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MBBS छात्रों की मौत: मदद के लिए बढ़ाए होते हाथ तो...सिद्ध और तनिष्क की न जाती जान, IMA ने की ये अपील
Tue, 02 Dec 2025 09:53 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 02 Dec 2025 09:53 AM IST
सार
एमबीबीएस छात्र सिद्ध और तनिष्क की मौत से एसएन मेडिकल काॅलेज में शोक की लहर दौड़ गई। काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि हमने भविष्य के दो अच्छे डाक्टरों को खो दिया है।
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Road Accident In Agra
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा दिल्ली हाईवे के आईएसबीटी चाैराहे के पास हादसे में एमबीबीएस छात्र सिद्ध और तनिष्क की मृत्यु के बाद एसएन मेडिकल काॅलेज में शोकसभा की गई। सभी ने दो मिनट का माैन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। एसएन मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि हमने भविष्य के दो अच्छे डाक्टरों को खो दिया है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने शोक जताया और लोगों से कहा कि हादसा होने पर वीडियो बनाने के बजाय मदद के लिए हाथ बढ़ाएं। आईएमए के अध्यक्ष डाॅ. पंकज नगायच ने कहा कि घायलों को अस्पताल पहुंचाएं, पुलिस आपसे कोई पूछताछ नहीं करेगी। आज किसी और का घर उजड़ा है, कल यह कोई अपना भी हो सकता है। सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों की मौत ने झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है।
उन्होंने कहा कि आखिर हादसे के बाद गोल्डन आवर में घायलों को मदद क्यों नहीं मिला। तेज रफ्तार और ब्लैक स्पॉट्स पर लगाम कब लगेगी। हाईवे पर 24 घंटे ट्रॉमा एंबुलेंस और ग्रीन कॉरिडोर क्यों नदारद हैं। इन सवालों के जवाब कोई देने वाला नहीं है। उन्होंने सलाह दी है कि सड़क हादसे में सिर और रीढ़ की चोट जीवन बदल देती है। हेलमेट सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं बल्कि जान बचाने के लिए अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए। सभी कॉलेज अपने छात्रों को बेसिक लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग दें।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने शोक जताया और लोगों से कहा कि हादसा होने पर वीडियो बनाने के बजाय मदद के लिए हाथ बढ़ाएं। आईएमए के अध्यक्ष डाॅ. पंकज नगायच ने कहा कि घायलों को अस्पताल पहुंचाएं, पुलिस आपसे कोई पूछताछ नहीं करेगी। आज किसी और का घर उजड़ा है, कल यह कोई अपना भी हो सकता है। सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों की मौत ने झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है।
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उन्होंने कहा कि आखिर हादसे के बाद गोल्डन आवर में घायलों को मदद क्यों नहीं मिला। तेज रफ्तार और ब्लैक स्पॉट्स पर लगाम कब लगेगी। हाईवे पर 24 घंटे ट्रॉमा एंबुलेंस और ग्रीन कॉरिडोर क्यों नदारद हैं। इन सवालों के जवाब कोई देने वाला नहीं है। उन्होंने सलाह दी है कि सड़क हादसे में सिर और रीढ़ की चोट जीवन बदल देती है। हेलमेट सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं बल्कि जान बचाने के लिए अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए। सभी कॉलेज अपने छात्रों को बेसिक लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग दें।
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