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UP: क्या घंटों AC में बैठते हैं? सावधान! आंखों की रोशनी तक पर पड़ सकता है असर, डॉक्टर ने दी अहम सलाह
Sat, 04 Jul 2026 11:49 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 04 Jul 2026 11:49 AM IST
सार
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. जीपी शर्मा ने बताया कि लंबे समय तक एसी में रहने से आंखों में सूखापन, जलन और संक्रमण की समस्या बढ़ सकती है। उन्होंने सलाह दी कि आंखों में परेशानी होने पर खुद से आई ड्रॉप न डालें, बल्कि नेत्र चिकित्सक की सलाह लेकर ही उपचार कराएं।
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एसी (AC)
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
आगरा के बरौली अहीर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नेत्र चिकित्सा अधिकारी ने शुक्रवार को मोतियाबिंद जैसे आंखों की बीमारियों पर चिंता जाहिर करते हुए बताया कि आजकल आंखों में जलन, आंखों का लाल होना, खुजली होने पर लोग आंखों को रगड़ने लगते हैं। इससे संक्रमण का खतरा रहता है। ऐसे में स्वयं इलाज न ले बल्कि चिकित्सक से परामर्श लें। यह जानकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरौली अहीर पर तैनात नेत्र परीक्षण अधिकारी डॉ. जीपी शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि तेज धूप और गर्मी से आंखों का बचाव आवश्यक है। इसके लिए अच्छी कंपनी के (uv) ग्लास वाले चश्मे का ही प्रयोग अच्छा होता है। इससे धूप से बचाव के साथ आंखों की भी सुरक्षा होती है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि अधिक देर एसी में बैठने से भी बचें इससे आंखों में सूखापन आ जाता है। गर्मी के मौसम में आंखें बंद कर ठंडे पानी से छींटे मारना लाभदायक है। जबकि आंखों में जलन, लाल होना, खुजली होने से संक्रमण का खतरा रहता है। आंखों में किसी भी तरह की समस्या आने पर मेडिकल स्टोर से ड्रॉप खरीद कर नहीं डालना चाहिए बल्कि नेत्र चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए और फिर दवा डालनी चाहिए। उन्होंने बताया कि गलत दवा के इस्तेमाल से कभी-कभी आंखों की रोशनी भी चली जाती है। मोतियाबिंद जैसी अन्य बीमारियां भी आंखों में हो जाती है, जिसका इलाज फिर कठिन हो जाता है।इस दौरान मुख्य फार्मासिस्ट संजय शर्मा भी मौजूद रहे।
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डॉ. शर्मा ने कहा कि अधिक देर एसी में बैठने से भी बचें इससे आंखों में सूखापन आ जाता है। गर्मी के मौसम में आंखें बंद कर ठंडे पानी से छींटे मारना लाभदायक है। जबकि आंखों में जलन, लाल होना, खुजली होने से संक्रमण का खतरा रहता है। आंखों में किसी भी तरह की समस्या आने पर मेडिकल स्टोर से ड्रॉप खरीद कर नहीं डालना चाहिए बल्कि नेत्र चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए और फिर दवा डालनी चाहिए। उन्होंने बताया कि गलत दवा के इस्तेमाल से कभी-कभी आंखों की रोशनी भी चली जाती है। मोतियाबिंद जैसी अन्य बीमारियां भी आंखों में हो जाती है, जिसका इलाज फिर कठिन हो जाता है।इस दौरान मुख्य फार्मासिस्ट संजय शर्मा भी मौजूद रहे।
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