Agra University: पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. विनय पाठक के कामों की जांच में जुटी एसटीएफ, खुलेंगे कई राज
एसटीएफ ने 10 महीने में कॉलेजों को दी गई संबद्धता की भी जांच करेगी। एसटीएफ ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने 10 महीने के कार्यकाल में कॉलेजों में संबद्धता, योजनाएं, विभागीय कार्य की सूची बनाकर मांगी है।
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आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में जांच करने पहुंची एसटीएफ प्रो. विनय पाठक के 10 महीने के कार्यकाल की कुंडली खोज रही है। इसमें इनके कार्यकाल में किए कार्य और योजनाओं की जानकारी जुटाई है। इन्होंने कॉलेजों को दी संबद्धता जांच के दायरे में आ गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन से कितने कॉलेजों को संबद्धता दी, इसका भी विवरण जुटाया है। एसटीएफ अलीगढ़ भी जांच के लिए जा सकती है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से करीब 408 कॉलेजों को अलीगढ़ की राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय से जोड़ा गया है। यहां के करीब 100 कॉलेजों को संबद्धता दी गई। अलीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलसचिव महेश कुमार ने भी इन कॉलेजों का डेटा आगरा विश्वविद्यालय से मांगा, लेकिन अभी तक डेटा नहीं मिला है। इससे इनमें भी गड़बड़ी की आशंका पर एसटीएफ जांच करेगी। एसटीएफ ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने इनके 10 महीने के कार्यकाल में कॉलेजों में संबद्धता, योजनाएं, विभागीय कार्य की सूची बनाकर मांगी है।
परीक्षा कार्य देखने वाली नई एजेंसी की भी होगी जांच
डिजीटेक्स टेक्नोलॉजी इंडिया के एमडी डेविड मारियो डेनिस ने प्रो. पाठक पर आरोप लगाया है कि रुपये न देने पर विश्वविद्यालय में 2022-23 का कार्य नहीं देंगे, इसके चलते अजय मिश्रा की एक कंपनी को इसका कार्य दे दिया है। इससे इस मामले की जांच भी एसटीएफ करेगी। एसटीएफ को आशंका है कि कमीशन न देने के कारण कहीं ही नई एजेंसी को परीक्षा संबंधी कार्य दिया हो।
एमबीबीएस-बीएएमएस की कॉपियां भी बदली गईं
प्रो. पाठक के कुलपति प्रभारी के दौरान ही विश्वविद्यालय के एमबीबीएस और बीएएमएस की कॉपियां बदलने का गैंग पकड़ा था। इसमें विश्वविद्यालय का कर्मचारी, छात्र नेता, डॉक्टर और शिक्षा माफिया का गैंग था। इस मामले की एसटीएफ पहले से ही जांच कर रही है।कुलपति के ये प्रमुख कार्य भी जांच की जद में
संस्कृति भवन: संस्कृति भवन का निर्माण कार्य अधूरा था। इन्होंने अधूरे निर्माण के बीच ही इसका उद्घाटन करवाया। इसके निर्माण में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत बजट में धांधली का आरोप है।डिजिटलाइजेशन: इनके कार्यकाल में डिजी लॉकर और चार्ट समेत अन्य दस्तावेजों का डिजिटलाइजेशन कार्य भी हुआ। इसमें कर्मचारियों ने भी पारदर्शिता न बरतने का आरोप लगाया था।
चार्ट की स्कैनिंग: परीक्षा विभाग, गोपनीय विभाग, माइग्रेशन, पुस्तकालय समेत अन्य के दस्तावेजों की स्कैनिंग का कार्य भी इन्हीं के कार्यकाल में शुरू हुआ। अभी ये कार्य चल रहा है।
पांच निदेशक हटाए: इन्होंने नए कुलपति की नियुक्ति से चंद दिनों पहले पांच संकायों के निदेशक को हटा दिया। इसमें कई वरिष्ठों की अनदेखी की। इसकी राजभवन में भी शिकायत की।
शिक्षकों की नियुक्ति: इनके कार्यकाल में स्थायी, संविदा और अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति हुई। इन पर गलत तरीके से विज्ञापन जारी करने का भी आरोप लगा।
संविदा समाप्त: इन्होंने अतिथि और संविदा शिक्षकों की सेवाएं विस्तार नहीं कीं। इससे कई संकाय में शिक्षकों की कमी हुई। इनके निर्णय के खिलाफ शिक्षकों ने कोर्ट की शरण भी ली है।