फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   story of ex army man sarvjeet like IAF Pilot Abhinandan

अभिनंदन जैसी है सर्वजीत की कहानी, 10 माह तक चीन में रहे बंधक, झेली यातनाएं, नहीं झुकाया सिर

Sat, 02 Mar 2019 12:24 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 02 Mar 2019 12:24 PM IST
विज्ञापन
story of ex army man sarvjeet like IAF Pilot Abhinandan
विंग कमांडर अभिनंदन, पूर्व सैनिक सर्वजीत
पाकिस्तान में बंधक रहे अभिनंदन को शुक्रवार को उन्हें रिहा कर दिया गया। उनकी बहादुरी को सलाम करते हुए बाह के रुदमुली गांव के सर्वजीत का दर्द छलक पड़ा। क्योंकि सर्वजीत की कहानी भी अभिनंदन जैसी है। सर्वजीत भी चीन में बंदी थे। 
विज्ञापन


विंग कमांडर अभिनंदन को करीब 56 घंटे बाद दबाव में आकर पाकिस्तान ने छोड़ दिया, लेकिन सर्वजीत चीन में 10 माह तक कैद रहे। उन्होंने बताया कि दुश्मन देश की सूचनाओं के लिए बंधक सैनिक को मौत सी यातनाएं दी जाती हैं पर वो सैनिक झुकते नहीं। 
विज्ञापन


वर्ष 1962 में चीन के मोर्चे पर अपने चचेरे भाई रघुवीर सिंह के साथ बहादुरी से लडे़ बाह के रुदमुली गांव के सर्वजीत सिंह ल्हासा चीन में बंधक बना लिए गए थे। जबकि रघुवीर सिंह शहीद को गए थे। 10 माह बाद सर्वजीत सिंह मुक्त किया गया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन

जंगी अवार्ड भी मिला

सर्वजीत ने बताया कि बंधक होने के दौरान वे न टूटे और न झुके। 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग के मोर्चे पर भी गए थे। 1971 में भी बहादुरी से लडे़। उन्हें जंगी अवार्ड भी मिले। उन्होंने कहा कि अभिनंदन के दर्द को मुझसे बेहतर कौन समझेगा।

सर्वजीत सिंह ने कहा कि चीन हो या पाकिस्तान। दुश्मन देश सूचनाओं के लिए सैनिक को बेरहम यातनाएं देता है। मौत सा जीवन झेलने के बाद भी सैनिक कभी टूटता नहीं। देश भक्ति यातनाओं के दर्द पर भारी पड़ती है। अभिनंदन को दुश्मन झुका नहीं पाया। उसके जज्बे को सलाम और अभिनंदन।    
                                                                                                                             
गौने की विदा से पहले ही विधवा सा अहसास

चीन में बंधक रह चुके सर्वजीत सिंह के घर पर उनकी शहादत की खबर पहुंची थी। पत्नी शकुंतला को सदमा लगा था। गौने की विदा होने से पहले ही उन्हें विधवा सा अहसास झेलना पड़ा था। 10 माह बाद मुक्त होकर घर लौटे तो उन्होंने श्रृंगार किया। उन दिनों को याद कर शकुंतला अब भी भावुक हो जाती हैं। जज्बा देखिए कि सर्वजीत सिंह और शकुंतला ने अपने बेटे रमेश सिंह को भी सेना में भर्ती कराया।   
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed