एडीआरडीई में बनाए गए विशेष पैराशूट से समुद्र में उतरा सामान, जानें क्या है खासियत
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हवा से समुद्र में सामान पहुंचाने के लिए एडीआरडीई (एरायल डिलीवरी रिसर्च एन्ड डेवलपमेंट एस्टाबिलेसमेंट) आगरा ने पैराशूट डिजाइन किया है, जिसका परीक्षण बुधवार को गोवा के पास समुद्र में किया गया। समुद्र में आईएएनएस-315 स्क्वाड्रन ने आईएल-38 विमान से कैप्सूल गिराने का परीक्षण किया गया, जो सफल रहा।
एडीआरडीई के निदेशक एके सक्सेना ने बताया कि समुद्र में सफर कर रहे नेवी पोत के लिए आपात स्थिति में हवा से पानी में सामान गिराने की नई तकनीक सहायक न्यू जेनरेशन के लिए पैराशूट डिजाइन किया गया।
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नौसेना के किसी पोत को किसी भी आकस्मिक स्थिति में किसी सामान की जरूरत होगी, तो वायुसेना के आईएल 38 जहाज से उस सामान को एक कैप्सूल में रखकर एडीआरडीई, नेवल साइंस टेक्नोलॉजी लैब एवं मैसर्स अवनटेल कंपनी द्वारा विकसित/निर्मित पैराशूट से पोत के पास पानी में गिराया जाएगा।
कैप्सूल को नहीं पहुंचेगा कोई नुकसान
पोत पर सवार नौसैनिक कुछ ही मिनट में कैप्सूल को पानी से निकालकर उसमें रखे सामान का इस्तेमाल कर सकेंगे। बुधवार को हुए सफल ट्रायल में कैप्सूल को 380 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से समुद्र में गिराया गया। हमारे पैराशूट का इस्तेमाल कैप्सूल को बिना नुकसान पहुंचाए पानी में गिराने के लिए होगा। पैराशूट के निर्माण में एडीआरडीई के वैज्ञानिक विपिन वर्मा सहित अन्य लोगों का भी योगदान रहा।
'गगनयान' मिशन के लिए बनाया गया पैराशूट
बता दें कि देश के पहले अंतरिक्ष मानव मिशन गगनयान के क्रू मॉड्यूल की वापसी और रिकवरी सिस्टम में भी आगरा के एडीआरडीई (हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थान) के पैराशूट का इस्तेमाल किया जाएगा। इन पैराशूट को तैयार किया जा चुका है।
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