच यमुना नदी के 20 हेक्टेयर क्षेत्र में बने हेरिटेज कारीडोर पर मई में काम शुरू हो जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) पहले सप्ताह में कारीडोर पर जमा मलबे हटाएंगे। उसके बाद जमीन पर चार मुगल गार्डन पुनर्र्जीवित किए जाएंगे।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल पहले कारीडोर पर हरियाली विकसित करने के आदेश दिए थे। ताजमहल से आगरा किला के पास रेलवे ब्रिज तक की हेरिटेज कारीडोर की 20 हेक्टेयर जमीन पर चार मुगल बागीचों को पुनर्जीवित किया जाएगा। इसे री-क्लेम्ड एरिया आफ ताज हेरिटेज कारीडोर नाम दिया गया है। इसमें मुगलकाल की हवेली होशदार खान, हवेली आजम खान, हवेली मुगल खान और हवेली इस्लाम खान का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। इन चारों हवेलियों का उल्लेख आस्ट्रियाई इतिहासकार ईवा कोच की पुस्तक और राजा जय सिंह के पुराने नक्शे में मिलता है।
एएसआई मलबे की सफाई पर 1.03 करोड़ रुपये खर्च करेगी। कारीडोर स्थल से खरपतवार हटाने, मलबा हटाने, बाउंड्री ऊंची करने और यमुना किनारा साइड से कांटेदार तारों की बाड़ लगाने का काम मई में शुरू हो जाएगा।
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पांच स्मारकों को जोड़ने के लिए था कारीडोर
ताजमहल और आगरा किला के बीच मायावती सरकार ने 175 करोड़ रुपये की लागत वाले ताज हेरिटेज कारीडोर का काम शुरू कराया था। इससे यमुना नदी किनारे ताजमहल, आगरा किला, रामबाग, एत्माद्दौला, चीनी का रोजा स्मारकों को जोड़ा जाना था। एनपीसीसी (नेशनल पावर कंस्ट्रक्शन कंपनी) ने सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लिए बिना ही करीब 200 ट्रैक्टरों से काम शुरू करा दिया था। बाद में इसी मामले से बसपा सरकार मुश्किल में आ गई थी। कई अफसरों को जेल होने के कारण कारीडोर के नाम से ही राज्य सरकार के अफसर कांपने लगे थे। यही वजह है कि 2006 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश दिए जाने के बाद भी 10 साल तक केंद्र और राज्य सरकार हेरिटेज कारीडोर पर हरियाली विकसित करने की योजना पर काम शुरू नहीं कर पाईं।
‘सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, आगरा किला और ताजमहल के बीच के 20 हेक्टेयर क्षेत्र में मुगल गार्डन बनाने का काम अगले महीने शुरू हो जाएगा। मुगल काल के चार बागीचों को पुनर्जीवित किया जाएगा।’
डा. भुवन विक्रम, अधीक्षण पुरातत्वविद्
नदी के बीच नहीं, किनारे थीं हवेलियां
एएसआई ने बीते साल अगस्त में हवेली होशदार खान, हवेली आजम खान, हवेली मुगल खान और हवेली इस्लाम खान के नाम से मुगल गार्डन की अधिसूचना जारी की, लेकिन यह चारों हवेलियां यमुना नदी के बीच नहीं, बल्कि ताज से आगरा किला के बीच नदी के किनारे थीं। इस जगह पर अब सड़क, शमशान घाट और पार्क बन चुके हैं। एएसआई इन चारों हवेलियों के नाम से मुगल गार्डन पुनर्जीवित तो करेगी, लेकिन यह उनके मूल स्थान से हटकर होंगी।
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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल पहले कारीडोर पर हरियाली विकसित करने के आदेश दिए थे। ताजमहल से आगरा किला के पास रेलवे ब्रिज तक की हेरिटेज कारीडोर की 20 हेक्टेयर जमीन पर चार मुगल बागीचों को पुनर्जीवित किया जाएगा। इसे री-क्लेम्ड एरिया आफ ताज हेरिटेज कारीडोर नाम दिया गया है। इसमें मुगलकाल की हवेली होशदार खान, हवेली आजम खान, हवेली मुगल खान और हवेली इस्लाम खान का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। इन चारों हवेलियों का उल्लेख आस्ट्रियाई इतिहासकार ईवा कोच की पुस्तक और राजा जय सिंह के पुराने नक्शे में मिलता है।
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एएसआई मलबे की सफाई पर 1.03 करोड़ रुपये खर्च करेगी। कारीडोर स्थल से खरपतवार हटाने, मलबा हटाने, बाउंड्री ऊंची करने और यमुना किनारा साइड से कांटेदार तारों की बाड़ लगाने का काम मई में शुरू हो जाएगा।
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पांच स्मारकों को जोड़ने के लिए था कारीडोर
ताजमहल और आगरा किला के बीच मायावती सरकार ने 175 करोड़ रुपये की लागत वाले ताज हेरिटेज कारीडोर का काम शुरू कराया था। इससे यमुना नदी किनारे ताजमहल, आगरा किला, रामबाग, एत्माद्दौला, चीनी का रोजा स्मारकों को जोड़ा जाना था। एनपीसीसी (नेशनल पावर कंस्ट्रक्शन कंपनी) ने सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लिए बिना ही करीब 200 ट्रैक्टरों से काम शुरू करा दिया था। बाद में इसी मामले से बसपा सरकार मुश्किल में आ गई थी। कई अफसरों को जेल होने के कारण कारीडोर के नाम से ही राज्य सरकार के अफसर कांपने लगे थे। यही वजह है कि 2006 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश दिए जाने के बाद भी 10 साल तक केंद्र और राज्य सरकार हेरिटेज कारीडोर पर हरियाली विकसित करने की योजना पर काम शुरू नहीं कर पाईं।
‘सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, आगरा किला और ताजमहल के बीच के 20 हेक्टेयर क्षेत्र में मुगल गार्डन बनाने का काम अगले महीने शुरू हो जाएगा। मुगल काल के चार बागीचों को पुनर्जीवित किया जाएगा।’
डा. भुवन विक्रम, अधीक्षण पुरातत्वविद्
नदी के बीच नहीं, किनारे थीं हवेलियां
एएसआई ने बीते साल अगस्त में हवेली होशदार खान, हवेली आजम खान, हवेली मुगल खान और हवेली इस्लाम खान के नाम से मुगल गार्डन की अधिसूचना जारी की, लेकिन यह चारों हवेलियां यमुना नदी के बीच नहीं, बल्कि ताज से आगरा किला के बीच नदी के किनारे थीं। इस जगह पर अब सड़क, शमशान घाट और पार्क बन चुके हैं। एएसआई इन चारों हवेलियों के नाम से मुगल गार्डन पुनर्जीवित तो करेगी, लेकिन यह उनके मूल स्थान से हटकर होंगी।