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विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष- जिले की धरा में छिपा है धरोहरों का खजाना, संरक्षण की दरकार

Sun, 26 Sep 2021 10:26 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 26 Sep 2021 10:26 PM IST
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Special on World Tourism Day - The treasure of heritage is hidden in the land of the district, in need of protection
छावनी का पुरातत्व संरक्षित मकबरा - फोटो : KASGANJ
कासगंज। जिले की धरा में धरोहरों का खजाना छिपा हुआ है, लेकिन संरक्षण के अभाव में यह दम तोड़ती नजर आ रही हैं। एटा में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का सब सर्किल बनने की घोषणा के बाद भले ही उम्मीदें जाग गईं हो, लेकिन जिले में विशेष सर्वेक्षण की जरूरत दिखाई दे रही है। सोमवार को विश्व पर्यटन दिवस है।
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जिले के पटियाली, सोरों और कासगंज के छावनी में पुरातत्व खजाने का भंडार है। सबसे अधिक पुरातत्व महत्व की प्राचीन धरोहरें सोरों मे हैं। पुरातत्व विभाग की सूची में सोरों का सीताराम मंदिर और छावनी का मकबरा का किला शामिल है। सीताराम मंदिर लहरा रोड स्थित है।
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यह मंदिर राजा सोमदत्त सोलंकी की यज्ञशाला के रूप में विख्यात है। इस मंदिर की चाहरदीवारी अत्यंत प्राचीन पत्थरों से निर्मित है तथा मंदिर के अंदर पत्थरों के विशाल खंभे लगे हुए हैं जिन पर संस्कृत एवं पाली भाषाओं में विविध प्रकार के लेख हैं। सीताराम मंदिर के एक शिलालेख में इसका जीर्णोद्धार सन 1064 ई. में पूर्ण होने का उल्लेख दर्ज है। इसके अलावा पटियाली और छावनी का किला भी काफी ऐतिहासिक है। यदि इन धरोहरों को पर्यटन विभाग बेहतर संरक्षण दे तो निश्चित ही पर्यटन के क्षेत्र में और अधिक विकास होगा।
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भागीरथी गुफा, योगेश्वर मंदिर, सूर्यकुंड, चंद्रकूप, प्राचीन गृध्रवट, आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित श्रीयंत्र, महाप्रभु बल्लभाचार्य जी की बैठक, तुलसीदास का गर्भगृह, तुलसी के गुरु नरहरि की पाठशाला भी सोरों की ऐतिहासिक धरोहरें हैं।
आदि तीर्थ सृष्टि के आरंभ का तीर्थ है। यहां पुरातात्विक संपदा का खजाना है। पुरातत्व विभाग को यहां अपना कार्यालय बनाकर विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी धरोहरों का संरक्षण करना चाहिए। आलोक दुबे, शिक्षाविद
ऐतिहासिक धरोहरों का जिले में भंडार है, लेकिन उनका सही ढंग से संरक्षण नहीं हो पा रहा था। तीर्थनगरी सोरों में तुलसीदास का गर्भगृह खराब हाल में है जिसका पुरातत्व विभाग को संज्ञान लेकर संरक्षण करना चाहिए। कबीर प्रताप, युवा।
प्राचीन काल में तीर्थनगरी राजा सोमदत्त सोलंकी की राजधानी, अकबर शासन काल में सोरों जनपद हुआ करता था। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में स्वतंत्रतावीरों का भी यह नगर प्रमुख स्थल रहा है। मनोज सिसौदिया, युवा

यहां प्रभु राम के भाई लक्ष्मण के साथ अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए पूजन अनुष्ठान व गंगा स्नान करने के लिए आने के उल्लेख मिलते हैं। उन्होंने एक टीले पर रघुनाथजी मंदिर पर रात्रि प्रवास किया था। यहां पुरातत्व का खजाना है। विवेक राजपूत, युवा
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