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डीईआई : पदक पाकर खिली स्वर्णिम मुस्कान

Sun, 13 Feb 2022 01:48 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 01:48 AM IST
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students got medals in dei
दयालबाग शिक्षण संस्थान के 40 वें दीक्षांत समारोह में मेडल व सर्टिफिकेट मिलने के बाद कुछ कुछ इस तरह - फोटो : Agra City
आगरा। दयालबाग शिक्षण संस्थान (डीईआई) का 40वां दीक्षांत समारोह शनिवार को संस्थान के शिक्षा स्रोत भवन (दीक्षांत सभागार) में संपन्न हुआ। पदक पाकर छात्राओं के चेहरे में स्वर्णिम मुस्कान आ गई। 153 निदेशक पदक छात्र-छात्राओं को दिए गए। इस बार तीन प्रेसीडेंट (अध्यक्ष) पदक दिए गए। तीनों ही छात्राओं के हिस्से आए। सभी स्नातक स्तर की परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक पाने पर बीएससी ऑनर्स (कंप्यूटर साइंस) की छात्रा मिताली वार्ष्णेय और परास्नातक स्तर पर सर्वाधिक अंक पाने वाली एमफिल की छात्रा आरती गुप्ता व तान्या सिंह को प्रेसीडेंट पदक दिया गया।
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शैक्षणिक सत्र 2020-21 के इस दीक्षांत समारोह में 5742 छात्र-छात्राओं को विभिन्न पाठ्यक्रमों में डिग्री और डिप्लोमा का प्रमाणपत्र दिया गया। इसमें 153 को निदेशक पदक, तीन अध्यक्ष पदक और 88 पीएचडी की उपाधि दी गई। 3136 छात्र-छात्राओं को स्नातक की डिग्री, 708 को परास्नातक की डिग्री, 65 को एमफिल की डिग्री, 821 को डिप्लोमा, 175 को परास्नातक डिप्लोमा, 327 को हाईस्कूल और 422 को इंटरमीडिएट की डिग्री वितरित की गई। मुख्य अतिथि केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय के रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार रहे। उनको डीईआई के अध्यक्ष गुर स्वरूप सूद की ओर से ‘सिस्टम सोसाइटी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ दिया गया। मंच पर संस्थान के निदेशक प्रो. पीके कालरा और कुलसचिव प्रो. आनंद मोहन मौजूद रहे। डीईआई के शिक्षा सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. प्रेम सरन सत्संगी (गुरु महाराज) व रानी साहिबा ऑनलाइन समारोह से जुड़े।
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लॉकडाउन में भी पढ़ाई बाधित नहीं हुई: प्रो. कालरा
संस्थान के निदेशक प्रो. पीके कालरा ने समारोह में संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कि कोरोना महामारी में भी संस्थान का शैक्षणिक सत्र प्रभावित नहीं हुआ। लॉकडाउन में भी पढ़ाई बाधित नहीं हुई, ऑनलाइन कक्षाएं लगती रहीं। डीईआई में ‘अनुपम उपवन’ परिसर विकसित किया गया है। इसकी कल्पना एक कृषि पारिस्थितिकी पहल के रूप में की गई है। उन्होंने डिग्री, डिप्लोमा व पदक पाने वाले छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दीं।
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इस बार संस्थापक पदक नहीं दिया गया
इस बार दीक्षांत समारोह में संस्थापक (फाउंडर्स) पदक नहीं दिया गया। यह प्रति वर्ष सर्वोत्तम विद्यार्थी को दिया जाता है। जो पढ़ाई के साथ पाठ्य सहगामी गतिविधियों में भी अच्छा प्रदर्शन करता है। कोरोना काल में पाठ्य सहगामी गतिविधियां प्रभावित रहीं।
कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराया गया
संस्थान की ओर से समारोह में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराया गया। इसमें शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं से आरटीपीसीआर रिपोर्ट ली गई थी। मास्क अनिवार्य था। सामाजिक दूरी के साथ बैठाया गया। सभी ग्लव्स पहन रखा था। सभागार के बाहर लॉन में छात्र-छात्राओं को बैठाया गया था। एलईडी पर कार्यक्रम का प्रसारण किया जा रहा था।
सिविल सर्विसेज में जाना है मिताली का लक्ष्य
अध्यक्ष पदक पाने वाली बीएससी ऑनर्स (कंप्यूटर साइंस) की छात्रा मिताली वार्ष्णेय का लक्ष्य सिविल सर्विसेज में जाना है। ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए काम करना चाहती हैं। मिताली को अध्यक्ष पदक के साथ एक निदेशक पदक भी मिला। यह हाथरस की रहने वाली हैं। पिता कृष्ण कुमार वार्ष्णेय कारोबारी व मां सुमनलता गृहणी हैं।
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती: आरती
अध्यक्ष पदक प्राप्त करने वाली एमफिल संगीत की छात्रा आरती संगीत विषय की शिक्षिका बनना चाहती हैं। उनका कहना है कि कोशिश करने वाली की हार नहीं होती है। वह अपना सपना पूरा करने के लिए डीईआई से ही दिल्ली घराने के उस्ताद लतीफ अहमद पर शोध कार्य कर रही हैं। आरती कासगंज की रहने वाली हैं। इनके पिता यतेंद्र बाबू गुप्ता कारोबारी व मां राजकुमारी गुप्ता गृहणी हैं।
तनाव को संगीत से दूर कर सकते हैं : तान्या
अध्यक्ष पदक प्राप्त करने वाली एमफिल संगीत की छात्रा तान्या सिंह का कहना है कि तनाव को संगीत के माध्यम से दूर कर सकते हैं। खासतौर पर शास्त्रीय संगीत सुनकर। तान्या सिंह प्रताप सिंह गर्ल्स इंटर कॉलेज, मुरादाबाद में शिक्षिका हैं। वह असिस्टेंट प्रोफेसर बनना चाहती हैं। यह एटा की रहने वाली हैं। पिता साहब सिंह पीडब्ल्यूडी में कार्यरत हैं। मां मीरा सिंह शिक्षिका हैं।

70 वर्षीय जीवन ज्योति ने पदक प्राप्त किया
डीईआई के 40वें दीक्षांत समारोह में 70 वर्षीय एमफिल थियोलॉजी की छात्रा जीवन ज्योति शर्मा ने नातिन और बेटी की उपस्थिति में निदेशक पदक प्राप्त किया। वह अब पीएचडी करेंगी। जीवन ज्योति शर्मा ने बताया कि वह बैंक से सेवानिवृत्त हैं। उनकी डीईआई से पढ़ाई करने की इच्छा थी। जिसमें उनके बेटे और बेटी ने सहयोग दिया। बेटी आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर है और बेटा भी प्रोफेसर है। परिवार विद्युत नगर दयालबाग में रहता है।
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