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सोमवती अमावस्या आज, तीर्थ नगरी पहुंचने लगे श्रद्घालु
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कासगंज। सोरों में भाद्रपद मास की सोमवती अमावस्या का स्नान पर्व सोमवार को होगा। इसकेेेेेेे साथ ही मंगलवार को भी अमावस्या स्नान होगा। स्नान पर्व को लेकर श्रद्धालुओं का तीर्थ नगरी पहुंचना शुरू हो गया है।
ज्योतिर्विद प्रशांत कोठेवार ने बताया कि अमावस्या तिथि 6 सितबर को सुबह 7 बजकर 38 मिनट से 7 सितंबर को सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। 6 सितंबर सोमवार की तिथि को पितरों की आत्म शांति के लिए तीर्थ पुरोहितों से पूजा पाठ कराने व गंगा में स्नान करने के लिए श्रेयस्कर माना गया है। 7 सितंबर मंगलवार को व्रत, स्नान व दान के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
इस अमावस्या को कुश ग्रहणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन तीर्थपुरोहित कुशा घास को उखाड़कर संग्रहित कर लेते हैं जो वर्ष भर पूजा पाठ व तर्पण कार्यों के लिए प्रयोग की जाती है। इस अमावस्या को पिठोरी अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति व सुख शांति के लिए 64 देवियों की आटे की मूर्ति बनाकर पूजा पाठ करती हैं। जिनमें मां दुर्गा प्रमुख रूप से होती है।
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पूजा पाठ के बाद इन मूर्तियों को गंगाजी में विसर्जित कर दिया जाता है। अमावस्या की पूर्व संध्या पर बड़ी संख्या श्रद्धालु हरि की पैड़ी में स्नान पर्व का पुण्य अर्जित करने के लिए तीर्थपुरोहितों के आवास, धर्मशालाओं व गेस्ट हाउसों में पहुंच चुके हैं।
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ज्योतिर्विद प्रशांत कोठेवार ने बताया कि अमावस्या तिथि 6 सितबर को सुबह 7 बजकर 38 मिनट से 7 सितंबर को सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। 6 सितंबर सोमवार की तिथि को पितरों की आत्म शांति के लिए तीर्थ पुरोहितों से पूजा पाठ कराने व गंगा में स्नान करने के लिए श्रेयस्कर माना गया है। 7 सितंबर मंगलवार को व्रत, स्नान व दान के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
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इस अमावस्या को कुश ग्रहणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन तीर्थपुरोहित कुशा घास को उखाड़कर संग्रहित कर लेते हैं जो वर्ष भर पूजा पाठ व तर्पण कार्यों के लिए प्रयोग की जाती है। इस अमावस्या को पिठोरी अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति व सुख शांति के लिए 64 देवियों की आटे की मूर्ति बनाकर पूजा पाठ करती हैं। जिनमें मां दुर्गा प्रमुख रूप से होती है।
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पूजा पाठ के बाद इन मूर्तियों को गंगाजी में विसर्जित कर दिया जाता है। अमावस्या की पूर्व संध्या पर बड़ी संख्या श्रद्धालु हरि की पैड़ी में स्नान पर्व का पुण्य अर्जित करने के लिए तीर्थपुरोहितों के आवास, धर्मशालाओं व गेस्ट हाउसों में पहुंच चुके हैं।