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UP News: जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से बिगड़े हालात, भटक रहे मरीज...देखें वीडियो

Sat, 17 Aug 2024 08:42 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 17 Aug 2024 08:42 AM IST
सार

कोलकता की घटना को लेकर एसएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। ऐसे में मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं। 
 

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Situation worsened due to strike of junior doctors patients wandering watch video
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में कोलकाता में प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के विरोध में पांचवें दिन भी जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इससे एसएन मेडिकल कॉलेज में हालात खराब हो गए हैं। शुक्रवार को जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी नहीं चलने दी और गेट पर ताला लगा दिया। इससे मरीजों का न तो पर्चा बना और न ही उन्हें दवा मिली। इलाज की आस में मरीज भटकते रहे। मायूस होकर करीब 3000 मरीज बिना इलाज लौट गए।
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एसएन में रोजाना 3000 मरीज आते हैं। इसमें ओपीडी में करीब 2500 और बाकी के जांच कराने वाले हैं। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से खून की जांच, एक्सरे, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड भी नहीं हुए। वायरल बुखार, हड्डी रोग, छाती रोग, त्वचा रोग, नेत्र रोग समेत अन्य के मरीज डॉक्टर तो कभी ओपीडी के चक्कर लगाते रहे। कई की हालत भी खराब हो गई, लेकिन डॉक्टरों ने मरीज नहीं देखे।

 
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कई मरीजों ने तो ओपीडी खुलने की आस में घंटों इंतजार भी किया। शाम को जूनियर डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया। इसमें वरिष्ठ चिकित्सक भी शामिल हुए। एसएन रेजिडेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. महिपाल यादव ने कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून, महिला चिकित्सक के दोषियों को फांसी की सजा की मांग पूरी नहीं होने तक हड़ताल जारी रहेगी।

 
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ऑपरेशन की तारीख भी नहीं मिल रही
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से सामान्य ऑपरेशन भी नहीं हो रहे हैं। ओपीडी नहीं होने पर तारीख भी नहीं मिल पा रही है। सबसे ज्यादा हड्डी रोग, सर्जरी विभाग, नेत्र रोग, ईएनटी रोग के मरीजों को दिक्कत है। सामान्य तौर पर एक दिन में इन रोगों के 30-40 ऑपरेशन होते हैं।


 

ये बोले मरीज-तीमारदार:
भटकता रहा, नहीं हुई जांच
एटा के रूप किशोर ने बताया कि छोटे भाई के गले में परेशानी है। इसकी जांच कराने के लिए आया था। ओपीडी पर ताला लगा, इमरजेंसी भी गया, लेकिन जांच और इलाज नहीं मिल पाया।

 

खून की जांच नहीं हो सकी
फिरोजाबाद की मीनेश देवी ने बताया कि मां की 12 अगस्त को जांच कराई थी, दो दिन से चक्कर काट रही हूं, रिपोर्ट भी नहीं मिल पा रही है। इससे बीमारी के हिसाब से दवाएं भी शुरू नहीं हुई।

 

इमरजेंसी, ओपीडी दौड़ता रहा
हाथरस के हरिओम सिंह ने बताया गले की बीमारी है। दर्द भी हो रहा है। इमरजेंसी गया तो वहां से कहा कि ओपीडी में दिखाओ, यहां आया तो ताला लगा। पूरा दिन भटकने पर भी इलाज नहीं मिला।
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