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UP: पुलिस ने की बेटे की पिटाई, टूट गया हाथ; लखनऊ तक पहुंचा मामला तो 24 घंटे में बदल गए पीड़ित के बयान

Mon, 23 Feb 2026 11:42 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 23 Feb 2026 11:42 AM IST
सार

मिढ़ाकुर पुलिस चौकी पर तैनात दो दरोगाओं पर एक नाबालिग की पिटाई और 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। आरोप लगाने वाले परिजन के बयान लखनऊ तक मामला पहुंचने के बाद 24 घंटे में ही बदल गए। 

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Statements Changed Within 24 Hours After Case Reached Lucknow Assault Allegations Withdrawn
पीड़ित - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

किरावली पुलिस की पिटाई से बेटे का हाथ टूटने का आरोप लगाने वाले परिजन के बयान लखनऊ तक मामला पहुंचने के बाद 24 घंटे में ही बदल गए। हाथ में फ्रैक्चर तो दूर, चाैकी में किसी तरह के उत्पीड़न से भी इन्कार कर दिया। झगड़े में गिरकर चोट लगने का दावा किया गया। इसी आधार पर एक्सरे और मेडिकल रिपोर्ट को पुलिस ने अपने मीडिया व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा किया है।
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किरावली के मिढ़ाकुर स्थित नानपुर गांव के बबलू ने शनिवार को बताया था कि बृहस्पतिवार शाम को हाईस्कूल के छात्र उनके भतीजे का 15 वर्षीय किशोर से झगड़ा हुआ था। मामले की शिकायत पुलिस से की गई थी। दरोगा अनुराग ने दोनों को फोन पर समझा-बुझाकर शांत कर दिया था। शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे दरोगा अनुराग और इशांत घर आए। भतीजे और दूसरे किशोर को चाैकी ले गए।
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आरोप लगाया कि वहां किशोर को छोड़ दिया गया। भतीजे को छोड़ने के एवज में 10 हजार रुपये मांगे गए। रुपये नहीं देने पर थर्ड डिग्री देकर उसका एक हाथ तोड़ दिया गया। मामले का संज्ञान लेते हुए एडीसीपी आदित्य सिंह ने दोनों दरोगा को निलंबित किया था। प्राथमिकी के लिए मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था। उधर, मामला मीडिया में आने के बाद रविवार को लखनऊ से कमिश्नरेट पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई।
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पीड़ित ने एक निजी चिकित्सक से मेडिकल कराया। पुलिस मीडिया सेल के व्हाट्सएप ग्रुप पर रिपोर्ट को साझा किया गया। इसमें हाथ में फ्रैक्चर की पुष्टि नहीं होने की बात है। वहीं पीड़ित का वीडियो बयान भी सामने आया है। इसमें बबलू ने कहा है कि नाबालिग भतीजे का झगड़ा हो गया था। इसमें वो गिर गया। दरोगा आए। उन्होंने बच्चों को चाैकी बुलाया। एसआई अनुराग और इशांत ने समझाया। उन्होंने किसी तरह की रकम की मांग नहीं की। इसके बाद समझाैता कराकर घर भेज दिया।

क्यों हुई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई?
छात्र के एक हाथ में चोट लगी थी। मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद एसीपी और एडीसीपी ने पूरे मामले की पड़ताल की थी। छात्र के हाथ में चोट पाए जाने पर दोनों दरोगा निलंबित कर दिए गए थे। अब सवाल उठ रहा है कि अगर पिटाई नहीं की गई तो दोनों दरोगा को निलंबित क्यों किया गया? पीड़ित ने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के भी आरोप लगाए थे।

झूठी शिकायत पर कार्रवाई नहीं
परिजन ने छात्र की पिटाई के मामले में दो दरोगा पर आरोप लगाए थे। मीडिया के सामने आकर 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग करने की भी बात कही थी। किरावली में यह दूसरा मामला हुआ, जब किसी की पिटाई की बात सामने आई। इस घटना में एसीपी ने भी पीड़ित से बात की थी। उनके सामने भी उन्होंने पिटाई की बात कही। इस आधार पर ही दरोगाओं को निलंबित किया गया। इस पूरे प्रकरण से आगरा पुलिस एक बार फिर चर्चा में है। सवाल उठ रहा है कि अगर पहली शिकायत झूठी थी तो पुलिस ने शिकायतकर्ता पक्ष पर कार्रवाई क्यों नहीं की।


नाबालिग को चौकी पर बैठाने के दोषी थे दरोगा
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि पीड़ित की ओर से कराए गए मेडिकल रिपोर्ट में हाथ की हड्डी टूटने की पुष्टि नहीं हुई है। अभी सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट मिलना बाकी है। नाबालिग को चाैकी पर बैठाया गया था। इसके लिए दोनों दरोगा दोषी हैं। उन्हें निलंबित किया जा चुका है। जांच अभी जारी है। अगर पीड़ित की तरफ से लिखित शिकायत की जाएगी तो विधिक कार्रवाई होगी। 

 
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